डरावनी खबरें प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जिसमें सोशल मीडिया पर अनगिनत फेक वीडियो

 

डरावनी खबरें प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जिसमें सोशल मीडिया पर अनगिनत फेक वीडियो

कोरोना ( कोविड-19) वायरस का संक्रमण फैलने को लेकर कई डरावनी खबरें प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जिसमें सोशल मीडिया पर अनगिनत फेक वीडियो द्वारा इस डर का फायदा उठाकर केवल धन कमाने की मंशा से समाज को गुमराह किया जा रहा है। जिसको लेकर समाज अत्यंत फिक्रमंद है। इसमें बच्चें भी शामिल हैं, तब जाहिर सी बात है ऐसे मुश्किल समय में बच्चें पूरी तरह से अभिभावकों पर ही निर्भर है। और जहां अभिभावक ही जागरूक नहीं है वहां वास्तव में स्थिति गंभीर रूप धारण करने में देर नहीं होगी, यदि समय रहते ही जागरूकता नहीं बढ़ पाई। हमारा भारत गांवों की सादगी से विश्व प्रसिद्ध है, भारत योग गुरु होने के साथ- साथ अपनी संस्कृति का परचम विश्व भर में लहरा चुका है।

 

 

परन्तु इसके साथ- साथ यह भी सर्वविदित है कि संचार माध्यम से आज भी गांवों में दूरी है। जहां आज भी कुछ खबरें सौ मुंह से गुजरकर एक भय भूत के रूप में गांवों में प्रसारित होती है। आज जहां हमारे प्रधानमंत्री महोदय द्वारा मर्मस्पर्शी अपील हम सभी भारतीयों से की गई। हम सभी का नैतिक कर्तव्य है कि हमें स्वयं अनुशासित होकर इस संक्रामक वायरस का सामना करना होगा। सोशल मीडिया पर सभी जागरूक देशवासियों का समर्थन एवम् प्रचार भरपूर देखने को मिल रहा है, परन्तु गांवों में बच्चों की स्थिति एकदम विपरीत है। जहां विद्यालयों के बंद होते ही जानकारी प्रसारित होती जैसे थम सी गई है। जिसके साथ ही भय भूत जैसी खबरों से बच्चें और बुजुर्गों में भय व्याप्त है तो वहीं युवा पूरी तरह से आश्वस्त होकर घूम रहे हैं कि डर केवल 10 वर्ष से कम वाले बच्चों को तथा 60 पार वाले बुजुर्गो के लिए है, एक मिथ्या यह भी प्रचलित है कि मोदी जी ने रास्ते बंद कर दिया है अब वायरस रास्ता भटक जाएगा । ग्रामीण परिवेश को नजदीक से आंकने के पश्चात, अपने इस लेख के माध्यम से मै सभी शिक्षित पीढ़ी से अनुरोध एवम् अपेक्षा रख रही हूं कि पोस्टर, अखबार, ऑडियो, वीडियो आदि जिस भी सुरक्षित माध्यमों से ज्यादा से ज्यादा ग्रामों तक जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करें।

 

सही सूचना और बचाव के उपाय ही केवल एकमात्र रास्ता हम सभी के पास है, जिससे कोरोना को लेकर भय भूत और असतर्कता से निश्छल भविष्य को खतरें से बचाया जा सके। क्योंकि इस वायरस की इस चैन को हम सभी को तोड़ना है । कोरोना एक संक्रामक वायरस है, प्रत्येक संक्रामक वायरस का एक निश्चित चक्र होता है ठीक उसी तरह से इसका भी चार स्टेज का चक्र है। जैसा कि हम सभी ये जानते हैं कि यह संक्रमण चीन से शुरू हुआ और शुरुवाती लापरवाही से आज वहां भयावह स्थिति व्याप्त है। पहली स्टेज में यह संक्रमण एक देश से दूसरे देश में पहुंचता है। जैसे हमारे यहां यह स्थिति उत्पन्न हुई। तब वायरस दूसरे स्टेज पर संक्रमित व्यक्ति से संक्रमण असावधानी से दूसरे व्यक्तियों से मिलने पर फैलने लगता है। वर्तमान में भारत में वहीं दूसरी स्टेज चल रही है ।

 

 

हालांकि सरकार द्वारा पूरी सुरक्षा व चौकसी की गई विदेश से लौटे यात्रियों की जांच में, परन्तु कुछ असंवेदनशील व्यक्तियों द्वारा सीमा में प्रवेश कर लेने के उपरांत पार्टियां तथा मिलना जुलना असावधानी के साथ जारी रखा गया, परिणाम स्वरूप वायरस दूसरे स्टेज में संक्रमित व्यक्ति से देश में ही अन्य व्यक्ति को संक्रमित करके संक्रमितों की संख्या बढ़ते हुए देश में पहुंचता दिख गया। जब शिक्षित व्यक्तियों से सावधानी बरतने में चूक हो गई, तब ग्रामों में अशिक्षित परिवारों से उम्मीद रखना एक बहुत ही बड़ी जिम्मेदारी हम सभी के लिए प्रश्नों सहित खड़ी है। जैसा कि हम सभी जानते हैं ग्रामों से सजा भारत मेडिकल सुविधाओं में अभी अग्रणी नहीं है तब संक्रमण को फैलने से रोकना हम सभी की प्राथमिकता में बिना भयभीत होकर आ जाना चाहिए।

