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भूपेंद्र हुड्डा ने कांग्रेस हाईकमान को “झुकाने” के लिए फिर खेला प्रेशर पॉलिटिक्स का “दांव”

 भूपेंद्र हुड्डा ने कांग्रेस हाईकमान को “झुकाने” के लिए फिर खेला प्रेशर पॉलिटिक्स का “दांव”
अपने 19 विधायकों को प्रदेश प्रभारी विवेक बंसल के पास भेजकर शैलजा को हटाने और दीपेंद्र हुड्डा को अध्यक्ष बनाने की मांग रखी
-राजकुमार अग्रवाल –
नई दिल्ली। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने एक बार फिर से प्रैशर पोलिटिक्स का “हथियार” आजमाते हुए अपने 19 विधायकों को आज दिल्ली में प्रदेश प्रभारी विवेक बंसल के पास भेजा।
हुड्डा समर्थक विधायकों ने प्रदेश प्रभारी को कहा कि शैलजा की “अगुवाई” में हरियाणा में कांग्रेसी सत्ता हासिल नहीं कर सकती है। इसलिए हुड्डा परिवार को पार्टी की कमान सौंपी जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी शिकायत की कि शैलजा उनके साथ तालमेल करके काम नहीं करती है और अपनी मनमर्जी करती हैं, इसलिए वे उनके साथ में काम नहीं कर सकते।
भूपेंद्र हुड्डा के लिए प्रैशर पॉलिटिक्स के हथियार का “इस्तेमाल” करना कोई नई बात नहीं है।
वह पिछले 7 साल में एक दर्जन बार इस हथियार का बखूबी इस्तेमाल अपने सियासी “फायदे” के लिए कर चुके हैं।

भूपेंद्र हुड्डा पिछले 16 साल से प्रदेश कांग्रेस को अपने इशारे पर चला रहे हैं। 9 साल के सत्ता काल में जहां उन्होंने किसी भी दूसरे कांग्रेसी नेता को उभरने नहीं दिया वही कांग्रेस के संगठन और सत्ता दोनों को अपने इशारे पर चलाने का काम किया। उनके “निरंकुश” व्यवहार के कारण ही एक दर्जन बड़े कांग्रेसी नेता जहां कांग्रेस को छोड़ गए, वहीं बाकी बचे हुए नेता भी मजबूरी में “सरैंडर” कर गए।
भूपेंद्र हुड्डा ने 7 साल के दौरान अशोक तंवर और कुमारी शैलजा को जरा भी सहयोग नहीं किया और हमेशा उनके फैसलों में “टांग अड़ाने” का काम किया।
भूपेंद्र हुड्डा के कारण ही पिछले 7 साल में हरियाणा में कांग्रेस का संगठन खड़ा नहीं हो पाया है। दिल्ली में बैठे कई बड़े “पैरोकार” नेताओं के बलबूते पर भूपेंद्र हुड्डा ने कांग्रेस संगठन की जारी हुई लिस्ट को भी “रद्द” करवाने का काम किया।
इसके अलावा प्रेशर पॉलिटिक्स का इस्तेमाल करते हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अशोक तंवर को भी अध्यक्ष पद से हटवा दिया।
कांग्रेस हाईकमान को “ठेंगा” दिखाते हुए उन्होंने राज्यसभा चुनाव में पार्टी के फैसले के विरूद्ध जाते हुए “स्याही” कांड को अंजाम दिया देकर अपनी “मनमानी” का सबूत दिया।
मध्य प्रदेश में हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के बीच में हुए झगड़े का फायदा उठाते हुए उन्होंने प्रेशर पॉलिटिक्स के जरिए ही बेटे दीपेंद्र हुड्डा की राज्यसभा की टिकट का “इंतजाम” किया।
भूपेंद्र हुड्डा शैलजा को अध्यक्ष पद से हटाकर अपने बेटे दीपेंद्र को इस पद पर बैठना चाहते हैं।
बात यह है कि भूपेंद्र हुड्डा पूरी तरह से पंजाब के अमरिंदर सिंह के “नक्शे कदम” पर चल रहे हैं‌ भूपेंद्र भाई अच्छी तरह जानते हैं कि किस तरह से “मुश्किल” में फंसे हुए कांग्रेस हाईकमान को “झुकाकर” अपना “उल्लू” सीधा करना है और अपनी मांगे मनवानी हैं।
इसी फार्मूले पर चलते हुए उन्होंने आज अपने समर्थक विधायकों को प्रदेश प्रभारी के पास भेजा।
हुड्डा जानते हैं कि इस समय पार्टी हाईकमान पंजाब इकाई में जारी घमासान को “सुलझाने” के लिए “माथापच्ची” कर रहा है वहीं राजस्थान में भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खटपट जारी है। ऐसे माहौल में हरियाणा में विवाद का तीसरा मोर्चा खुलने से रोकने के लिए हाईकमान प्रैशर में आ जाएगा और  उनकी मांग को मान लेगा।
इसलिए इसलिए हुड्डा ने अपने 19 विधायकों को प्रदेश प्रभारी के पास भेजकर कुमारी शैलजा को अध्यक्ष पद से हटाकर अपने बेटे को अध्यक्ष बनाने की मांग रखी।
खास बात यह भी है कि एक तरफ भूपेंद्र हुड्डा जहां कांग्रेस हाईकमान को प्रैशर पोलिटिक्स के जरिए दबाना चाहते हैं वही बीजेपी के साथ “नूरा कुश्ती” खेलते हुए खुद को जेल से बाहर रखने में भी सफल हो रहे हैं।
वे भाजपा के खिलाफ किसी भी मुद्दे पर फील्ड में उतारने के बजाय सिर्फ “बयानबाजी” की पॉलिटिक्स ही कर रहे हैं। कांग्रेस के घोषित कार्यक्रमों में शामिल होने के बजाय हुड्डा अपने बेटे की टीम दीपेंद्र के जरिए पूरे प्रदेश में कांग्रेस के “समानांतर” अपना संगठन स्थापित कर रहे हैं।
अब देखना यही है कि हर बार की तरह कांग्रेस हाईकमान उनके प्रैशर में आकर “घुटने” टेकते हुए उनकी मांगों को मानता है या प्रेशर पॉलिटिक्स को नकारते हुए कुमारी शैलजा पर भरोसा रखता है।

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