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निजी स्कूलों के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची हरियाणा सरकार,कहीं चुनावी  रणनीति का हिस्सा  तो नहीं है 

निजी स्कूलों के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची हरियाणा सरकार,कहीं चुनावी  रणनीति का हिस्सा  तो नहीं है

चंडीगढ़ (अटल हिन्द ब्यूरो)

कल तक निजी स्कूलों का साथ देने वाली मनोहर सरकार अचानक अभिभावकों की हिमायती बन गई और  निजी स्कूलों द्वारा बच्चों से मासिक फीस, वार्षिक शुल्क व ट्रांसपोर्ट फीस वसूलने के मामले मे प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बता दें कि हाईकोर्ट की एकल बेंच ने स्कूलों द्वारा बच्चों से मासिक फीस वसूलने पर छूट दी थी। लेकिन अब हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट की एकल बेंच के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील दायर की है।प्रदेश सरकार ने एकल बेंच के फैसले का विरोध करते हुए अभिभावकों की पैरवी की है। सोमवार को हाईकोर्ट के जस्टिस आरके जैन व जस्टिस अशोक वर्मा पर आधारित बेंच ने मामले की सुनवाई एक अक्टूबर को निर्धारित की है।सरकार ने हाईकोर्ट को एकल बेंच के फैसले को रद्द करने की मांग की है। सरकार का कहना है कि एकल बेंच ने सरकार के पक्ष को अनदेखा कर अपना फैसला दिया है। एकल बेंच का यह फैसला वास्तविक्ता से बहुत विपरीत है। हाईकोर्ट के जस्टिस रामेंद्र जैन ने 27 जुलाई को निजी स्कूलों द्वारा मासिक फीस के साथ वार्षिक शुल्क, ट्रांसपोर्ट व बिल्डिंग फीस वसूलने की इजाजत दे दी थी।इस फैसले से फीस माफी की आस लगाए लाखों अभिभावकों को बड़ा झटका लगा है। आदेश के तहत लॉकडाउन में चाहे किसी भी स्कूल ने बच्चों को ऑनलाइन क्लासेस की सुविधा न दी हो लेकिन वह स्कूल अभिभावकों से फीस वसूल सकता है। रामेंद्र जैन से यह फैसला पंजाब के एक मामले में जस्टिस निर्मलजीत कौर द्वारा 30 जून को सुनाए गए फैसले के आधार पर हरियाणा के निजी स्कूलों को यह राहत दी थी।लेकिन यहाँ इस बात का उल्लेख करना भी जरुरी हो जाता है की मार्च (लॉकडाउन )से लेकर आज तक अगर हम हरियाणा के मुख्यमंत्री ,मंत्रियों और सरकार में बैठे अन्य लोगों के ब्यान देखे तो ये सभी लोग निजी स्कूल  प्रबन्धकों का साथ देते आये है बच्चों से मासिक फीस, वार्षिक शुल्क व ट्रांसपोर्ट फीस वसूलने के मामले मे  क्योंकि मीडिया में अभिभावक जोर शोर  से इस मामले को उठा चुके है लेकिन हरियाणा के सीएम हमेशा इस मसले पर अपने ब्यान पलटते रहे है कभी उन्होंने अभिभावकों के हितों की बात नहीं की लेकिन अचानक सरकार द्वारा उठाया गया  यह कदम बच्चों से मासिक फीस, वार्षिक शुल्क व ट्रांसपोर्ट फीस वसूलने के मामले मे कोई चुनावी  रणनीति का हिस्सा ही रहा होगा वरना पिछले कई महीनों से अभिभावक सड़कों पर उतरे थे तब तो यह सरकार नहीं जागी।

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