AtalHind
लेख

तथाकथित धर्म संसद आयोजकों पर कोई भी कार्रवाई की जाए, चुनावी लाभ भाजपा को ही मिलेगा

वे भी जानते हैं कि लगभग बीस करोड़ लोगों की हत्या संभव नहीं है. न तो इतिहास में ऐसा कभी हुआ है न हो सकता है. इसलिए एक वक्ता जो सौ ‘सैनिकों’ द्वारा बीस लाख मारने की बात कर रही थीं, उसे बकवास माना जाना चाहिए. 

धर्म संसद आयोजकों पर कोई भी कार्रवाई की जाए, चुनावी लाभ भाजपा को ही मिलेगा

Advertisement

BY निर्मल चंद्र अस्थाना

गत 17-19 दिसंबर के दौरान हरिद्वार में आयोजित तथाकथित धर्म संसद में जो भाषण दिए गए वे अपने आप में राजद्रोह जैसे गंभीर अपराध के पात्र हैं. लेकिन पुलिस ने मात्र सेक्शन 153ए के तहत केस दर्ज किया. वास्तविक कारण तो आप समझ ही सकते हैं.

पर पता चला है कि उनकी गिरफ़्तारी न करने के पीछे पुलिस ने तर्क दिया है कि इस धारा में सजा सात वर्षों से कम है और जाब्ता फौजदारी के सेक्शन 41 में 2009 में किए गए संशोधन के अनुसार ऐसे आरोपों में गिरफ़्तारी करना अनिवार्य नहीं है.

Advertisement

इस तर्क को तभी स्वीकार किया जा सकता है जब उत्तराखंड पुलिस यह प्रमाणित करे कि वह किसी भी मुजरिम को जिस पर सात वर्षों से कम सजा के अपराध के आरोप हों, कभी भी गिरफ्तार नहीं करती आई है.मीडिया में रिपोर्ट हुआ है कि सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें धर्म संसद के तीन आरोपी और अन्य धार्मिक नेता उत्तराखंड पुलिस के एक इंस्पेक्टर के साथ हंसी-मज़ाक़ करते दिख रहे हैं.

वीडियो में आरोपित अन्नपूर्णा पुलिस ऑफिसर से कहती दिख रही हैं कि पुलिस को जांच में निष्पक्ष होना चाहिए. इस पर बगल में खड़े नरसिंहानंद ने कहा, ‘लड़का हमारे तरफ होगा‘ और उस पर कमरे में मौजूद सभी लोग हंस पड़े और इंस्पेक्टर भी मुस्कराने लगा.

Advertisement

दिसंबर 26 को पत्रकार अलीशान जाफरी ने ट्विटर पर पोस्ट किया कि और धर्म संसद आयोजित करने की तैयारी है. उसी दिन यूट्यूब पर ‘स्वामी अमृतानंद’ नामक चैनल ने एक वीडियो भी अपलोड किया जिसका शीर्षक है ‘क्यों ज़रूरी है धर्म संसद।’

लगभग आठ मिनट लंबे इस वीडियो में नरसिंहानंद का एक व्यक्ति इंटरव्यू ले रहा है जिसके माइक पर ‘जीएनटी-आज तक’ का लोगो लगा है.

इस वीडियो की रिकॉर्डिंग हरिद्वार की धर्म संसद के बाद हुई है. इसमें नरसिंहानंद ने बताया कि अगली धर्म संसद जनवरी 1-2 को डासना देवी मंदिर, गाज़ियाबाद में करने की योजना है और उसके बाद जनवरी 23 को अलीगढ़ में. उसके बाद हिमाचल प्रदेश और कुरुक्षेत्र में करना है पर उनकी तारीखें नहीं बताईं.

Advertisement

नरसिंहानंद ने ये भी बताया कि देश की पहली धर्म संसद सितंबर 6-7, 2012 में देवबंद में आयोजित की गई थी, जिसमें कोई तीस हज़ार लोगों ने भाग लिया था. लेकिन अखिलेश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. तब से हर छह माह पर धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है.

