भाजपा में टिकट कटने वाले दो दर्जन वर्तमान व पूर्व विधायकों के क्षेत्रों में खुलेआम या भितरघात होगा ! 

जेजेपी मालामाल, भाजपा फटेहाल, कांग्रेस कंगाल,50 सीटों पर भाजपा में बगावत या भितरघात

कांग्रेस ने 40 सीटों पर गलत प्रत्याशी उतारकर किया अपना बंटाधार

===राजकुमार अग्रवाल ====

चंडीगढ़। पिछले 1 सप्ताह के दौरान प्रदेश का सियासी पारा ऊपर -नीचे होता रहा। प्रत्याशियों की सूची फाइनल करने में भाजपा, कांग्रेस और जेजेपी को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
दोबारा सत्ता में वापसी का प्रबल दावा पेश कर रही भाजपा के लिए प्रत्याशियों का चयन बेहद मुश्किल रहा और प्रत्याशियों की घोषणा के बाद उसे बड़ी बगावत का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस के लिए भी प्रत्याशियों का चयन हंगामेदार रहा। टिकटों में गड़बड़ी को लेकर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर ने खुलेआम आरोप लगाए।
1 सप्ताह के दौरान जननायक जनता पार्टी टिकट कटने वाले नेताओं की पहली च्वाइस रहे और 2 दर्जन बड़े नेताओं ने जेजेपी ज्वाइन की।

जेजेपी रही मालामाल

10 दिन पहले तक चुनावी दंगल में हल्की आंकी जा रही जननायक जनता पार्टी के लिए पिछला 1 सप्ताह सियासी रूप से मालामाल होने वाला रहा। भाजपा और कांग्रेस के दो दर्जन वजनदार नेताओं ने जेजेपी ज्वाइन करते हुए चुनावी दंगल का नजारा बदलने का काम किया।
पूर्व सांसद ईश्वर सिंह, पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता, पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान, पूर्व सीपीएस रणसिंह मान, पूर्व विधायक सतविंदर राणा, पूर्व विधायक अनीता यादव, पूर्व विधायक शिव शंकर भारद्वाज, पूर्व विधायक रघुवीर छिल्लर, देवेंद्र बबली, रामकरण काला, रणधीर मलिक, पवन खरखोदा, भूपेंद्र मलिक, रोहतास खटाना, अमन अहमद, इकबाल जैलदार, रामनिवास सुरजाखेड़ा, जोगीराम सिहाग, डॉ वीरेंद्र सिवाच, राजू मान, मामन चंद और जगदीश मिताथल ने जननायक जनता पार्टी में शामिल होने या आशीर्वाद देने का ऐलान किया।
बड़े प्रत्याशियों के शामिल होने के चलते जेजेपी अब प्रदेश की राजनीति में निर्णायक ताकत बनकर उभरती हुई नजर आ रही है। बड़े चेहरों के शामिल होने के कारण जेजेपी भाजपा और कांग्रेस के कई सीटों पर समीकरण बिगाड़ेगी।

50 सीटों पर भाजपा में विरोध

आगामी विधानसभा चुनाव में मिशन 75 का लक्ष्य लेकर चल रहे भारतीय जनता पार्टी को प्रत्याशियों की घोषणा के बाद बड़े पैमाने पर सियासी नुकसान होता हुआ नजर आ रहा है।
टिकट कटने वाले दो दर्जन वर्तमान व पूर्व विधायकों के क्षेत्रों में खुलेआम या भितरघात होगा। दिग्गज नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट नहीं मिलने के चलते उनके क्षेत्रों में भी कई सीटों पर भाजपा के के समीकरण हार में बदल सकते हैं।
दो दर्जन भाजपा नेताओं ने पार्टी छोड़ने और बागी होकर चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है जिसके चलते भाजपा के मिशन 75 पर सवालिया निशान लग गया है।
भाजपा ने हैवीवेट मंत्रियों विपुल गोयल और राव नरबीर के टिकट काटने के अलावा डेढ़ दर्जन विधायकों को बीच रास्ते पर छोड़ दिया जिसके चलते उनके समर्थक भाजपा का विरोध करने का ऐलान कर चुके हैं।
मुलाना, रादौर, थानेश्वर, लाडवा, पिहोवा, पुंडरी, कैथल, गुहला चीका, कलायत, पानीपत शहर, समालखा, गन्नौर, खरखोदा, राई, गोहाना, बरौदा सफीदों, जींद, नरवाना, सिरसा, कालांवाली, फतेहाबाद, रतिया, आदमपुर, बरवाला, उकलाना, नलवा, हांसी, बवानीखेड़ा, तोशाम, दादरी, किलोई, महम,बेरी, झज्जर, कलानौर, अटेली, कोसली, रेवाड़ी, गुड़गांव, बादशाहपुर, पटौदी, सोहना, पुनहाना, हथीन, होडल, फरीदाबाद एनआईटी, तिगांव, बल्लभगढ़ और पृथला सीटों पर भाजपा को बगावत या भितरघात का सामना करना पड़ रहा है। 90 में से 50 सीटों पर बगावत या भितरघात होना भाजपा के लिए बड़ी परेशानियां खड़ी करने का काम करेगा।

