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मोदी के अडानी और अशोक गहलोत के अडानी में फर्क है? 

मोदी के अडानी और अशोक गहलोत के अडानी में फर्क है?

====राजकुमार  अग्रवाल ========

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी देश के दो प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडानी को लेकर प्रधामंत्री नरेन्द्र

मोदी पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। राहुल का आरोप रहता है कि मोदी सरकार वो ही नीति बनाती है, जिससे

अडानी-अंबानी को फायदा हो। कृषि सुधार बिल के पास होने पर भी राहुल गांधी ने कहा कि इससे मोदी के अडानी-अंबानी जैसे

दोस्तों को फायदा होगा। राहुल गांधी के सभी बयानों का अर्थ यही निकलता है कि नरेन्द्र मोदी की अडानी-अंबानी से सांठ-गांठ

है। लेकिन शायद राहुल गांधी को राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के काम काज की जानकारी नहीं

है। राजस्थान में भी गहलोत सरकार उद्योगपति गौतम अडानी पर पूरी तरह मेहरबान है। अडानी की पावर कंपनी भी गहलोत

सरकार को बिजली सप्लाई करती है। कोयले की कीमत बढ़ाने का 7 करोड़ रुपए का मामला अभी शांति भी नहीं हुआ था कि

अडानी ग्रीन एनर्जी कंपनी का एक और मामला प्रकाश में आ गया है। गौतम अडानी के मालिकाना हक वाली यह कंपनी

राजस्थान में 9 हजार 700 मेगावाट के सोलर हाईब्रिड और विंड एनर्जी पार्क विकसित करेगी। लेकिन सरकार की जो मौजूदा शर्तें

हैं, उनसे गौतम अडानी को फायदा नहीं होगा। चूंकि नरेन्द्र मोदी की तरह अशोक गहलोत से भी गौतम अडानी के रिश्ते हैं,

इसलिए सीएम गहलोत ने मुख्य सचिव को सीधे निर्देश दिए। सीएम का इशारा मिलते ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एम्पावर्ड

कमेटी ने अडानी कंपनी को रियासत देने वाले निर्णय कर लिए। राहुल गांधी को आश्चर्य होगा कि गहलोत के इशारों पर डांस करने

वाले मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने निर्णय लिया है कि भूमि सुरक्षा का जो शुल्क पांच लाख रुपए प्रति मेगावाट है, उसे

मात्र एक लाख रुपए कर दिया जाए। एक एक निर्णय से अडानी को 485 करोड़ रुपए के बजए मात्र 97 करोड़ रुपए ही जमा

करवाने होंगे। इतना ही नहीं 46 हजार करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में उपकरणों की जो खरीद करेगी उस पर देय जीएसटी की 75

प्रतिशत राशि की भरपाई राज्य सरकार करेगी। यदि अडानी कंपनी अपने इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरी कंपनी को हरतांतरित

करती है तो लीज शुल्क भी 150 प्रतिशत के बजाए 100 प्रतिशत ही लगेगी। मुख्य सचिव की अध्यक्ष वाली इस एम्पावर्ड कमेटी की

सिफ़ारिशें पर अब अशोक गहलोत की केबिनेट फैसला लेगी। यह माना कि राहुल गांधी, मोदी केबिनेट में दखल नहीं रखते हैं,

लेकिन गहलोत केबिनेट को वो दिशा निर्देश दे ही सकते हैं। राहुल गांधी ने अब अपने सबसे भरोसेमंद अजय माकन को राजस्थान

का प्रभारी महासचिव बना दिया है। अविनाश पांडे के प्रभारी महासचिव रहने पर आरोप लगाया था कि गहलोत सरकार की

कांग्रेस हाई कमान (राहुल गांधी) को नहीं देते हैं। लेकिन अब जब माकन प्रभारी है तो उम्मीद की जानी चाहिए थी कि मुख्य सचिव

की अध्यक्षता वाली कमेटी के निर्णय की जानकारी राहुल गांधी तक पहुंच जाएगी। जानकारी मिलने के बाद राहुल गांधी कभी नहीं

चाहेंगे कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार गौतम अडानी को फायदा पहुंचाए। यदि फिर भी गहलो मंत्रिमंडल अडानी को फायदा

पहुंचाने वाले फैसलों पर मुहर लगाता है तो यही माना जाएगा कि मोदी के अडानी और गहलोत के अडानी में कोई अंतर नहीं है।

फिर राहुल गांधी को अडानी को लेकर मोदी की आलोचना करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यदि गौतम अडानी की सांठ-

गांठ नरेन्द्र मोदी से है तो अशोक गहलोत से भी होगी। राहुल गांधी अडानी को लेकर दोहरा चरित्र नहीं दिखा सकते।

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