न ख्वाजा साहब की दरगाह में जायरीन और न पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में श्रद्धालु।

कोरोना वायरस का सब पर असर,

न ख्वाजा साहब की दरगाह में जायरीन और न पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में श्रद्धालु।

====अटल हिन्द ब्यूरो ========

अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह और पुष्कर में संसार प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर खोला

गया, तब प्रशासन को उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में जायरीन और श्रद्धालु आएंगे। इसलिए दोनों ही धार्मिक

स्थलों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य के विशेष

इंतजाम भी किए गए। लेकिन प्रशासन की सभी तैयारियाँ धरी रह गई। दोनों ही धार्मिक स्थलों पर उम्मीद के

मुताबिक जायरीन और श्रद्धालु नहीं आए। असल में कोरोना संक्रमण का सब को डर है। भले ही लोगों में धर्म के

प्रति गहरी आस्था हो, लेकिन कोई भी व्यक्ति कोरोना की चपेट में आकर नहीं मरना चाहता है। इन दोनों

धार्मिक स्थलों पर गत 20 मार्च से लोगों का प्रवेश बंद हो गया था। दरगाह क्षेत्र के थानाधिकारी रमेन्द्र सिंह हाड़ा

ने बताया कि दरगाह के आसपास की अधिकांश होटले खाली पड़ी हैं तथा बाजार भी सुने हैं। पुलिस को उम्मीद

के मुताबिक जायरीन नहीं आए हैं, वहीं खादिमो की प्रतिनिधि संस्था अंजुमन सैय्यद जादगान के सचिव सैय्यद

वाहिद हुसैन अंगाराशाह ने कहा कि देशभर से जायरीन जियारत के लिए अजमेर आना चाहता है, लेकिन ट्रेन

बस आदि के साधन नहीं है। सरकार ने अभी तक ट्रेनों का संचालन पूरी तरह शुरू नहीं किया है। उन्होंने माना

कि कोरोना संक्रमण का असर भी पड़ा है, लेकिन यदि यातायात के साधन सुचारू हो तो जायरीन की आवक

 

बढ़ जाएगी। सामान्य दिनों में रोजाना दस हजार जायरीन आते थे, लेकिन कोरेाना काल में एक दो हजार

जायरीन ही आ रहे हैं। अंगारा शाह ने कहा कि प्रशासन ने मजार शरीफ पर फूल और चादर चढ़ाने पर रोक

लगा रखी है। इस रोक को हटवाने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा गया है।

पुष्कर में श्रद्धालु भी नहीं:

संसार प्रसद्धि ब्रह्मा मंदिर के पुजारी कृष्ण गोपाल वशिष्ठ ने बताया कि सामान्य दिनों में जो ब्रह्मा मंदिर

श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहता था, उस मंदिर में अब श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम है। मुश्किल से दो हजार

श्रद्धालु ही रोजाना आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश आसपास के क्षेत्रों के ही है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की

आवक बहुत कम है। श्रद्धालुओं के नहीं आने से पुष्कर का होटल व्यवसाय भी ठप पड़ा है। लेकिन ट्रेनों के चलने

पर श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ जाएगी।

जागरुकता का असर:

जायरीन और श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं होने के पीछे जागरुकता का असर भी है। सरकार और अन्य स्वयं सेवी

संगठनों ने कोरोना वायरस को लेकर जागरुकता का जो अभियान चलाया उसका असर भी देखा गया है।

लेकिन अब बेवजह अपने घरों से नहीं निकल रहे हैं। यह माना कि जीवन में धर्म जरूरी है, लेकिन लोगों ने

जागरुकता के चलते अपने स्वास्थ्य का पहले ख्याल रखा है। यह बात अलग है कि जायरीन और श्रद्धालुओं के

नहीं आने से अजमेर को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, लेकिन लोगों ने अपने स्वास्थ्य को पहली प्राथमिकता

दी है। अजमेर में भी कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। रोजाना डेढ़ सौ लोग संक्रमित हो रहे हैं। मृत्युदर

भी बढ़ रही है। अब प्रतिदिन औसतन चार पांच कोरोना संक्रमित की मौत हो रही है।

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