AtalHind
राजनीति

भाजपा और भाजपा सरकार ने दलित वर्ग के हक हकूक पर डाला डाका – पर्ल चौधरी 

भाजपा और भाजपा सरकार ने दलित वर्ग के हक हकूक पर डाला डाका – पर्ल चौधरी

मानेसर  निगम में दलितों का आरक्षण 20 से घटा 15 प्रतिशत, चार नहीं तीन सीट

पीएम मोदी ने भी दूसरी पारी आरंभ करने पर ली थी संविधान की शपथ

बड़ा सवाल क्या भाजपा के दलित प्रतिनिधि अपने समाज के हित में उठाएंगे मांग

जब तक जनगणना नहीं होती,  भाजपा द्वारा दलित वर्ग की आवाज का दबाने का कुप्रयास

ATAL HIND/फतह सिंह उजाला

गुरुग्राम 11 दिसंबर । हाल ही में पूरे देश में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का 67 वां महापरिनिर्वाण दिवस मनाया गया। सभी ने बाबा साहेब के बनाए संविधान का पालन करने की शपथ भी ली । इतना ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी कि केंद्र में दूसरी सरकार का नेतृत्व करने वाले पीएम मोदी ने भी संविधान की पुस्तक के समक्ष नतमस्तक होकर संविधान को नमन किया । इसी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी जिसकी हरियाणा में भी सरकार है, हरियाणा सरकार ने मानेसर नगर निगम में दलितों के आरक्षण को 20 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया है । इस संदर्भ में समय-समय पर अनुसूचित वर्ग के लोगों ने अपनी चिंता को सरकार के विभिन्न प्लेटफार्म पर उठाया है । लेकिन ऐसा लगता है कि तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली जीत से हरियाणा की भाजपा की सरकार को अहंकार हो गया है । उसे लगता है की बाबा साहब रचित संविधान से वह खिलवाड़ करेंगे और दलित समाज उनके डर से चुपचाप बैठा रहेगा। इस पूरे मामले में यह बात भी देखनी है कि क्या दलित और पिछड़े वर्ग की हिमायती होने की दावेदार भाजपा और भाजपा सरकार में चुने हुए जनप्रतिनिधि क्या दलित समाज के हक हकूक के लिए आवाज उठाने का साहस कर पाएंगे  ? यह बात अंबेडकर महासभा गुरुग्राम सेक्टर 4 के संस्थापक अध्यक्ष एवं पटौदी के पूर्व विधायक स्वर्गीय भूपेंद्र चौधरी की सुपुत्री कांग्रेस नेत्री पर्ल चौधरी ने कही है इस मौके पर उनके साथ परमेश रंजन ओम प्रकाश गोठवाल एडवोकेट प्रदीप चौहान एडवोकेट महावीर प्रसाद सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे

पर्ल चौधरी 

उन्होंने कहा एक तरफ तो मुख्यमंत्री, सरकारी नौकरियां के ए और बी कैटेगरी में दलित वर्ग को प्रमोशन में 20 प्रतिशत आरक्षण देने की बात करते हैं और दूसरी तरफ संविधान में मिले आरक्षण को घटाकर 15 प्रतिशत करने में प्रयासरत रहते हैं । यह परिवार पहचान पत्र को अपना आधार बनाते हैं, जबकि उन्हें पता होना चाहिए कि आरक्षण का मुद्दा देश की जनगणना से जुड़ा हुआ है । 2011 के बाद हरियाणा सहित पूरे देश में कोई जनगणना नहीं हुई है। इसलिए जब तक जनगणना नहीं होती है,  तब तक इस तरीके का कोई भी कदम भाजपा सरकार के द्वारा दलित वर्ग के आवाज को दबाने का एक प्रयास माना जाएगा । जिसे दलित वर्ग कभी भी बर्दाश्त नहीं करेगा, यह एक सोंची समझी चाल लगती है और हमारे आरक्षण को कम करने के लिए ही इन्होंने परिवार पहचान पत्र का एक खेल खेला है। जिसके माध्यम से यह दलित वर्ग ओबीसी और सवर्ण में भी जो गरीब है उन सब को चाहे वह सरकारी अधिकार हो या फिर नौकरियों में आरक्षण हो या फिर राशन कार्ड या उससे मिलने वाली सुविधायें हो सबसे वंचित करने का एक प्रयास है। मुख्यमंत्री के एक सिपाहसालार जो गुरुग्राम जिले में काफी एक्टिव है, अब तो उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र भी दे दिया । उन्होंने बड़े-बड़े होर्डिंग यह कहकर छपवाया है कि वह पीला राशन कार्ड बनाने में जनता का सहयोग कर रहे हैं । जबकि जब वह सरकार में थे, तो यह काम  सरकार का ही था। फिर भी वह व्यक्तिगत तौर पर उसके लिए पोस्टर बाजी यहां कर रहे थे।

