दुष्यंत चौटाला का  तुगलकी फरमान,लोक डाउन के दशवें दिन जागे कुंभकरणी नींद से

दुष्यंत चौटाला ने जारी किया एक और तुगलकी फरमान,लोक डाउन के दशवें दिन जागे कुंभकरणी नींद से

बंद पड़ी फैक्ट्रियों के कारण 72 घंटे में श्रमिकों के आंकड़े मिलने नामुमकिन

अटल हिन्द ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला समझदारी भरे फैसले लेने की बजाए लगातार तुगलकी फरमान जारी कर रहे हैं।-उप मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे पहले उन्होंने हजारों करोड़ के धान घोटाले में घोटालेबाजों को चोरी छुपाने के लिए 10 दिन का समय दिया।-बार-बार धान घोटाले की सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई करने की बजाय दुष्यंत चौटाला ने आंखें मूंदने का काम किया जिसके कारण प्रदेश के लाखों किसानों के हकों पर डाका डाला गया।- प्रदेश की ढाई करोड जनता की सुरक्षा को दांव पर रखकर लोक डाउन में शराब के ठेके खुले रखकर शराब की बिक्री जारी रहने दी।-महामारी से मुकाबले के दौरान खुद मियां मिट्ठू बनने के मकसद से सैनिटाइजरों पर अपनी फोटो लगवाई।-लोक डाउन के कारण बंद पड़ी फैक्ट्रियों के श्रमिकों की हालत जानने के लिए श्रम विभाग को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया।

Deputy Chief Minister Dushyant Chautala woke up from sleep of “Kumbhakaran” on eleventh day of Janata curfew and Lok Down
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला जनता कर्फ्यू और लोक डाउन के ग्यारहवें दिन “कुंभकरण” की नींद से जागे और उन्हें अचानक “याद” आया कि प्रदेश के उद्योगों में कार्यरत लाखों मजदूरों की हालत चिंताजनक हो सकती है।उनको यह “दरियादिली” की चिंता उस समय हुई जब प्रदेश के लाखों मजदूर फैक्ट्रियों और घरों को छोड़कर अपने घरों को निकल चुके हैं।दुष्यंत चौटाला अगर जागरूक होते तो लोक डाउन के पहले ही दिन आदेश जारी करके फैक्ट्री मालिकों को श्रमिकों की छुट्टी न करने और उनके खाने-पीने के सामान का पर्याप्त प्रबंध करने के आदेश जारी करते लेकिन लगभग 2 हफ्ते तक ऐसा नहीं किया।

 

 

22 मार्च के जनता कर्फ्यू के बाद 2 अप्रैल तक दुष्यंत चौटाला को प्रदेश के लाखों गरीब मजदूरों की “दुख तकलीफें” बिल्कुल भी “नजर” नहीं आई और अब अचानक उन्होंने विभाग को “तुगलकी” फरमान जारी करते हुए आदेश दे दिया कि 72 घंटे के अंदर प्रदेश के सभी फैक्ट्रियों और उद्योग धंधों में लगे हुए मजदूरों की लिस्ट बनाकर उनकी स्थिति की जानकारी उन तक पहुंचाई जाए।दुष्यंत चौटाला को यह भी नहीं मालूम कि लोकडाउन के चलते प्रदेश की सारी फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं और वहां काम करने वाले लाखों मजदूर या तो घरों में बैठे हैं और या फिर हरियाणा छोड़कर अपने प्रदेशों को वापस लौट चुके हैं।

 

 

फैक्ट्रियां बंद होने के कारण श्रमिकों के बारे में सूचना 72 घंटों में मिलना किसी भी तरह से मुमकिन नहीं है।
इसके अलावा उद्योग व श्रम विभाग के पास इतना स्टाफ नहीं है कि प्रदेश की लाखों छोटी बड़ी फैक्ट्रियों का निरीक्षण कर सके और हर फैक्ट्री में जाकर वहां का निरीक्षण कर सके ।

 

 

 

दुष्यंत चौटाला ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उनकी सोच “दूरगामी” नहीं है बल्कि वह “सांप” निकल जाने के बाद “लकीर” पीटने का काम ही हर बार करते हैं।प्रदेश के उद्योग मंत्री, श्रम मंत्री और रोजगार मंत्री होने के नाते दुष्यंत चौटाला का यह पहला फर्ज बनता था कि कोरोना महामारी के कारण किए गए लोकडाउन से प्रभावित होने वाले प्रदेश के लाखों मजदूरों को ख्याल रखने के लिए पहले ही दिन अधिकारियों और फैक्टरी मालिकों को आदेश जारी करते लेकिन वह ऐसा करने की बजाय कुंभकरण की नींद सो गए और अचानक 11 दिन बाद उन्हें याद आया कि मजदूरों की हालत की जांच पड़ताल होनी चाहिए।

 

 

 

कमाल की बात है कि उन्हें एक बार भी मजदूरों का पलायन गंभीर समस्या नजर नहीं आई। एक तरफ लाखों मजदूरों का पलायन पूरी दुनिया में खलबली मचा रहा था लेकिन दूसरी तरफ दुष्यंत चौटाला आंखें बंद किए हुए चैन की नींद सो रहे थे। चंडीगढ़ में बैठकर जनता कर्फ्यू के दौरान तालियां तो बजाते नजर आए लेकिन अपने प्रदेश के लाखों मजदूरों की मजबूरियां और समस्याएं उन्हें बिल्कुल भी नजर नहीं आई।

 

 

 

दुष्यंत चौटाला को यह भी नहीं पता कि लाखों मजदूरों के हरियाणा छोड़ने के चलते लोक डाउन खत्म होने के बाद भी उद्योग धंधे नहीं चल पाएंगे क्योंकि मजदूरों और कामगारों के चले जाने के कारण फैक्ट्रियां चल नहीं पाएंगी जिसके चलते प्रदेश का आर्थिक विकास का भट्ठा बैठ जाएगा और आर्थिक मोर्चे पर प्रदेश कंगाल हो जाएगा।दुष्यंत चौटाला हर बार सही मौके पर सही फैसला लेने की बजाए बड़ा नुकसान होने के बाद ही दिखावे की कार्रवाई करते हैं जिससे यह साबित होता है कि उनमें दूरगामी सोच का अभाव है और वह सही फैसले लेने की बजाय बार-बार तुगलकी फैसले ले रहे हैं।

 

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