पुलिस को एक बच्ची से क्या खतरा था?या फिर भारतीय संसद भवन और वहां कर हर चौंक चौराहा  नेताओ की जागीर है ,

दिल्ली पोलिस ने हैवानियत की सभी हदें पार की
पुलिस को एक बच्ची से क्या खतरा था?

पुलिस को एक बच्ची से क्या खतरा था? या फिर भारतीय संसद भवन और वहां कर हर चौंक चौराहा  नेताओ की जागीर है ,
दिल्ली (राजकुमार अग्रवाल )

दिल्ली। नेताओं और पोलिस की निगाह में या तो डाक्टर प्रियंका के साथ हुआ सामूहिक बलात्कार सही था ,या फिर निहत्थी लड़की आंतकवादी थी अगर ऐसा नहीं था तो फिर  जब सारा देश हैदराबाद में हुई रेप की दर्दनाक घटना से आक्रोश में है वहीं अगर एक छात्रा अपनी आवाज़ उठाने की और नेताओं को जगाने की कोशिश करती है तो क्या गलत है?ऐसे में लड़की को उठाकर थाने में मारते हैं। थाने में ताला लगाकर पुलिस अपनी कमज़ोरी का प्रमाण दे रही है! यह बहुत ही शर्मनाक!

या फिर क्या  भारतीय संसद भवन और वहां कर हर चौंक चौराहा  नेताओ की जागीर है क्या यहाँ सिर्फ नेता बिरादरी के लोग की धरने -प्रदर्शन कर सकते है नेता भी वे जिन्हे भारत की जनता ने चुन कर संसद भेजा है।क्या भारत की 135 करोड़ जनता का संसद भवन से कोई रिश्ता -नाता नहीं है आखिर क्यों ,क्यों भारतीय नेताओ और सिस्टम ने देश की जनता को मात्र गुलाम बना कर रख दिया ,क्यों भारत का आम नागरिक संसद भवन पर प्रदर्शन और धरना नहीं दे सकता। क्यों संसद में बैंठे 543 लोग खुद को भारत की 135 करोड़ जनता का मालिक मान रहे है ,भारत की जनता ने इन नेताओ को इसलिए चुन कर संसद भेजा था की ये लोग उनकी आवाज संसद में उठाएंगे और उनकी सुरक्षा करेंगे लेकिन यहाँ तो सब उल्टा -पुल्टा हो रहा है जिस भारत की 135  करोड़ जनता ने इन्हे नेता बनाया और संसद भेजा उससे ही असुरक्षित महसूस करते है। ऐसा क्यों आखिर न्याय मांगने कहाँ जाए आम जनता ,संसद भवन जाएगी तो दिल्ली पोलिस अधमरा कर देगी जी हाँ ऐसा ही हो रहा है भारत में कल की घटना भारतीय संसद और भारतीय इतिहास के लिए काला दिन माना जाएगा जब एक संसद भवन के पास सड़क पर धरना दे रही निहत्थी छात्रा को दिल्ली पोलिस ने प्रताड़ित किया ,जी हाँ  हैदराबाद की महिला डॉक्‍टर के साथ  गैंगरेप के बाद  दरिंदों ने  पहचान छिपाने के लिए डॉक्‍टर के शव को कई किलोमीटर दूर ले जाकर रंगा रेड्डी जिले के एक पुल पर पेट्रोल छिड़ककर जला दिया। घटना के बाद से पूरे देश में उबाल है। लोग सड़कों पर उतर आए हैं और डॉक्‍टर को न्‍याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में देश की राजधानी दिल्ली मेंअनु दुबे नाम की एक छात्रा पार्ल्यामेंट स्ट्रीट के सामने हैदराबाद की महिला डॉक्‍टर के साथ  गैंगरेप  घटना के विरोध में प्रदर्शन कर रही थी। छात्रा का कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से इस बर्बर घटना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करना चाह रही थीं।अनु ने पोस्टर में लिखा था- “मैं अपने भारत में सुरक्षित महसूस क्यों नहीं कर सकती।” जब मीडिया ने इस लड़की से पूछा कि वह यहां क्यों बैठी हैं? तो छात्रा ने कहा कि सुबह सात बजे से बैठी हूं। निर्भया हो गया, कठुआ हो गया। छोटी बच्चियों का रेप हो रहा है। आज वो लड़की जली है कल मैं भी जल जाऊंगी, लेकिन मैं लड़ूगी। अब डरने का मन नहीं करता, अब मन भर गया है। छात्रा ने आगे कहा कि जवाब सरकार देगी, सांसद देंगे इसलिए सांसदों से मिलने और उनसे सवाल पूछने यहां आई हू।किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है।   एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि उसे प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर जाने के लिए कहा गया लेकिन उसने वहां जाने से मना कर दिया। दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पीआरओ अनिल मित्तल ने बताया, “अनु दुबे को यह बताया गया कि यह प्रतिबंधित क्षेत्र है और यहां पर किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। उसने किसी भी निर्देश को नहीं माना।इसके बाद उसे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन ले जाया गया। दिल्ली महिला आयोग की टीम थाने पहुंची और अनु को रिहा किया गया।अनु  ने आगे रोते हुए कहा, ‘’जो आप मुझसे पूछ रहे हैं, वह मेरे बारे में नहीं है. मैं ये इसलिए कर रही हूं ताकि कल मैं जलकर न मरूं. वो लड़की मर गई, सब लड़की मर गई. हर बीस मिनट में किसी लड़की का रेप होता है. मैं मरना नहीं चाहती. मैं और रेप के मामले नहीं देख सकती. मैं पूरी रात सोई नहीं हूं और ये सिर्फ एक रात की बात नहीं है. .दिल्ली की बेटी अनु दुबे ने विरोध से पहले एक वीडियो बनाया था. इसमें उन्होंने बताया कि वो विरोध करने से पहले बहुत डरी हुई थीं. इसमें उन्होंने कहा कि वो पहली बार किसी के लिए आवाज उठाने जा रही हैं. इसके साथ ही उन्होंने मांग की थी कि उनके परिवार को कुछ नहीं होना चाहिए. बता दें कि हैदराबाद में हुई हैवानियत के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है.