नरसिंहानंद के शब्दों में धर्म संसदों का उद्देश्यवीडियो में नरसिंहानंद ने बड़ी बेबाकी से बात की है. उन्होंने कहा कि धर्म संसद के मुख्य उद्देश्य हिंदू धर्म की रक्षा करना; हिंदुओं को इस्लामिक जिहाद की सच्चाई बताना; और उनको आत्मरक्षा और जिहाद के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार करना हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि इस्लामिक जिहाद भारत के लिए ही नहीं वरन सारी दुनिया के लिए खतरा है और सरकार हिंदुओं को बचा नहीं पाएगी.

Advertisement

जब इंटरव्यू लेने वाले ने उनसे ‘हिंदू खतरे में है’ इस आरोप की व्याख्या करने को कहा तो वे बताने लगे कि उन पर कई जानलेवा हमले हुए हैं; अभी हाल में देहरादून के पास एक व्यक्ति को पत्थरों से मार डाला गया; एक डॉक्टर बीएस तोमर का क़त्ल हुआ; कुल मिलाकर तीन वर्षों में छह हिंदुओं की मुसलमानों द्वारा हत्या हुई है और उनकी बेटियों के जीवन बर्बाद किए जा रहे हैं.

जब ये कहा गया कि ये तो कुछ ही घटनाएं हैं तो इस पर उन्होंने कहा कि उनकी धारणा 1,400 वर्षों के इतिहास पर आधारित है.

फिर उन्होंने कहा कि इस्लामिक जिहाद एक संगठित अपराध है और इस्लाम संगठित अपराधियों का गिरोह है जो वही करते हैं जो उनकी किताबों में लिखा है. उनके अनुसार, इसमें शामिल हैं हिंदुओं को धोखे से मारना, उनकी औरतें छीन लेना और उनके बच्चों को उठा लेना.

Advertisement

उन्होंने ये भी कहा कि पुलिस ऐसे मामलों में कुछ नहीं करती और करना चाहती भी है तो मुसलमान हिंदू गवाहों को गवाही देने नहीं देते.

उन्होंने जोर देकर कहा कि मीडिया भले ही इन चीज़ों को तवज्जो न दे, वे ऐसा नहीं करेंगे. इसके बाद उन्होंने घोषणा की कि अब हिंदू बदला लेंगे, लड़ेंगे और अपनी रक्षा करेंगे.उन्होंने कहा कि साधु का कर्तव्य होता है कि धर्म की रक्षा के लिए लड़े और ज़रूरत पड़े तो अपनी जान भी दे दे. स्वयं अपने साधु होने के इशारे से उन्होंने कहा कि वे उस दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब कोई जिहादी उनका क़त्ल कर दे. हिंदू धर्म बलिदान मांग रहा है. अभी वो एक व्यक्ति हैं, मर कर वे एक ‘विचार’ बन जाएंगे.

अचानक ताबड़तोड़ धर्म संसदें आयोजित करने का क्या उद्देश्य हो सकता है?एक तरफ वे खुद ही कह रहे हैं कि धर्म संसदें हर छह माह पर आयोजित की जाती रही हैं. तो फिर आगामी लगभग एक माह में तीन धर्म संसदें आयोजित करने के पीछे क्या रहस्य है?

Advertisement

इनमें से आगामी दो यूपी में करने की योजना है जहां जल्दी ही चुनाव होने वाले हैं. स्पष्ट है कि उद्देश्य सिर्फ धर्म की रक्षा नहीं हो सकता.

आपने खुद ही फ़रमाया कि इस्लाम की डिज़ाइन में ही हिंदू धर्म का विरोध निहित है. इसका मतलब हुआ कि ये प्रोग्राम तो चौदह सौ सालों से चल रहा है.

अब देश में हाल-फ़िलहाल में तो ऐसा कुछ भी घटित नहीं हो गया है जिससे ये निष्कर्ष निकाला जा सके कि हिंदू धर्म पर अचानक कोई तथाकथित खतरा बढ़ गया है या कोई इमरजेंसी उत्पन्न हो गई है.

Advertisement

बहस के लिए अगर मान भी लिया जाए कि ये लोग हिंदू धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो चौदह सौ साल पुराने प्रोग्राम के प्रतिकार में जो कुछ भी किया जाना है उसमें भी तो काफी समय लगेगा. ये अचानक क्या हो गया कि आपको ताबड़तोड़ धर्म संसदें आयोजित करने की ज़रूरत आन पड़ी?

