मस्जिदों के गेट पर ताले और खाकी वाले बने रखवाले !

 

मस्जिदों के गेट पर ताले और खाकी वाले बने रखवाले !

In haryana
Locks and khaki-made keepers at mosque gates!

पटौदी। धारा 144, लाॅक डाउन और नाककाबंदी के बीच दिल्ली से बाहर पांव फैला रहे कोविड 19 को देखते किसी भी धार्मिक स्थल पर सभी प्रकार के आयोजन, पूजा-अर्चना पर पाबंदी है। लाॅक डाउन के दौरान नवाबी नगरी कहलाने वाले पटौदी शहर की सभी मस्जिदों के गेट पर लटके ताले के बीच में नमाजियों की भीड़ जुटने से रोकने के लिए खाकी वाले चैकसी के लिए मुस्तैद रहे।
कोरोना-कोविड 19 वायरस के पांव फैलाते दौर के बीच में तीन अप्रैल को लगातार तीसरा जुम्मा पर नमाज अता करने का अवसर आया।

 

 

दोपहर में व्यापारी मोहल्ले में एक मस्जिद से नमाज की सूचना के लिए जैसे ही अजान हुई तो मौके पर मौजूद पुलिस कर्मी सक्रिय हो गए कि कही मुस्लिम किसी भी मस्जिद में किसी भी प्रकार से भले ही चोरी छिपे नमाज के लिए एकत्रित नहीं होने पाये।
पटौदी में भारतीय किक्रेट टीम के पूर्व कप्तान नवाब मंसूर अली खान के पुत्र सैफ अली खान के इब्राहिम पैलेस आवास परिसर के अलावा विभिन्न वार्डो में 11 मस्जिदें और एक ईदगाह मौजूद है, जहां पर मुस्लिम समुदाय सामुहिक रूप से नमाज अता करता आ रहा है। लेकिन कोरोना-कोविड 19 वायरस के संक्रमण से फैलने को देखते हुए ही धाारा 144 लगाकर चार से अधिक लोगों के एक स्थान पर जमा होने पर सख्त पाबंदी लगाई हुई है।

 

 

 

जुम्मा को जैसे ही दोपहर में अजान हुई तो सबसे अधिक चहलपहल व्यापारी मोहल्ला और आसपास में देखने को मिली। इसी बीच में यह बात भी सामने आई कथित रूप से मस्जिदों में मौलवी सहितं कुल तीन मुस्लिम ही नमाज अता करने के लिए अंदर मौजूद हैं। जब कि मस्जिदों के बाहर ताले लटके हुए और कोरोना से बचाव के पोस्टर चस्पा थे। अजान के साथ ही मुस्लिम वार्डो सहित मस्जिदों के आसपास आने-जाने वालों को तथा घरों के बाहर खड़े तथा आने-जाने वाले मुस्लिमों को पुलिस ने खदेड़ना शुरू कर दिया। इसी बीच में मस्जिदों के सामने या उन रास्तों से गुजरने वाले वाहन सवारों को भी रोक पर पूछताछ की गई। यहां इस बात को भी खारिज नहीं किया जा सकता कि जुम्मा की नमाज के लिए मुस्लिमों ने अपने स्तर पर किसी न किसी प्रकार मस्जिदों में प्रवेश का प्रयास नहीं किया हो, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से नाकाम ही रहे।

 

अपने-अपने घरों में अता की नमाज
पटौदी नगर पालिका के पूर्व पार्षद एवं नंबरदार अब्दुुल जलील ने कहा कि, आज के हालात में हमारे लिए समाज और देश सहित भाईचारा तथा कानून सर्वोपरी है। अल्लाह की इबादत करनी है, जुम्मा की नमाज पढ़नी है तो घर पर भी यह काम हो सकता है। पंडित कैलाशचंद बाली के शिष्य और हजरत बाबा सैैयद नुरूदद्दीन दरगाह के गद्दीनशी सैयद एजाज हुसैन जज्जू बाबा ने कहा कि, धर्म कोई भी हो, इंसानियत और नेक नीयती से बड़ा कुुछ भी नही है। आज सरकार के द्वारा भी पावंदी लगाई गई, वह बिना किसी भेदभाव के सभी धर्म के मानने वालों के धार्मिक आौर आस्था केंद्रो पर लागू है।  ताहिर खान, हजूर अहमद, अब्दुुल रफीक फन्नू खान, मोहम्मद मुफती सुलेमान, हाफिज मुहम्मद उमर, पार्षद मोहम्मद जाहिद, इमरान खान सहित अन्य का भी तर्क है कि, आज हर सच्चे मुसलमान का फर्ज बनता है कि, कोरोना जैसी महामारी को रोकने के लिए सबसे पहले अपने, परिवार, समाज और देश के हित को सामने रखकर ही सोचे।

 

 

कोरोना-कोविड 19 वायरस के खात्मे सहित सभी के सेहदमंद होने के लिए परवरदिगार, अल्लाह से अपने ही परिवार के सदस्यों के साथ नमाज अता कर दुआ की जानी चाहिये कि लो भी इंसान कोरोना से पीड़ित है उसे सेहत बक्शे और जो भी कोई कोविड 19 से बचाव के अभियान में काम कर रहा है ऐसे सभी लागाों को फरिश्ते जैसी हिम्मत और जज्बा प्रदान करे, विभिन्न कारणों से यहां-वहां फंसे गरीबों को भूखा नहीं सोने दे, यही हमारी सभी की दुआ है।

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