बाहुबली नहीं जनबली है ये विधायक

बाहुबली नहीं जनबली है ये विधायक …………….

विपुल पाण्डेय कि कलम सें …….

कहते है सियासत में सिर्फ नेता अपनी और अपनों की सुनते है लेकिन आज हम जिस नेता की बात करने जा रहे है वो किसी परिचय के मोहताज नहीं है उन्हें न सिर्फ हम और आप जानते है बल्कि उनके नाम से कभी उत्तर प्रदेश के सीएम भी चकरा गए थे ,जिसे कभी लोग माफिया डॉन तो कभी बाहुबली कहते थे  हम बात कर रहे है उत्तर प्रदेश के कालीन नगरी में स्तिथि ज्ञानपुर विधानसभा से लगातार चार बार विधायक विजय मिश्रा की जिन्हे लोग आज जनबली कहते है

सियासत में कदम ……………

विधायक विजय मिश्रा ने राजनीति शुरुआत तक़रीबन  “1980 के आस-पास की आपको बता दे की विधायक भदोही में काम के सिलसिले में आये थे और धीरे धीरे काम शुरू किया.उन्होंने शुरूआती दिनों में एक पेट्रोल पम्प का शुभारम्भ किया उसके बाद उनके कुछ ट्रक चलने लगे. कई बार व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी आकर उन्हें धमाका देते थे . तब उनके परिचित पंडित कमलापति  ने उन्हें सलाह दी और कहा की चुनाव लड़ो.इतना ही नहीं उन्होंने टिकट भी दिलवाया और 1990 में विजय मिश्रा ब्लॉक प्रमुख हो गए. उस वक़्त तक राजीव गाँधी से उनके बहुत अच्छे सम्बंध थे. उनके जाने के बाद कांग्रेस से नाता टूट गया. तभी वो मुलायम सिंह यादव  के सम्पर्क में आए.फिर उन्हें सपा से टिकट मिला और वो  ज़िला पंचायत बने विजय मिश्रा का कहना है कि 2001 में उन्हें विधायक का टिकट इस शर्त पर मिला कि वे ज्ञानपुर के साथ-साथ हंडिया, भदोही और मिर्ज़ापुर के सपा उम्मीदवारों को जिताएंगे और साथ ही भदोही लोकसभा सीट भी जितवाएंगे. सभी सीटों पर सपा जीत भी गई.

चर्चा में विधायक ………..

2012 के चुनाव से पहले जब वह आए तो उन्होंने एकदम साधु की वेशभूषा बना रखी थी. लंबी दाढ़ी, लंबे बाल. इसी तरह जेल में रहते हुए सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गए.” .और चर्चा में आये

आपको बता दे 2014 में सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने वाली उनकी बेटी सीमा का है. बिल्कुल ग़ैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाली सीमा को अचानक उतारा गया और मोदी लहर में भी दो लाख से ऊपर वोट बटोर कर वह भदोही से तीसरे नंबर पर रहीं जानकारी के  लिए आपको बता दे की  विजय मिश्रा का सत्ता का विरोध करने का एक लंबा इतिहास रहा है. फिर वो चाहे  मायावती से लंबी लड़ाई हो या सपा से विरोध. 2017 के राज्य चुनाव में अपनी बाहुबली विरोधी छवि पुख़्ता करने के लिए अखिलेश ने इनसे और मुख़्तार अंसारी दोनों से बराबर दूरी बनाते हुए यह संदेश दिया की अगर विजय का टिकट काटा है तो मुख़्तार को भी गले नहीं लगाया”.मिश्रा का राजनीतिक असर इतना था कि 2017 में बसपा, सपा और भाजपा सबसे लड़कर मोदी लहर में उन्होंने 20 हज़ार वोटों से ज्ञानपुर की सीट पर जीत दर्ज की. थी

