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भाजपा और जजपा के कुछ विधायक सरकार से कर सकते हे बगावत ?

हरियाणा में लग सकता है राष्ट्रपति शासन अगर जल्दी आंदोलन खत्म नहीं हुआ तो भाजपा और जजपा के कुछ विधायक सरकार से कर सकते हे बगावत ?

निर्दलियों पर भी है जनदबाव वो भी ले सकते हैं सरकार से वापिस समर्थन ?

भाजपा के संपर्क में जो कांग्रेस के विधायक थे जिनको भाजपा का संकटमोचक माना जा रहा था वो भी भारी जनदबाव की वजह से मुकरे ?

आलाकमान ने बनाई योजना अगर सरकार संकट में आती है तो लगाएगें राष्ट्रपति शासन ?

भाजपा नेताओं को आलाकमान ने किसान आंदोलन ना खत्म करवाने के कारण लगाई डांट इसलिए कैप्टन अभिमन्यु और बराला का घटा केंद्रीय नेतृत्व में कद ?

मंत्री पद की आश लगाए बैठे जजपा के विधायकों के अरमानों पर फिर सकता है पानी ?

हरियाणा में लग सकता है राष्ट्रपति शासन ?

===कुलदीप खंडेलवाल====

 

==narwana==
किसानों का आंदोलन के चलते पंजाब में अकाली दल ने भाजपा से अपना समर्थन ले लिया है अब हरियाणा में भी किसान आंदोलन के चलते विधायकों पर दबाव है की वो किसानों के साथ खड़ा हो जाए सबसे ज्यादा दबाव अपने आप को किसानों का रहनुमा कहने वाला दुष्यंत चौटाला पर दबाव है की वो सरकार से समर्थन वापिस ले और किसानों के साथ खड़ा हो। भाजपा की सरकार दो बैसाखियों के सहारे बनी एक बैसाखी जजपा के रूप में मिली तो दुसरी निर्दलियों की मिली एक तरफ निर्दलियों में बलराज कुंडू विधायक ने भाजपा की भ्रष्टाचार की पोल खोलकर समर्थन लेकर नींद हराम कर दी थी दुसरी बैसाखी जजपा की है बेशक जजपा को अहम मंत्रालय दे दिये गये हो पर जजपा के विधायक असंतुष्ट चल रहे हैं।

 

रामकुमार गौतम और देवेंद्र बबली ने खुले तौर पर दुष्यंत को खरी खरी सुना दी है और बबली ने तो मंत्री पद को लेकर कह भी दिया था। भाजपा के विधायक ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया की सरकार भाजपा की फिर भी हमारे साथ भेदभाव हो रहा है खट्टर साहब जजपा वाले विधायकों को खुश रखने के लिए उनकी मान रहे हैं और हमारी बात को इग्नोर कर रहे हैं ? तबादला की बात हो या मनपसंद अधिकारी लाने के साथ ग्रांट की पहल उनकी होती है हम तो बस वैसे ही दबे बैठे हैं।

 

सरकार चलने में कुछ नहीं चल रही है। रस्साकसी चल रही है। हम कुछ बोल नहीं सकते थे पर अब हमारे पास मौका है यदि अब हम अगर सरकार से बगावत करेंगे तो किसान, मजदूर और व्यापारी का गुस्सा होने से बच जाएगें और आगे वोट भी मिल जाएंगे। जल्दी हम राजनीति गर्म करने वाले हैं। इतना बताने के बाद कहा बाकी आप अपने स्तर पर पत्ता करो जब इस बारे में हमने जानकारी जुटाने की कोशिश की तो सूत्रों के हवाले से खबर मिली की जो कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेता विधायक बने हैं उनके साथ कुछ और विधायक किसानों का कृषि बिल की आड़ में बगावत कर सकते हैं।

 

ऐसे में हरियाणा की सियासत में अब नया मोड़ आने वाला है। भाजपा के 5 और कांग्रेस का एक पूर्व विधायक मिलकर अलग ही रणनीति बना रहे हैं। उन्होंने बगावत की तैयारी कर ली है। सभी अंदरखाने योजना बनाने में लगे हैं। बुधवार को भाजपा समर्थित पांच पूर्व विधायकों समेत छह नेताओं ने मंथन किया है। जिसमें कहा गया है कि सभी पार्टियों में उपेक्षित पूर्व विधायकों को जोड़ा जाएगा और जल्द ही हरियाणा के मध्य में दूसरी मीटिंग बुलाई जाएगी। ऐसा ही एक ब्यान पूर्व विधायक रामपाल माजरा ने दिया है और कहा है कि जो विधायक सरकार में बगावत करने वाले हैं उनमे ज्यादा इनेलो की पृष्ठभूमि से है।