कांग्रेस में हुआ टिकट घोटाला

टिकटों को लेकर सबसे ज्यादा मारामारी झेलने वाली कांग्रेस टिकटों के वितरण के बाद कंगाल नजर आ रही है।
पार्टी के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर ने टिकटों के वितरण में भारी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। पूर्व सीएलपी लीडर किरण चौधरी भी टिकटों के वितरण को लेकर पूरी तरह नाराज हैं।
40 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशियों के चयन पर सवालिया निशान उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इन 40 सीटों पर मजबूत दावेदारों की जगह पसंद के प्रत्याशियों को उतारकर कांग्रेश की संभावनाओं की कब्र खोदने का काम किया गया है। टिकट घोटाले ने कांग्रेस की सत्ता की दावेदारी को तार-तार कर दिया है।
अंबाला कैंट,यमुनानगर, नारायणगढ, साढौरा, लाडवा, रादौर, शाहबाद, नीलोखेड़ी, इंद्री, करनाल, असंध, पानीपत शहरी, पानीपत ग्रामीण, बरौदा, सफीदों, जुलाना, जींद, नरवाना, उचाना, डबवाली, रानियां, फतेहाबाद, टोहाना,, उकलाना, हांसी, नलवा, भिवानी, बाढड़ा, दादरी, लोहारु, नांगल चौधरी, अटेली, कोसली, पटौदी, गुड़गांव, सोहना, तिगांव, फरीदाबाद, एनआईटी, और बल्लभगढ़ सीटों पर प्रत्याशियों के चयन को लेकर पार्टी के बड़े नेताओं ने ही सवालिया निशान खड़े किए हैं।
40 सीटों पर पार्टी के अंदर ही सवालिया निशान खड़ा होना कांग्रेस के चुनावी समीकरणों को बड़ी चोट पहुंचा गया है। अशोक तंवर ने आरोप लगाया है कि पार्टी के बड़े नेताओं ने ही विधानसभा चुनाव में पार्टी का बेड़ा गर्क करने की साजिश रची है।

बात यह है कि टिकटों के वितरण में भाजपा और कांग्रेस को बड़ी बगावत का सामना करना पड़ा है। भाजपा में 50 सीटों पर बगावत होना उसके लिए शुभ संकेत नहीं है। टिकटों के वितरण से पहले भाजपा के पक्ष में उसके नेता एकतरफा जीत के दावे कर रहे थे लेकिन अब 50 सीटों पर उसी से जुड़े हुए नेता पार्टी की चुनावी संभावनाओं को खराबबता रहे हैं।
4 दर्जन से अधिक भाजपा से जुड़े रहे विधायकों, पूर्व विधायकों और टिकट के दावेदारों का पार्टी के प्रत्याशियों के खिलाफ ताल ठोकना या खिलाफ प्रचार करना भाजपा के पक्ष में बने माहौल को खराब कर रहा है। यह प्रचार जितना ज्यादा बढ़ेगा उतना ही भाजपा की सीटें कम होती जाएंगी।
कांग्रेस में 4 दर्जन सीटों को लेकर उसी के नेताओं का सवाल खड़ा करना और जीत सकने वाली सीटों पर कमजोर प्रत्याशियों का उतारना कहीं ना कहीं टिकट घोटाले की तरफ इशारा कर रहा है। इस टिकट घोटाले के कारण कांग्रेस के लिए 2014 की सीटों को पार करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होगा।
टिकटों के वितरण के दौर में सबसे अधिक फायदा जननायक जनता पार्टी को हुआ है जननायक जनता पार्टी में 20 असरदार नेताओं का शामिल होना उसकी चुनावी संभावनाओं को वजन प्रदान कर गया है 3 दर्जन से अधिक सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशी मजबूत उपस्थिति दिखा रहे हैं आज नामांकन के दौरान कई सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों के समर्थन में हजारों वर्करों की हाजिरी यह बता गई कि बीजेपी भाजपा और कांग्रेस के समीकरणों को बिगाड़ने जा रही है।
चुनावी दंगल के पहले दौर में डेढ़ दर्जन से अधिक नेताओं की एंट्री करवा कर जेजेपी पूरी तरह मालामाल रही।
50 सीटों पर बगावत और विरोध के कारण भाजपा फटेहाल प्रतीत हो रही है।
40 सीटों पर कांग्रेस के ही बड़े नेताओं के गलत प्रत्याशी उतारने के आरोपों ने कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को कंगाल ठहराने का काम किया है।

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