आपराधिक रिकार्ड …………

 विजय मिश्रा पर एक वक़्त में 60 से ज़्यादा आपराधिक मुक़दमे थे. 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जो शपथ पत्र दाख़िल किया था उसके मुताबिक़ उन पर 16 आपराधिक मुक़दमे थे. इनमें हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक साज़िश रचने जैसे गम्भीर आरोपों वाले मुक़दमे भी शामिल हैंविजय मिश्रा के ऊपर लगे जुलाई 2010 में बसपा सरकार में नंद कुमार नंदी पर हुआ जानलेवा हमला सबसे प्रमुख रहा है. 12 जुलाई 2010 को इलाहाबाद में नंदी की हत्या के इरादे के किए गए एक बम विस्फोट में उनके एक सुरक्षाकर्मी और इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर विजय प्रताप सिंह सहित दो लोग मारे गए थे. नंदी इस हमले में घायल तो हुए लेकिन उनकी जान बच गई.बाद में इस मामले में विजय मिश्रा नामजद रहे. फिर 2012 के चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया.विजय मिश्रा का कहते  है कि यह सारे मुक़दमे झूठे हैं.वे कहते हैं, “2009 फ़रवरी में भदोही में उपचुनाव होने थे, मैंने मायावती की मदद करने से इनकार किया तो वो नाराज़ हो गईं. मुझे पकड़ने के लिए पुलिस भेज दी. उसी वक़्त नेता जी भदोही में सभा कर रहे थे. हमने स्टेज से जनता को अपनी पत्नी रामलली के सिंदूर का वास्ता देते हुए कहा कि अब रामलली का सुहाग उन्हीं के हाथों में है. नेताजी ने कहा कि जिसकी हिम्मत हो पकड़कर दिखा दे हमें. और फिर वो हमें हेलिकॉप्टर में लेकर उड़ गए. बस इसी के बाद मायावती जी ने हम पर ये सब झूठे मुक़दमे डलवा दिए”.

कहते हैं गरीबों का मसीहा……

ज्ञानपुर से लगातार चौथी बार विधायक बने विजय मिश्रा दबे कुचले शोषित और गरीबों में खासे लोकप्रिय हैं। उनका कहना है आपने हमे अपना समझ कर अगर भरोसा जताया है तो उस उम्मीदों पर हम खरे जरूर उतरेंगे लोग क्या कहते है क्या सोचते है ये मै नहीं मानता जो हमसे मिलते है हमारे तक कोई समस्या आती है तो उसका निस्तारण भी जरूर होता है आपको बता दे की हमेशा लोगों की मदद और सेवा में खड़े रहते हैं हाल ही में  आयी एक खबर ने काफी सुर्खिया बटोरी जिसमे विधायक ने एक गरीब के घर जाकर उसके सपनो को पूरा किया था दरसल उनके विधानसभा के सागरपुर बवई गांव निवासी दलित लालमणि पेयजल समस्या से जूझ रहा था। इसकी जानकारी विधायक विजय मिश्रा को हुई तो उन्होने उसके घर 24 घंटे के अंदर हैंडपंप लगवा कर लोगों का दिल जीत लिया। हालांकि हैंडपंप लगने के बाद भी लालमणि उसका पानी नहीं पी रहा था। उसकी जिद भरी

थी कि जब तक विधायक स्वयं हैंडपंप चलाकर उद्घाटन नहीं करेंगे तब तक वह पानी नहीं पिएगा। इस प्रतिज्ञा के साथ वह 15 दिनों से पेयजल समस्या से जूझते हुए भी हैंडपंप का पानी नहीं पी रहा था।बड़ी बात यह है कि विजय मिश्रा ने चार बार से विधायक रहते हुए कभी हैंडपंप का उद्घाटन नहीं किया था, लेकिन जब यह लालमणि की यह बात उन तक पहुंची तो वह राजितराम यादव और पूर्व प्रमुख डीघ बैजनाथ सरोज के साथ उसके घर पहुंचे और हैंडपंप चलाकर उद्घाटन किया। इसके बाद लालमनि ने हैंडपंप का पानी ग्रहण किया। इस बात की चर्चा समूचे क्षेत्र में बनी हुई थी ।

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