सारी क़वायद का उद्देश्य भाजपा को चुनावी फायदा पहुंचाना ही हो सकता है

कागज़ पर भले ही ये लोग ऐसा कहते हों कि उनका भाजपा से आधिकारिक तौर पर कोई संबंध नहीं है लेकिन यह बात किसी से छिपी नहीं है कि उनके क्रियाकलापों का फायदा भाजपा के अलावा किसी अन्य को नहीं मिल सकता.

Advertisement

भाजपा आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहे, सभी जानते हैं कि पार्टी की सबसे बड़ी शक्ति उसका हिंदू कार्ड ही है.

अब चुनाव के परिप्रेक्ष्य में यह भी सच है कि हिंदू वोट प्रायः जाति के आधार पर विभिन्न पार्टियों में बंट जाते हैं. भाजपा के लिए सदा से ही हिंदू वोटों का इस प्रकार जाति के आधार पर बंट जाना चिंता का विषय रहा है क्योंकि उनकी प्रतिद्वंद्वी सपा और बसपा का जनाधार मूलतः जातिगत समीकरणों पर ही टिका है.

इसको कौन रोक सकता है? उत्तर है: धर्म! जब बात धर्म की रक्षा पर आये तो धर्म ही एक ऐसी चीज़ है जो जाति पर भारी पड़ सकती है. इसलिए ‘हिंदू धर्म खतरे में है’ और ये धर्म संसदें हिंदू धर्म की रक्षा करना चाहती हैं ऐसा कह कर हिंदू वोटों को जातिगत निष्ठाओं के परे जाकर धर्म रक्षा के नाम पर भाजपा के पक्ष में संगठित किया जा सकता है.

Advertisement

इस दृष्टिकोण से देखने पर आप समझेंगे कि ये धर्म संसदें कितनी चालाकी भरा प्लान हैं. इस क़वायद के ज़रिये एक तीर से दो नहीं, कई निशाने साधे गए हैं.

आपको याद होगा कि हरिद्वार धर्म संसद में गोलमोल शब्दों में या थोड़ा घुमा-फिराकर ही सही पर बारंबार इशारा किया गया कि वे मुसलमानों का जातीय संहार (एथनिक क्लीन्ज़िंग) या जेनोसाइड (नरसंहार) करने की नीयत रखते हैं.

अब इतना तो वे भी जानते हैं कि लगभग बीस करोड़ लोगों की हत्या संभव नहीं है. न तो इतिहास में ऐसा कभी हुआ है न हो सकता है. इसलिए एक वक्ता जो सौ ‘सैनिकों’ द्वारा बीस लाख मारने की बात कर रही थीं, उसे बकवास माना जाना चाहिए.

Advertisement

ऐसी बेतुकी बातें करने के पीछे एक रहस्य है. रहस्य ये है कि इससे मुसलमानों को भड़काया जाए. कैसे?

इतना बड़ा देश है, कहीं न कहीं कोई न कोई मुसलमान भड़ककर बदला लेने सम्बंधित ऐसा बयान दे ही देगा जिसका उपयोग ये लोग हिंदुओं को पुनः आक्रोशित और जातिगत निष्ठाओं के बाहर जाकर संगठित करने के लिए कर पाएंगे.कहा जाएगा कि देखो मुसलमानों की असलियत सामने आ गई. हम यही तो तुमको अब तक समझा रहे थे.

दूसरे, वे जान-बूझकर उस सीमा तक भड़काऊ बातें करना चाहते हैं जहां पुलिस द्वारा उनके प्रति नरमी बरतने के बावजूद शायद अदालत के आदेश पर ही सही, पर उनकी गिरफ़्तारी की नौबत आ जाए. वे इसी का इंतजार कर रहे हैं.

Advertisement

गिरफ़्तारी उनके लिए संजीवनी साबित होगी. चूंकि अनेक टीवी चैनल उनके समर्थक हैं, इसलिए उनकी गिरफ़्तारी अपने आप में एक समारोह बना दी जाएगी जिसके दृश्य को टीवी पर निरंतर प्रसारित किया जाएगा.

संभव है कि पुलिस बस में बैठाए जाने के पूर्व उनसे छोटा-मोटा बयान भी ले लिया जाए. इन बयानों का वही प्रभाव पड़ेगा जो वास्तविक धर्म संसद का पड़ता.

