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दादी, नानी के पुराने नुस्खे रोग भगाने में सार्थक. युवा पीढ़ी पुराने रीति रिवाजों से किनारा कर गई

दादी, नानी के पुराने नुस्खे रोग भगाने में सार्थक. युवा पीढ़ी पुराने रीति रिवाजों से किनारा कर गई

 

Grandma, granny’s old prescription worthwhile in curing diseases. The younger generation shied away from the old customs

 

फतह सिंह उजाला

पटौदी। कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण पर पौराणिक रीति रिवाज व टोने टोटके करती ग्रामीण महिलाओ को भले ही आज के विज्ञान के युग में हंसी का पात्र समझा जाता हो। लेकिन शुक्रवार को देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अप्रैल को रात्रि 9 बजे से 9: 9 बजे तक यानि 9 मिनट तक घरों के बाहर लाइट बंद करके दीपक, मोमबती या मोबाईल की टार्च जलाने की अपील करके यह साबित कर दिया है कि प्राचीन काल से ही रोगों के खिलाफ ग्रामीण आंचल में किए जा रहे पारंपरिक उपचार कितने सार्थक है।

फर्रुखनगर क्षेत्र के शहरी व ग्रामीण आंचल में पिछले एक पखवाडे से कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए पौराणिक रीति रिवाज के अनुसार टोटके जैसे घरों के बाहर 9-9 गाय के घी अथवा सरसों के तेल के दीपक जलाना, घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ हल्दी के थापे लगाना, घरों की दीवारों पर गाय के गोबर की लाइन अथवा कार खिंचना, रात्रि के समय चंद्रमा को जल देना, महिलाओं द्वारा हरे और लाल कलर की चुडिय़ा पहने, घर में बेटे के जन्म पर कासी की घातु की थाली बजाना, घर के मुख्य द्वार पर आग जला कर रखना आदि की रिवाज को अपनाया जा रहा है।ग्रामीणों का मानना है कि जब भी मानव जाति या पशुओं पर कोई संकट या रोग अपनी गिरफ्त में लेता है तो उसमें दवाईया कम देशी उपचार व उपाये ही ज्यादा सारथक होते है। वहीं रोगियों के रहने की घर में ही अलग रहने की व्यवस्था की जाती थी। लेकिन जैसे जैसे विज्ञान के दौर ने रफ्तार पकडी है तभी से युवा पीढ़ी इन पुराने रीति रिवाजों व टोने टोटकों से किनारा कर गई। लेकिन कोरोना वायर के बढ़ते संक्रमण पर तमाम प्रयासों के बावजूद भी काबू नहीं पाया जा रहा है तो ऐसी हालत में दादी, नानी मां के पुराने नुस्खे ही इस रोग को दूर भगाने में कारगर साबित हो सकते है।

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