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मेरे पास रखे गए थे सारे सबूत:साजिश थी बाबरी ढांचा ढहाना,- जस्टिस लिब्रहान

 मेरे पास रखे गए थे सारे सबूत:साजिश थी बाबरी ढांचा ढहाना,- जस्टिस लिब्रहान

दिल्ली (एजेंसी )बाबरी मस्जिद विध्वंस कांड में विशेष सीबीआई अदालत ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने अपने

में मजबूत सबूतों के अभाव और घटना के सुनियोजित न होने का हवाला देते हुए सभी 32 आरोपियों को बरी

कर दिया। अब इस मामले की जांच करने वाली लिब्रहान कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस लिब्रहान का कहना है कि

मस्जिद को गिराना एक साजिश थी और मुझे अब भी इस पर भरोसा है।

जस्टिस मनमोहन सिंह लिब्रहान ने कहा, “मेरे सामने मामले में जो भी सबूत रखे गए, उससे साफ था कि बाबरी

मस्जिद को ढहाना सुनियोजित था। मुझे याद है कि उमा भारती ने इस घटना के लिए जिम्मेदारी भी ली थी।

आखिर किसी अनदेखी ताकत ने तो मस्जिद गिराई नहीं, यह काम इंसानों ने ही किया।”

 

बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सरकार ने इस घटना की जांच के लिए लिब्रहान आयोग का गठन किया था। इस

आयोग ने 17 साल चली जांच के बाद 2009 में अपनी रिपोर्ट दायर की। इसमें संघ और भाजपा के बड़े नेताओं

पर बाबरी मस्जिद विध्वंस में शामिल होने के आरोप लगे। रिपोर्ट में एक जगह कहा गया था कि इन वरिष्ठ

नेताओं ने सक्रिय या निष्क्रिय तौर पर मस्जिद तोड़ने का समर्थन किया था।

कमीशन ने कहा था कि कारसेवकों का अयोध्या पहुंचना न तो अचानक था और न ही वे सब अपनी ही मर्जी से

वहां आ गए थे। यह पूरी तरह सुनियोजित था, जिसकी पहले से ही तैयारी कर ली गई थी। इस रिपोर्ट में भाजपा

वरिष्ठ नेता अडवाणी के साथ, उमा भारती, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और संघ और विश्व हिंदू

परिषद के कई नेताओं, अधिकारियों पर देश के सांप्रदायिक फूट के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

जस्टिस लिब्रहान ने कहा कि इस मामले में उनकी खोज एकदम सही और ईमानदार थी और इसमें कोई

पक्षपात भी नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी रिपोर्ट है, जो बताती है कि कब क्या और कैसे

हुआ। यह इतिहास का हिस्सा होगी। हालांकि, कोर्ट के फैसले पर जस्टिस लिब्रहान ने बोलने से साफ इनकार

कर दिया। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी ने अपना काम ईमानदारी से किया और कोर्ट को अलग फैसला

सुनाने का अधिकार है। कोर्ट के कामकाज की ताकत पर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते।

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