बंद कमरे की चर्चा का फैला रायता !,मामला पटौदी के एसडीएम आफिस से जुड़ा है

कुछ समय बाद ही बंद कमरे की चर्चा का फैला रायता !

एसडीएम पटौदी आफिस की विश्वसनीयता पर सवाल

स्ंवेदनशील मुद्दे पर बंद कमरें में चार लोगों में चर्चा

 

After some time Raita spread of the discussion of the closed room!

Questions on the credibility of SDM Pataudi office

Four people discussed in closed rooms on sensitive issue

 

 

फतह सिंह उजाला
पटौदी। दिवारों के भी कान होते हैं, यह कहावत ही नहीं अब हकीकत बन कर सामने आने लगी है। यह कैसे और किस प्रकार से संभव है कि बंद कमरें में किसी संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा हो और कुछ ही समय के बाद में इस चर्चा का रायता ही फैल जाए। यह पढ़ने में बेसक अटपटा और विश्वास करने लायक नहीं लगे, लेकिन सोलह आने सही बात है। मामला पटौदी के एसडीएम आफिस से जुड़ा है। जब संवेदनशील मुद्दे की चर्चा भी कमरें में मौजूद चार लोगों के बीच नहीं ठहर सकी तो, सवाल और भी बड़ा हो जाता है कि ऐसी चर्चा बंद कमरे की चर्चा का रायता फैलने से एसडीएम आफिस की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठना लाजिमी है ?

 

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पटौदी एसडीएम के बंद आफिस में चर्चा के दौरान स्वयं एसडीएम, एक पुलिस अधिकारी , एक राजस्व अधिकारी और समाज का एक अन्य समाज में प्रतिष्ठित माने जाना शख्स मौैजूद था। इनके अलावा चर्चा के दौरान एसडीएम के कमरे में अन्य कोई भी मौजूद नहीं था। कमरे में सबसे पहले स्वयं एसडीएम ही अपनी सीट पर बैठे मिले, इसके बाद में समाज से जुड़ा, जिसे कि शासन-प्रशाासन से भी जुड़ा शख्स कहा जाता है उसने प्रवेश किया। इसके बाद में एसडीएम ने फोन करके पुलिस अधिकारी को बुलाया और कुछ ही पल के बाद में राजस्व विभाग के अधिकारी के प्रवेश के साथ कमरे का गेट बंद करा दिया गया।

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इसके बाद में कमरे में मौजूद लोगों के बीच में किसी सवंेदनशील मुद्दे को लेकर चर्चा के साथ में चिंतन और मंथन हुआ। आपस में सवाल और जवाब भी हुए। नसीहत के पाठ भी पढ़े और बताये गए। चर्चा में कहा गया कि, संबंधित मसले का अपने स्तर पर समाधान कर लिया जाएगा। यह चर्चा बंद कमरे में हुई और वहीं पर तीन सरकारी अधिकारी मौजूद रहे तथा चैथा शख्स रवाना हो गया।

 

 

 

सबसे बड़ी विचारनीय गंभीर हैरानी और परेशानी उस समय हुई, जब इस संवेदनशील मुद्दे पर बंद कमरे की चर्चा में हुई बातों का करीब तीन किलो मीटर की दूरी के कस्बे में रायता फैल गया ? लोगों में कई प्रकार की अटकले लगाई गईं साथ ही अफवाहें भी गरम हो गई। बंद कमरे की बातों का तीन किलो मीटर दूर रायता फैलने की जानकारी मिलते ही एसडीएम को मैसेज भेजा कर सारे घटनाक्रम से अवगत करा दिया, साथ ही बैठक में हाजमा खराब व्यक्ति की पहचान के लिए कहा गया। लेकिन प्रति उत्तर में कोई जवाब नहीं मिल पाया। अब सवाल यही है कि ऐसी कितनी विश्वसीन और गुप्त बैठक कार्यवाही की रणनीति के लिए होती होंगी, ऐसे में क्या गांरटी बाकी बचती है कि बंद कमरे की बाते बाहर नहीं आ रही होगी ?

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