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भूपेंद्र हुड्डा की सियासी तकदीर बीजेपी-जेजेपी गठबंधन सरकार की उम्र तय करने का काम करेगी,वरना हुड्डा का सियासी  खात्मा तय 

हुड्डा के “निर्णायक” सियासी सफर का आगाज
बीजेपी-जेजेपी सरकार की “उम्र” तय करेगी तकदीर

(Bhupendra Hooda’s political fortune will work to determine the age of BJP-JJP coalition government, else Hooda’s political end will be decided)
=राजकुमार अग्रवाल कैथल =

कांग्रेस हाईकमान ने पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा को विधायक दल का नेता और नेता प्रतिपक्ष बनाने की हरी झंडी देकर उन्हें फिर से हरियाणा कांग्रेस(hariyana congress) की ड्राइविंग सीट पर बैठा दिया है। भूपेंद्र हुड्डा 72 साल की उम्र में अपने निर्णायक सियासी सफर का आगाज कर गए हैं‌ आने वाले 5 साल में उनका सियासी करियर आर या पार के दौर से गुजरता हुआ नजर आएगा। भूपेंद्र हुड्डा ने उस समय कांग्रेस की मजबूती का बीड़ा उठाया है जब कांग्रेस 31 विधायकों की जीत के साथ दोबारा सत्ता की दावेदारी के ट्रैक पर लौटने की उम्मीद कर रही है। प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा के साथ जुगलबंदी बनाने वाले भूपेंद्र हुड्डा के सामने चुनौतियों की भरमार है।
पिछली गलतियों से बचना होगा
भूपेंद्र हुड्डा(BHUPENDER SINGH HUDDA) को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी के साथ निभाने तो होगी ही लेकिन उसके साथ-साथ उन्हें पिछली गलतियों से बचना होगा। 10 साल के सत्ता काल में हुड्डा ने पार्टी के तमाम बड़े नेताओं को खुड्डे लाइन कर दिया था। आधा दर्जन बड़े नेताओं की विदाई के कारण ही कांग्रेस बेहद कमजोर हो गई और सत्ता की दौड़ से बाहर हो गई। भूपेंद्र हुड्डा को किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई, कैप्टन अजय यादव और रणदीप सुरजेवाला को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। उन्हें साथी नेताओं को काटने की बजाय उन्हें साथ लेकर चलना होगा।
बीजेपी-जेजेपी (BJP-JJP)की सरकार तय करेगी तकदीर
भूपेंद्र हुड्डा की सियासी तकदीर बीजेपी-जेजेपी गठबंधन सरकार की उम्र तय करने का काम करेगी। अगर यह सरकार 5 साल पूरे कर गई तो भूपेंद्र हुड्डा के लिए बेहतरी की संभावनाएं खत्म हो जाएंगे क्योंकि 5 साल बाद भूपेंद्र हुड्डा शारीरिक और मानसिक तौर पर बीजेपी और जेजेपी को पछाड़ने के लिए सक्षम नहीं होंगे। गठबंधन सरकार की समय से पहले विदाई ही भूपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस दोनों के लिए संभावनाओं का दरवाजा खोल सकती है।
बात यह है कि भूपेंद्र हुड्डा दोबारा से कांग्रेस में सबसे मजबूती की पायदान पर लौट आए हैं। कुमारी शैलजा के साथ मिलकर वह अपने सियासी मंसूबों को पूरा करने की हसरत रखते हैं। भूपेंद्र हुड्डा के लिए आने वाला रास्ता किसी भी तरह से आसान नहीं है। उन्हें नेता प्रतिपक्ष रूप में जहां सरकार के फेसलों पर सवालिया निशान खड़े करने होंगे वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस को भी निचले स्तर तक मजबूत करना होगा। अगर उन्होंने पहले की तरह “एकला चलो” की सियासत को अंजाम दिया तो वह उनकी आत्मघाती रणनीति साबित होगी। आधा दर्जन बड़े नेताओं को साथ लेकर ही वह कांग्रेस को मजबूत करने का काम कर पाएंगे। भूपेंद्र हुड्डा कोई हकीकत समझनी होगी कि गैरजाट वोटरों में जहां बीजेपी कांग्रेस का बड़ा हिस्सा निगल चुकी है वहीं दूसरी तरफ दुष्यंत चौटाला जाट वोटों की पहली पसंद बनकर उभर रहे हैं। बीजेपी-जेजेपी सरकार ने अगर 5 साल पूरे कर लिए तो भूपेंद्र हुड्डा के सियासी करियर का चमकदार अंजाम देखने को नहीं मिलेगा। अगर गठबंधन सरकार समय से पहले गिर गई तो हुड्डा और कांग्रेस दोनों ही सत्ता में वापसी करने का ख्वाब देख पाएंगे। हालात के करवट लेने से पहले भूपेंद्र हुड्डा को सियासी हकीकत की जमीन को समझते हुए कांग्रेस को मजबूती की तरफ अग्रसर करना होगा। अब देखना यही है कि भूपेंद्र हुड्डा कितनी संजीदगी के साथ अपनी जिम्मेदारियों की कसौटी पर खरा उतरते हुए कांग्रेस की मजबूती के लिए काम करते हैं या खुद के दबदबे की सियासत का बिगुल फूंकते हैं।

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