आप देखें कि किस चतुराई से इन्होंने समूचे विपक्ष को या कहिए तो पूरे देश को दोनों ही परिस्थितियों में नुकसान की हालत में ला खड़ा किया है. इनकी गिरफ्तारी न करिए तो ये उनकी ललकार को शासन और समाज दोनों की मौन स्वीकृति देना होगा. फिर तो अनेक हिंदू वोटर यही समझेंगे कि इनकी बात में कुछ न कुछ तथ्य तो होगा ही, तभी तो शासन चुप है.

Advertisement

समय निकल जाने पर देर से गिरफ्तारी करना उन्हें बेवजह हीरो बना देगा. ये लोग प्रचार करेंगे कि देखो हमने हिंदू धर्म की रक्षा में अपनी स्वतंत्रता को कुर्बान कर दिया.

दोनों ही स्थितियों में जातिगत अलगाव के बाहर जाकर हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा को फायदा देगा.

नरसिंहानंद चतुर व्यक्ति हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें शंका है कि सरकार शायद जनवरी 1-2 को गाज़ियाबाद में आयोजित धर्म संसद की अनुमति न दे.

Advertisement

संभव भी है क्योंकि चुनाव के पूर्व सरकार बिलकुल नहीं चाहती कि क़ानून व्यवस्था किसी भी तरह से प्रभावित हो. योगी सरकार का एक प्रमुख चुनावी मुद्दा ही यही है कि उन्होंने राज्य में क़ानून व्यवस्था को सुधार दिया है.

इसी परिप्रेक्ष्य में 6 दिसंबर को शासन ने मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सम्बंधित जनसभा और संकल्प यात्रा की अनुमति नहीं दी थी.

ये भी एक बड़ी चालाकी भरी योजना थी. आयोजक स्वयं भी नहीं चाहते थे कि वे पुलिस से बेवजह उलझें और क़ानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़े.

Advertisement

चालाकी इसमें थी कि जनसभा और संकल्प यात्रा का प्रचार कर करके श्री कृष्ण मंदिर के मुद्दे को जनमानस में अच्छी तरह से न केवल उठाया गया बल्कि भर भी दिया गया. उद्देश्य उसी से पूर्ण हो गया.

हिंदू वोटर को समझ आ गया कि ये लोग श्री कृष्ण मंदिर के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं. उचित समय आने पर मंदिर बन भी जाएगा.

दिसंबर 29 को अमरोहा में एक रैली को संबोधित करते हुए योगी जी ने इशारा कर ही दिया कि अयोध्या-काशी में काम हो रहा है तो मथुरा-वृंदावन कैसे पीछे छूट सकता है?

Advertisement

वैसा ही उद्देश्य ये लोग गाज़ियाबाद और अलीगढ़ में धर्म संसद के आयोजन से सिद्ध करना चाहते हैं. शासन से अनुमति मिल गई तो पौ बारह. नहीं मिली तो हिंदू वोटर को सोशल मीडिया और टीवी पर प्रचार से बताया जाएगा कि देखो हम तुम्हारी और तुम्हारे धर्म की रक्षा के लिए कितने चिंतित और प्रतिबद्ध हैं.

कोशिश की जाएगी कि अनुमति न मिलने का दोष भी उदारवादियों, मुसलमानों, और वामपंथियों और तथाकथित हिंदू-विरोधी अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रकारियों आदि पर मढ़ दिया जाए. कहा जाएगा कि देखो इनके विरोध के चलते अनुमति नहीं मिली.

याद दिला दें कि इंग्लैंड में ‘लंदन स्टोरी’ नामक प्रवासी भारतीयों का संगठन नरसिंहानंद की गिरफ़्तारी की मांग कर रहा है. कुल मिलाकर इस वक़्त इनके दोनों हाथों में लड्डू हैं.

Advertisement

(लेखक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं, जो केरल के पुलिस महानिदेशक और बीएसएफ व सीआरपीएफ में अतिरिक्त महानिदेशक रहे हैं.)

Advertisement

Related posts

फादर, उन्हें माफ़ कर देना…

admin

नौजवान राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की नारेबाजी के चक्कर में न पड़ें.- सुशील गुप्ता

admin

पेगासस खुलासों पर नरेंद्र मोदी और इमैनुएल मैक्रों की भिन्न प्रतिक्रियाओं के क्या अर्थ हैं

admin

Leave a Comment

%d bloggers like this:
URL