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मुम्बई पुलिस के भरोसे होती तो कंगना का हाल भी दफ्तर जैसा होता।

भारत की सनातन संस्कृति  राफेल की सर्वधर्म पूजा, दूसरी संस्कृति मुम्बई में कांगना रनौत का दफ्तर तोड़ते समय दिखी।

====राजकुमार अग्रवाल ========

फ्रांस निर्मित अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल को विधिवत तौर पर भारतीय वायुसेना में शामिल कर लिया गया। इस अवसर पर

अंबाला एयरबेस पर सर्वधर्म पूजा हुई। इस सर्वधर्म पूजा पर फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस ने आश्चर्य व्यक्त किया। फ्लोरेंस ने देखा कि

एक पंडित जी संस्कृत में मंत्रोच्चारण कर रहे तो एक मौलाना साहब हाथ उठाकर दुआ कर रहे थे। मौलाना साहब ने अपने उर्दू

अंदाज से कहा हे खुदा इतनी ताकत अता कर कि हमारा राफेल विमान दुश्मन के इरादों को नेस्तानाबूद कर दे। वहीं सिक्ख धर्म

के ग्रंथी ने अंबाल एयरबेस पर जो बोले सो निहाल की गूंज से गूंजा दिया। इतना ही नहीं ईसाई धर्म के पादरी ने विमान की

कामयाबी के लिए प्रभु से प्रार्थना की। यह सब भारत की सनातन संस्कृति के तहत हुआ। कोई माने या नहीं, लेकिन हमारी सनातन

संस्कृति ही ऐसी संस्कृति है, जिसमें सभी धर्मों का सम्मान होता है। सनातन संस्कृति के शासन में सभी धर्मों के लोग प्यार मोहब्बत

से रह सकते हैं। सनातन संस्कृति किसी दूसरी संस्कृति वाले धर्म को खत्म करने में भरोसा नहीं रखती है। बल्कि दूसरी संस्कृति के

धर्म का भी आदर किया जाता है। यह भरोसा एक बार फिर 10 सितम्बर को अंबाला एयरबेस पर सर्वधर्म पूजा करवा कर दिखाया

गया है। माना जाता है कि पूजा दुआ, अरदास और प्रार्थना में बहुत ताकत होती है। जब राफेल की कामयाबी के लिए पूजा, दुआ,

अरदास और प्रार्थना एक साथ हुई है तो फिर इस विमान की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। 10 सितम्बर से ही हमारा

राफेल अब दुश्मन देशों से लगी सीमा पर चौकसी कर सकेगा। सर्वधर्म पूजा के बाद अब राफेल की ताकत और बढ़ गई है।

मुम्बई में दूसरी संस्कृति:

10 सितम्बर को जहां अंबाला एयरबेस पर सनातन संस्कृति के अनुरूप माहौल देखने को मिला, वहीं 9 सितम्बर को मुम्बई में

अलग ही संस्कृति देखने को मिली। अभिनेत्री कांगना रनौत  का दफ्तर बेवजह तोड़ दिया गया। मुम्बई में ऐसे करोड़ों दफ्तर और

मकान होंगे, जिनके मालिकों ने अंदर की डिजाइन अपनी सुविधा से कर ली, लेकिन महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस औन एनसीपी

 के गठबंधन वाली सरकार को लगा कि अभिनेत्री कांगना इन दिनों खिलाफत कर रही है। अकेली अभिनेत्री तीन दलों की सरकार

को चुनौती दे रही हैं। जिस बेरहमी से कांगना का दफ्तर तोड़ा गया, उससे साफ जाहिर होता है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली

गठबंधन सरकार कितनी खफा है। क्या अलग विचार रखने वाली एक अभिनेत्री के साथ ऐसा बर्ताव किया जाना चाहिए। यह तो

अच्छा हुआ कि केन्द्र सरकार ने कांगना को वाई श्रेणी की सुरक्षा दे दी और जब 9 सितम्बर को कंगना मुम्बई पहुंची तो केन्द्रीय

सुरक्षा बलों के घेरे में थीं। यदि कांगना गठबंधन सरकार के अधीन काम करने वाली मुम्बई पुलिस के भरोसे होती तो कंगना का

हाल भी दफ्तर जैसाहोता। कांगना को भगवान श्रीराम की सनातन संस्कृति में भरोसा है, इसलिए अब कांगना ने सीधे मुख्यमंत्री

उद्धव ठाकरे को चुनौती दी है।

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