 

बेशक बच्चें और बुजुर्गों की इम्यूनिटी की कमी उनके लिए वायरस से खतरा है परन्तु युवा भी वायरस के वाहक है अतः हम सभी को वायरस का वाहक नहीं बन सके इतने प्रयास अनिवार्यता से करने होंगे। वरना वायरस की तीसरी स्टेज जब कम्युनिटी में तेजी से वायरस फैलता है वह भी जल्द सामने हो सकती है और फिर अंतिम चरण महामारी के रूप में चौथी स्टेज प्रलयकारी। केवल 14- 24 घंटे का खुद को होम लॉक्ड नहीं, बल्कि संयमित होकर हम सभी को अधिक से अधिक समय तक सोशल डिस्टेंडिंग बढ़ानी चाहिए। इसको इस तरह से समझे कि इस वायरस को जीवित शरीर की आवश्यकता है फैलने के लिए निर्जीव वस्तुओं पर इसका जीवन कुछ घंटो से लेकर अधिक से अधिक 3 दिन है, यदि हम अनावश्यक घर से नहीं निकलेंगे तब निर्जीव वस्तुओं से दूरी होने पर यह स्वतः ही खत्म हो जाएगा अथवा इसका संचरण नहीं होगा।

 

 

अमूमन हम 17-25 बार अपने चेहरे पर हाथ लगते हैं अब सावधानी जरूरी है, बार बार अपने हाथों को साफ करते रहे और आंख, मुंह, नाक के पास हाथों को ले जाने से बचे। अतिआवश्यक होने पर यदि बाहर जाना भी पड़ जाए तब मास्क या कपड़े से मुंह नाक ढककर किसी भी वस्तु , व्यक्ति के सीधे स्पर्श से बचें। साथ ही अनावश्यक अपने घर पर भी प्रवेश ना दे। लोगो से एक मीटर की दूरी बनाकर रखे । साधारण खांसी, जुकाम आदि में भी खांसते, छींकते, मुंह पर हाथ ना रखें, टिशू पेपर का प्रयोग करें और तुरंत बंद डस्टबिन में फेंक कर हाथ साफ करें। विटामिन सी युक्त पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन, अनिवार्य योग अभ्यास , देशी सस्ती व आसानी से प्राप्त गिलोय, तुलसी, इलायची, काली मिर्च आदि के सेवन द्वारा इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत करने के प्रयास किए जाने चाहिए। भूखे पेट बिल्कुल ना रहे। आजकल सोशल मीडिया पर गोमूत्र पार्टी, हवन मंडली आदि मेलमिलाप के फायदे तेजी से प्रसारित है ऐसे किसी भी भीड़ एकत्र करने जैसे क्रिया कलापों से दूर रहें।

 

 

ध्यान रखें देश और हमारे निश्छल बच्चों के लिए हमारी सतर्कता व जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। अपनी सुरक्षा आज देश की सुरक्षा का जिम्मा आज आप सभी के जिम्मे है। यदि हम सभी अपने घर एवम् परिवार को संक्रमण मुक्त रख पाए तो निर्जीव वस्तुओं पर वायरस निश्चित अंतराल पर समाप्त हो ही जायेगा। और जिन संक्रमित लोगो की पुष्टि अभी नहीं हुई है वो भी निर्धारित 14-15 दिनों में लक्षण दिखने पर सरकारी व्यवस्था में उनको उचित ट्रीटमेंट दिया जा सकेगा। जिससे यह चैन टूट जाएगी और हम तीसरे और चौथे प्रलयकारी स्टेज से बच पाएंगे। ध्यान रखें हम अपने सीमित संसाधनों वाले देश की अमूल्य निधि है। खुद को सुरक्षित रखे और देश का साथ दे।

 

 

क्योंकि अमूमन किसी भी वायरस की वैक्सीन बनने में वक़्त लगता है और अभी हम सभी के पास केवल जागरूकता और सोशल डिस्टेंडिग ही उपाय है। यदि आपको या आपके परिवार में कुछ ऐसे लक्षण दिखे तब सरकार द्वारा आपके इलाके के नजदीकी स्वास्थ्य कर्मी के मोबाइल नंबरों की जानकारी ऑनलाइन दी गई है, वहां बिना डरे कॉल करें , ध्यान रखें आपका खुद का बचाव ही सबका बचाव है छुपाने से कोई हल नहीं है बल्कि परेशानी बढ़ेगी। कोविड- 19 की वैक्सीनेशन भले ही अभी नहीं परन्तु इसमें जान का जौखिम प्रतिशत केवल 6% है, बल्कि इसके संक्रमण फैलने का खतरा प्रलयकारी है।कोरोना से जुड़ी कोई जानकारी लेने या देने के लिए हेल्पलाइन नंबर +91-11-23978046 पर फोन किया जा सकता है।

 


लेखिका
कोमल त्यागी
स. अ.
प्रा. वि. ट्याला, हापुड़
उत्तर प्रदेश

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