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देवेंद्र बबली का मन खट्टा  टूटने वाला है  उनके सब्र का बांध 

देवेंद्र बबली का मन खट्टा  टूटने वाला है  उनके सब्र का बांध

देवेंद्र बबली भी चले राम कुमार गौतम की राह पर

दुष्यंत चौटाला की कार्यप्रणाली से खट्टा हुआ मन

बेलगाम अफसरशाही के कारण सब्र का बांध टूटने के कगार पर

चंडीगढ़(अटल हिन्द ब्यूरो )

जननायक जनता पार्टी के विधायकों में असंतोष का तूफान लगातार बड़ा होता जा रहा है। नारनौंद के विधायक राम कुमार गौतम

के बाद अब टोहाना के विधायक देवेंद्र बबली भी बार-बार आगबबूला होकर बड़ी नाराजगी का इजहार कर रहे हैं।देवेंद्र बबली को

इस बात का गिला है कि गठबंधन के विधायक होने के बावजूद बेलगाम अफसरशाही उनकी बातों पर ध्यान नहीं देती है और

उनके बताए हुए कामों को गंभीरता से नहीं लेती है।सुभाष बराला के प्रैशर के चलते अफसरशाही देवेंद्र बबली के बताए हुए कामों

को करने में कोताही बरती है जिसके चलते देवेंद्र बबली आर-पार के मुकाम पर पहुंचते हुए नजर आ रहे हैं।परसों चंडीगढ़ में

मुख्यमंत्री से मिलने के लिए रामकुमार गौतम के साथ देवेंद्र बबली भी मौजूद थे। देवेंद्र बबली अपनी अनदेखी को लेकर मुख्यमंत्री

खट्टर और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला दोनों को ही बार-बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन उनकी समस्याओं का निदान अभी तक

नहीं हो पाया है जिसके चलते देवेंद्र बबली का मन खट्टा होता जा रहा है और उनके सब्र का बांध टूटने वाला है।देवेंद्र बबली

उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की कार्यप्रणाली को लेकर भी संतुष्ट नहीं है और उनके बारे में ढेरों गिले शिकवे उनके पास इकट्ठे हो

चुके हैं। वह सरकार में भागीदारी होने के बावजूद जेजेपी विधायकों की अनदेखी का मामला कई बार उठा चुके हैं लेकिन दुष्यंत

चौटाला से उन्हें गोलीबाजी के अलावा कुछ नहीं मिला। इस कारण देवेंद्र बबली का भरोसा दुष्यंत चौटाला से उठता जा रहा है।

गठबंधन सरकार में सारे विभागों पर दुष्यंत चौटाला के कुंडली मार कर बैठने के चलते जेजेपी के अधिकांश विधायकों में असंतोष

बढ़ता जा रहा है।देवेंद्र बबली, राम कुमार गौतम, रामकरण काला, जोगीराम सिहाग को खास तौर पर अपने विधानसभा हलकों में

कामकाज कराने में सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही हैैं। देवेंद्र बबली का कहना है कि जनता उनसे जवाब मांगेगी। अगर वे अपने

हलके की जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं तो पाए तो विधायक के तौर पर वे कसूरवार होंगे। वह अपने हलके के विकास और

लोगों की समस्या दूर करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं लेकिन अफसरशाही से सहयोग नहीं मिलने के चलते वह मनचाही

 

परफॉर्मेंस नहीं दे पा रहे हैं।

देवेंद्र बबली उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां पर लंबे समय तक चुप रहना मुमकिन नहीं है। अगर दुष्यंत चौटाला ने उनकी

शिकायतों पर गौर नहीं किया तो रामकुमार गौतम की तरह देवेंद्र बबली भी सरेआम उनकी पोल पट्टी खोलने को मजबूर हो

जाएंगे।

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