भाई दूज का शुभ मुहूर्त भाई दूज तिथि का प्रारंभ: 29 अक्‍टूबर 2019 को सुबह 06 बजकर 13 मिनट से

29 अक्तूबर, मंगलवार , दोपहर 1.11 से लेकर 3.23 तक मनाएं भैया दूज

मदन गुप्ता सपाटू,ज्योतिर्विद्,

हमारे देश में पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों को अत्यंत महत्वपूर्ण एवं स्थाई माना गया है। इसीलिए हमारे हर त्योहार -पर्व रोजाना कोई न कोई संदेश लेकर आते हैं। जहां होली व दिवाली समाज को बांधते हैं वहीं रक्षा बन्धन और भाई दूज परिवारों को एक सूत्र में बांधे रखते हैं।

भाई दूज का शुभ मुहूर्त

भाई दूज तिथि का प्रारंभ: 29 अक्‍टूबर 2019 को सुबह 06 बजकर 13 मिनट से

भाई दूज तिथि का समापन: 30 अक्‍टूबर 2019 को सुबह 03 बजकर 48 मिनट तक

भाई दूज का शुभ मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 11 मिनट से दोपहर 03 बजकर 23 मिनट तक

कुल अवधि: 02 घंटे 12 मिनट

आधुनिक युग में भाई – बहन एक दूसरे की पूर्ण सुरक्षा का भी ख्याल रखें । नारी सम्मान हो। समाज में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों में कमी आएगी। भाई-बहन को स्नेह, प्रेम ,कर्तव्य एवं दायित्व में बांधने वाला राखी का पर्व जब भाई का मुंह मीठा करा के और कलाई पर धागा बांध कर मनाया जाता है तो रिश्तों की खुशबू सदा के लिए बनी रहती है और संबंधों की डोर में मिठास का एहसास आजीवन परिलक्षित होता रहता है। फिर इन संबंधों को ताजा करने का अवसर आता है भईया दूज पर । राखी पर बहन ,भाई के घर राखी बांधने जाती है और भैया दूज पर भाई ,बहन के घर तिलक करवाने जाता है। ये दोनों त्योहार ,भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं जो आधुनिक युग में और भी महत्वपूर्ण एवं आवश्यक हो गए हैं जब भाई और बहन, पैतृक संपत्ति जैसे विवादों या अन्य कारणों से अदालत के चककर काटते नजर आते हैं।

दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल द्वितिया को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है. इस तिथि से यमराज और द्वितिया तिथि का सम्बन्ध होने के कारण इसको यमद्वितिया भी कहा जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक करती हैं. उसका स्वागत सत्कार करती हैं और उनके लम्बी आयु की कामना करती हैं. माना जाता है कि जो भाई इस दिन बहन के घर पर जाकर भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है, उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती. भइया दूज के दिन ही यमराज के सचिव चित्रगुप्त जी की भी पूजा होती है. इस बार भइया दूज का पर्व 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा.

कैसे मनाएं भाई दूज का त्योहार?

आज के दिन भाई प्रातःकाल चन्द्रमा का दर्शन करें. इसके बाद यमुना के जल से स्नान करें या ताजे जल से स्नान करें. अपनी बहन के घर जाएं और वहां बहन के हाथों से बना हुआ भोजन ग्रहण करें. बहनें भाई को भोजन कराएँ , उनका तिलक करके आरती करें. भाई यथाशक्ति अपनी बहन को उपहार दें.

कैसे बनाएं किस्मत चमकाने वाला तिलक?

– शुद्ध केसर की कम से कम 27 पत्तियां लें और उसमें शुद्ध लाल चंदन और गंगाजल मिलाएं

– साफ चांदी की कटोरी या पीतल की कटोरी में यह तिलक तैयार करें

– अपने भाई को तिलक करने से पहले यह कटोरी भगवान विष्णु के श्री चरणों में रखें

– ॐ नमो नारायणाय मंत्र का 27 बार जाप करें. अब यह तिलक सबसे पहले भगवान गणपति और विष्णु जी को करें

– उसके बाद यह तिलक अपने भाई को उत्तर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके तिलक करें

– अब बहन अपने भाई को मिष्ठान खिलाए तथा भाई भी अपनी बहन का मुंह मीठा करें

– ऐसा करने से भाई-बहन का स्नेह हमेशा के लिए बना रहेगा.

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