 

ये विधायक कृृृषि बिल का फायदा उठाकर बगावत करेंगे। भाजपा जो कांग्रेस के विधायकों को संपर्क में होने की बात कहती थी जिसे अपना संकटमोचक मानती थी अब वो भी जनदबाव के कारण भाजपा से दुरी बना ली है। इसके इलावा बात करें निर्दलिय विधायकों की तो उन पर जनदबाव के चलते समर्थन वापिस ले सकते हैं। इस बात को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर चिंतित हैं। पर भाजपा भी हार मानने वाली कहां है वो भी अपना दांव चलेगी।

 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा कश्मीर की तरह हरियाणा में राष्ट्रपति शासन लगा सकती है ? फिर जो सरकार का संतुलन खराब है उसे भाजपा समय पर ठीक कर लेगी ? वैसे हरियाणा के नेताओं की जिम्मेवारी लगाई गई थी की वो किसान आंदोलन को दबाए जिसमें वो सफल नहीं हुए तभी उनको केंद्रीय नेतृत्व में शामिल नहीं किया गया है।

 

सुभाष बराला, कैप्टन अभिमन्यु और बिरेंद्र सिंह ताकतें रह गये ऐसी सूत्रों ने जानकारी दी है। महाराष्ट्र में सत्ता को लेकर जब संघर्ष चल रहा था तब, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। विधानसभा चुनावों में बीजेपी-शिवसेना महायुति को बहुमत मिलने के बाद भी सरकार गठन में उनकी आपस में ठन गई थी और दोनों ही दलों के रास्ते अलग हो गए थे तब इसके बाद राज्य में किसी भी दल के पास बहुमत न होने की वजह से मतगणना (24 अक्टूबर) के बाद से अब तक राज्य में सरकार गठन नहीं हो पाया था। ऐसे ही भाजपा हरियाणा में कर सकती है।

किसान और मजदूरों ने गांवों के बाहर भाजपा और जजपा की नो एंट्री के बोर्ड लगाए और दी चेतावनी अंदर आने पर अंजाम होगा बुरा ?

3 कृषि अध्यादेश सरकार के गले की फांस बनते जा रहे हैं और अब तो हरियाणा की गठबंधन सरकार के खिलाफ किसानों का गुस्सा चरम पर है। आलम तो ये है कि अंबाला के एक गांव में किसानों ने भाजपा जजपा के बहिष्कार करने के पोस्टर लगा दिए हैं। इन पोस्टरों पर किसानों ने स्पष्ट लिखा है कि जो किसान के समर्थन में खड़ा होगा, उसे ही गांव में दाखिल होने दिया जायेगा।

 

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक किसान की मांग पूरी नहीं की जाती तब तक गांव में किसी भी भाजपा या जजपा नेता को आने नहीं दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी मांग मान ले तो सभी का स्वागत किया जाएगा। तो कुल मिलाकर बात ये है कि भाजपा भले ही 3 कृषि अध्यादेशों से किसान के मुनाफे का ढिंढोरा पीट ले।

 

लेकिन हरियाणा का किसान इसे काला कानून बताकर मानने को तैयार ही नहीं है। गांव के बाहर एक चेतावनी भरा बोर्ड लगाया है, जिस पर लिखा है कि बीजेपी वालों का इस गांव में आना सख्त मना है। गांव में इस बोर्ड के लगने से स्थानीय भाजपा के साथ ही पुलिस प्रशासनिक खेमे में भी हड़कंप मच गया है। पहला नमूना किसानों ने बरोदा में जेपी दलाल को काले झंडे दिखाकर विरोध करके भगा दिया था।

 

इसी कड़ी में डबवाली के गांव देसूजोधा में गुरूवार को सैंकड़ों किसान हाथों में काले झंडे लेकर जननायक जनता पार्टी के नेता दिग्विजय चौटाला के इंतजार में धरने पर बैठे रहे। धरनारत किसानों ने ऐलान करते हुए कहा कि कृषि अध्यादेशों के विरोध में जेजेपी नेता दिग्विजय चौटाला के अलावा किसी अन्य नेता को भी गांव में किसान नहीं घुसने देंगे। ऐसे में देखना दिलचस्प रहेगा की क्या राष्ट्रपति शासन लगना किसान आंदोलन की कामयाबी होगी यह तो आने वाला समय बताएगा।

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