पुलिस पर छात्रा ने लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रा अनु दुबे ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए पुलिस की बदसलूकी का दावा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें धरने पर से उठाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और इस दौरान उन्हें नाखून से चोट भी लगे।अनु दुबे ने बताया, ‘’तीन लेडी कॉन्सटेबल मेरे ऊपर चढ़ी थीं. वो कुछ जानकारी पूछ रहे थे, मैंने कहा मैं बाहर जाकर ही बोलूंगी. मैं मना कर रही थी. इस बात पर उन्होंने मेरे साथ जबरदस्ती की. मुझे नाखून चुभाए और बुरी तरह मारा. उन्होंने मुझसे बैठने के लिए कहा, लेकिन मैं नहीं बैठी.’
दिल्ली पुलिस की बेरहमी देखिये -संजय सिंह
अनु दुबे के समर्थन में आप नेता संजय सिंह सामने आए हैं. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की बेरहमी देखिये ये बच्ची प्रियंका रेड्डी के लिये न्याय की गुहार लगा रही है और दिल्ली पुलिस इस बच्ची को ही नाख़ूनी पंजे मार रही है यही है वो दिल्ली पुलिस जो कल तक मार खाकर रो रही थी.

पुलिस को एक बच्ची से क्या खतरा था?
हैदराबाद गैंगरेप को लेकर राजधानी दिल्ली में संसद भवन के पास धरना दे रही लड़की अनु दुबे को सुबह दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया. पुलिस ने थाने ले जाकर अनु दुबे से करीब चार घंटों तक पूछताछ की. अनु की गिरफ्तारी को लेकर निर्भया की मां ने दिल्ली पुलिस को लताड़ लगाई, उन्होंने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस को एक बच्ची से क्या खतरा था?

घटना पर अफसोस -नफीसा अली
सामाजिक कार्यकर्ता नफीसा अली ने इस घटना पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को प्रदर्शनकारी छात्रा से माफी मांगनी चाहिए।

ये है दिल्ली पुलिस का असली चेहरा-स्वाती मालीवाल
दिल्ली महिला आयोग के चेरयपर्सन स्वाती मालीवाल ने कहा कि वो अुन दुबे की चोटें देखकर हैरान रह गई थी. उन्होंने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि क्या ये है दिल्ली पुलिस का असली चेहरा. उन्हें सभी आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
क्या बेटियों को नहीं जीने का अधिकार-रणदीप सरजेवाला
कांग्रेस नेता रणदीप सरजेवाला ने अनु दुबे के समर्थन में एक कविता ट्वीट करते हुए लिखा, ‘देखो चारों तरफ़….. मन में बस एक ही सवाल: ‘क्या बेटियों को नहीं जीने का अधिकार..’बेग़ैरत शासक, बुज़दिल ज़माना, माँ दुर्गा की धरती पर फिर बेटी है निशाना. जहन्नुम का क्या होगा… अगर दुनिया का ये हाल’

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