भाजपा के लोग कितना भी षडय़ंत्र कर लें, लेकिन मेरी सरकार स्थिर और मजबूत रहेगी-सीएम गहलोत।

भाजपा के लोग कितना भी षडय़ंत्र कर लें, लेकिन मेरी सरकार स्थिर और मजबूत रहेगी-सीएम गहलोत।

 

======अटल हिन्द ब्यूरो ========

गोविंद सिंह डोटासरा ने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस  कमेटी के अध्यक्ष का पद संभाल लिया। डोटासरा ने यह पद तब संभाला है, जब निर्वतमान

अध्यक्ष सचिन पायलट कांग्रेस के 18 विधायकों को लेकर दिल्ली चले गए हैं तथा अपनी सरकार बचाने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

पिछले 17 दिनों से शेष विधायकों के साथ जयपुर की होटल में बैठे हुए हैं। पद ग्रहण समारोह में होटल में रह रहे विधायकों को भी बसों से

प्रदेश कार्यालय तक लाया गया। गहलोत ने कहा कि जो विधायक मेरे साथ हैं, उनके एक माह के घाटे की पूर्ति मैं ब्याज सहित कर दूंगा।

किसी भी विधायक को घबराने की जरुरत नहीं है। अब चाहे 21 दिन लगे या 31 दिन जीत तो हमारी ही होगी। भाजपा के लोग कितना भी

षडय़ंत्र कर लें, लेकिन मेरी सरकार स्थिर और मजबूत रहेगी। सचिन पायलट का नाम लिए बगैर गहलोत ने कहा कि जिन लोगों ने गलती की

है वे कांग्रेस हाईकमान से माफी मांग लें। हाईकमान जो निर्णय देगा, उसे हम स्वीकार कर लेंगे। गहलोत ने कहा कि मैं पहली बार 1973 में

प्रदेश के इसी दफ्तर गया था। तब से लगातार आ रहा हूँ । मेरी आत्मा इसी दफ्तर में भटकती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की ताजा घटना

कांग्रेस के देश में टर्निंग पाइंट बनेगी। आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी देशभर में मजबूत होगी।

 

गद्दार की पहचान नहीं बने:

पदग्रहण समारोह में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने डोटासरा से कहा कि अध्यक्ष के तौर पर ऐसी मिसाल

कायम करें ताकि गद्दार के तौर पर पहचान नहीं बने। सचिन पायलट का नाम लिए बगैर पांडे ने कहा कि महात्वाकांक्षा सभी की होती है।

लेकिन बड़ी चीज भरोसे की है। यदि आपने भरोसा खो दिया है तो फिर आप पर कोई विश्वास नहीं करेगा। आज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में

कांग्रेस के सभी बड़े नेता मौजूदा है, अब कोई ताकत नहीं जो कांग्रेस को कमजोर कर सके। आज कांग्रेस का पूरा परिवार एकजुट है।

 

धरे रह गए कोरोना काल के नियम:

डोटासरा के पदग्रहण समारोह में कांग्रेस और समर्थन देने वाले सौ विधायकों के साथ साथ कांग्रेस के बड़े नेता उपस्थित रहे। हालांकि

चुनिंदा नेताओं को ही प्रदेश कार्यालय में प्रवेश दिया गया, लेकिन बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कार्यालय के बाहर खड़े थे। इन दिनों कोरोना काल

में संक्रमण से बचाने के लिए राज्य सरकार ने भी गाइड लाइन जारी कर रखी है। आम व्यक्ति यदि फिजिकल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं

करता है, तो उस पर जुर्माने का प्रावधाना है। मृत्यु होने पर श्मशान स्थल पर मात्र 20 लोगों के उपस्थित रहने का नियम है। लेकिन 29 जुलाई

को कांग्रेस कार्यालय के अंदर और बाहर हजारों लोगों की भीड़ रही। न तो फिजिकल डिस्टेंसिंग की पालना हुई और न ही लोगों ने मास्क

लगाया। हालांकि मौके पर बड़ी संख्या में तैनात थी, लेकिन किसी ने भी कोरोना काल के नियमों की पालना करवाने में रुचि नहीं दिखाई।

पुलिस के अधिकारियों को भी पता था कि नियमों का उल्लंघन करने वाले सत्तारूढ़ पार्टी के नेता और कार्यकर्ता है। सवाल उठता है कि जब

सत्तारूढ़ पार्टी के जिम्मेदार लोग ही नियमों का पालन नहीं करेंगे तब आमलोगों से क्या अपेक्षा की जाएगी।

डूडी भी आए:

डोटासरा के पदग्रहण समारोह में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अभी तक सचिन पायलट के समर्थक माने जाने वाले रामेश्वर डूडी भी उपस्थित

रहे। इस मौके पर डूडी ने भी पायलट पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन आरोप लगाया कि कांग्रेस ने बगावत के पीछे भाजपा

का हाथ है। यहां यह उल्लेखनीय है कि डूडी ने सीएम अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के खिलाफ राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के

अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। तब डूडी ने गहलोत पर मुख्यमंत्री के पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। उस समय पायलट डिप्टी

सीएम और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। तब पायलट ने डूडी की पीठ थपथपाई थी। लेकिन 29 जुलाई को ऐसा प्रतीत हुआ कि डूडी अब

सीएम गहलोत के समर्थक हो गए हैं।

भागीदारी मिलेगी-डोटासरा:

पदग्रहण के दौरान मीडिया से संवाद करते हुए डोटासरा ने कहा कि वे स्वयं साधारण कार्यकर्ता रहे हैं और उन्हें कार्यकर्ताओं की भावनाओं

का पता है। डोटासरा ने कहा कि सत्ता और संगठन एक गाड़ी के दो पहिए हैं। कार्यकर्ताओं ने जिस उम्मीद के साथ राजस्थान में कांग्रेस की

सरकार बनवाई उस उम्मीद पर खरा उतरने की पूरी कोशिश की जाएगी। डोटासरा ने कहा कि कार्यकर्ताओं को सरकार में भागीदारी

मिलेगी। उन्होंने कहा कि जो विधायक कांगे्रस के हाथ के निशान पर चुनाव जीते हैं, उन्हें कांग्रेस में ही बना रहना चाहिए। सचिन पायलट का

नाम लिए बगैर डोटासरा ने कहा कि सुबह का भटका हुआ कोई व्यक्ति शाम को घर लौट आता है तो उसे भटका हुआ नहीं माना जाता। जो

लोग दिल्ली में बैठे हुए हैं, वे कांग्रेस आलाकमान के पास जाकर अपने बात रख सकते हैं। राज्यपाल कलराज मिश्र की भूमिका पर सवाल

उठाते हुए डोटासरा ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष में विधानसभा के चार सत्र हुए हैं, इनमें से तीन सत्र सात दिन का नोटिस देकर बुलाए गए हैं।

इसलिए अब 21 दिन का नोटिस देने की बात कहना बेमानी है। डोटासरा ने कहा कि राज्यपाल को संविधान के अनुरूप अपना दायित्व

निभाना चाहिए।

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