आरक्षण में कटौती कोई छोटी घटना नहीं

पर्ल चौधरी  ने रोष स्वरूप कहा दलित समाज के आरक्षण में कटौती कोई छोटी घटना नहीं , इसके माध्यम से सरकार में बैठे कुछ लोग हिंदू समाज को बांटने की कोशिश करने में लगे हैं । वह भूल जाते हैं की 1932 में एरावड़ा जेल में गांधी जी को अनशन को तुड़वाने के लिए हिंदू समाज की ओर से मदन मोहन मालवीय  ने और डिप्रेस्ड क्लासेस की ओर से बाबासाहेब अंबेडकर ने एक समझौता अंग्रेजों के 4 अगस्त 1932 को लाए गए कम्युनल अवार्ड के विरोध में किया था । 1932 के कम्युनल अवार्ड के माध्यम से ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने भारत के समाज को हमेशा के लिए टुकड़े टुकड़े में  बंटे रहने कोशिश की थी । अंग्रेजों के उस नापाक इरादों को हमारे पूर्वजों ने बखूबी सफल नहीं होने दिया था । इसलिए आज जो भी लोग मानेसर नगर निगम में दलित वर्ग के आरक्षण को कम करने में अपना दिमाग लगा रहे हैं, वह वास्तविकता में हमारे समाज को बांटने करने की कोशिश कर रहे हैं। जिसे बाबा साहब अंबेडकर के अनुयाई दलित समाज सहित हर वह भारतीय जो देश की एकजुटता में विश्वास रखता है  सफल नहीं होने देगा ।

भाजपा सरकार  दलित विरोधी फैसला वापस ले

उन्होंने कहा अब तो ऐसा लगता है कि कहीं सरकार ने गुड़गांव का नाम जब गुरुग्राम रखा था तो उन्होंने उसी समय यह विचार कर लिया था कि वह दलित आरक्षण को कम करेंगे। सरकार नहीं चाहती है कि जनप्रतिनिधि के रूप में दलित वर्ग राजनीति सहित अन्य क्षेत्रों में सर्वोच्च स्थान तक पहुंचे । इसलिए वह धनुर्धर रूपी दलित जनप्रतिनिधियों को लोकतंत्र के शुरुआती निगम चुनाव में ही संख्या कम करने में लगे हैं । पर्ल चौधरी ने हरियाणा प्रदेश के चुने हुए विधायक, सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, जिला परिषद में चुने हुए प्रतिनिधि, सरपंच, निकायों में पार्षद, मेयर, संविधान के अनुयाई से आह्वान किया की हरियाणा सरकार के इस दलित विरोधी फैसले को वापस लेने के लिए सरकार को मजबूर करें । अगर ऐसा नहीं हुआ तो दलित और ओबीसी समाज सड़कों पर उतरेगा और इस भाजपा सरकार में छुपे हुए हिंदू समाज की एकजुटता को तोड़ने की मंशा रखनेवाले व्यक्तियों की पहचान करेगा । उनके मंसूबों को सफल नहीं होने देगा।  समाज संविधान की रक्षा के लिए संविधान से मिले हर उस अधिकार का सदुपयोग करे, जिससे देश की एकजुटता और भाईचारा बना रहे।

Advertisement

Related posts

भारत के संसदीय इतिहास में 18 दिसम्बर, 23 का दिन एक दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण तारीख़ के रूप में दर्ज एक ही दिन 78 विपक्षी सांसद निलंबित

editor

भ्रष्ट होते चुनावों से लोकतंत्र के धुंधलाने का संकट

editor

CHANDIGARH मेयर चुनाव: शुक्रिया सुप्रीम कोर्ट, लोकतंत्र की हत्या की भाजपाई साजिश में मसीह सिर्फ ‘मोहरा’ है, पीछे मोदी का ‘चेहरा’ है।”

editor

Leave a Comment

URL