पद्म भूषण दर्शन लाल जैन का 94 वर्ष की उम्र में निधन,

सरस्वती शोध संस्थान के अध्यक्ष पद्म भूषण
दर्शन लाल जैन का 94 वर्ष की उम्र में निधन
संस्कार पर सीएम,प्रदेशाध्यक्ष धनखड़,सांसद
व केंद्रीय राज्यमंत्री रतन लाल कटारिया सहित
अन्य कई मंत्री व नेता पहुंचे
yamunanagar। 08 फरवरी 2021।(ATAL HIND)
पद्म भूषण से सम्मानित व सरस्वती शोध संस्थान के अध्यक्ष दर्शन लाल जैन का 94 वर्ष की आयु में यमुनानगर में निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार शाम पांच बजे होगा। संस्कार पर सीएम मनोहर लाल, प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़, सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री रतन लाल कटारिया सहित अन्य कई मंत्री व नेता पहुंचे। उनके निधन की सूचना से शहर में शोक की लहर दौड़ पड़ी। शिक्षामंत्री कंवर पाल, जिलाध्यक्ष राजेश सपरा सहित अन्य बड़े नेता शोक जताने के लिए उनके निवास स्थान पर पहुंचे। बता दें कि सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने में स्व. दर्शन लाल जैन का बड़ा योगदान रहा है। इसके लिए उन्होंने काफी लंबे समय तक संघर्ष किया। उनके प्रयासों से 21 अप्रैल 2014 को रूलाखेड़ी गांव में सरस्वती नदी की पहला धारा बही। जैन ने शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दिया। कई स्कूल खुलाए।
Padma Bhushan, President of Saraswati Research Institute
Darshan Lal Jain died at the age of 94
CM, State President Dhankar, MP on Sanskar
And Union Minister of State Ratan Lal Kataria
Many other ministers and leaders arrived
इतिहास के प्रति युवाओं में रुचि बढ़े इसके लिए पाठ्य पुस्तकें तैयार कराई। स्कूल खोलने का उद्देश्य था कि बच्चे शिक्षित हो सकें। इस सोच के साथ स्कूल खोलने में भूमिका निभाई। संघ की विचारधारा से प्रभावित होकर वर्ष 1944 में संघ में आए। यहां आज भी देशभक्ति की भावना है। इसमें शामिल होने के लिए किसी पत्र की जरूरत नहीं होती है। वहां जाने की जरूरतभर है। सम्मान के साथ शामिल किया जाता है। यहां अनुशासन की शिक्षा दी जाती है। इनके संपर्क में आने वाले व्यक्ति के अंदर खुद-ब-खुद देशभक्ति की भावना घर कर जाती है। उन्होने कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई है। 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लगी थी। उनको भी जेल यात्रा करनी पड़ी। हालांकि उसमें उनका कोई दोष नहीं था। उनको कोर्ट में बताया गया कि साइकिल से चलते वक्त राहगीर को टक्कर मार दी। जब उसने विरोध किया तो उनके साथ अभद्रता की। इस आरोप में उनको एक साल जेल में रहना पड़ा। इससे अगले वर्ष फरवरी माह में उनकी बेटी की शादी थी। तब एक सप्ताह की पैरोल पर घर आए थे। इमरजेंसी लगी होने के कारण संघ के सदस्य जेल में थे। जो बाहर थे,वे डर के कारण घर नहीं आए थे। इस पर बरात का स्वागत भी शुगल मिल के मालिक डीडी पुरी ने अपने साथियों के साथ किया था। वो दिन वे कभी भुला नहीं सकते।
समाज सेवा की रहे मिसाल
दर्शन लाल जैन का जन्म 12 दिसंबर 1927 को जगाधरी में एक धार्मिक और उद्योगपति जैन परिवार में हुआ था। उन्हें बाबूजी के नाम से जाना जाता था। बड़े होने के साथ,वह देशभक्ति की भावना के कारण आरएसएस के संपर्क में आए। 15 साल की उम्र में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। जैन कई सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए थे। वर्ष 2019 में भारत सरकार की ओर से उन्हें समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
दर्शन लाल के प्रयासों से जीवित हुई सरस्वती नदी
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रांत संघ चालक दर्शन लाल जैन (जगाधरी) के प्रयासों से सरस्वती नदी पुनर्जीवित हुई थी। उन्होंने सरस्वती की धारा को धरा पर लाने में अहम भूमिका निभाई। सरस्वती को पुनर्जीवित करने के लिए दर्शन लाल जैन ने दो दशक तक संघर्ष किया। उनके प्रयासों से ही 21 अप्रैल 2014 को रूलाखेड़ी गांव में सरस्वती नदी की पहला धारा बही। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में उनके कार्यों को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राजेश गोयल ने बताया कि दर्शनलाल जैन वैसे तो सरस्वती पर 40 वर्षों से काम करते रहे हैं,लेकिन 1999 में उन्होंने सरस्वती शोध संस्थान की आधारशिला रख सरस्वती की धारा को धरती पर लाना जीवन का लक्ष्य बना लिया। ये उनकी ही मेहनत और विचारधारा का नतीजा है कि सरस्वती की खोदाई शुरू हुई और नदी को धरती पर लाया गया।नदी के पुनरुत्थान संबंधी परियोजना को शुरू करने में दक्षिण भारत के विद्वान रतनाकर ने गहरी दिलचस्पी दिखाई थी। कुछ लोगों ने इसे पौराणिक कल्पना माना, परंतु डॉ. रतनाकर और बाद में दर्शनलाल जैन के प्रयास और वैज्ञानिक शोध से यह सिद्ध हो गया कि सरस्वती धरती के नीचे बह रही है। उस समय अज्ञात कारणों से परियोजना को शुरू नहीं किया जा सका। बाद में दर्शनलाल ने नदी को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया।
दर्शनलाल जी ने कभी नहीं माना कि सरस्वती विलुप्त है। कुछ जगह इसका पानी भले ही न दिखाई देता हो, लेकिन मुस्तफाबाद क्षेत्र में तो स्पष्ट देखने को मिलता है। सरस्वती पुनरुत्थान की जो परियोजना शुरू की गई है उसमें सभी का सहयोग मिला। दृढ़ निश्चय के साथ वह अपने कार्य में जुटे रहे और उन्होंने कभी हार नहीं मानी और एक दिन उनके प्रयास रंग लाये इसके अलावा श्री जैन के समाजिक कार्यो को भुलाया नहीं जा सकता ।
छोड़ गए भरा-पूरा परिवार
स्वय दर्शन लाल जैन अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए। उनके परिवार में दो बेटे दीपक जैन और नीरज जैन, दो बेटियां गीता जैन व नीरा जैन, चार पोतियां नेहा, नुपुर, सुरभि, द्रव्या, दो पोते मार्धव व रियंत जैन हैं।
शहीद स्मारक बनाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी
पानीपत में शहीद स्मारक बनाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। इनके प्रयास से ये कार्य सफल हो पाया। ये उनकी जीत थी।

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