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मोदी सरकार की साख दांव पर ,सरकार प्राइवेट बैंकों की मनमर्जी रोकने वाली नीति क्यों नहीं बनाती।

मोदी सरकार की साख दांव पर ,सरकार प्राइवेट बैंकों की मनमर्जी रोकने वाली नीति क्यों नहीं बनाती।
====राजकुमार अग्रवाल ===

 

दिवालिया यस बैंक(YES BANK) के मालिक राणा कपूर को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया है। कपूर की यह गिरफ्तारी डीएचएफएल (DHFL)और यूपी पावर कॉरपोरेशन को गलत तरीके से दिए गए लोन को लेकर हुई है। सरकार की एजेंसियां डंडे से तब लकीर पीट रही है, जब सांप निकल गया है। यस बैक कोई छोटा मोटा संस्थान नहीं था। देश के चौथे नम्बर का बैंक था। स्वाभाविक है कि सरकार के संरक्षण के बगैर मात्र 10-15 वर्षों में यस बैंक देश में चौथे नम्बर का बैंक नहीं बन सकता। आज भी लोगों का भरोसा राष्ट्रीकृत बैंकों पर है, लेकिन यस बैंक जैसे संस्था जब सरकारी विभागों का पैसा जमा करने लगाते हैं तब आम ग्राहक भी आकर्षित हो जाता है।

सरकारी और अद्र्ध सरकारी या राजकीय उपक्रमों के खाते यस बैंक जैसी प्राइवेट बैंक में खुलते हैं, तब आम ग्राहक भी अपनी राशि इन्हीं बैंकों में जमा करवा देता है। सब जानते हैं कि राणा कपूर जैसे लोग सरकार में बैठे नेताओं और अधिकारियों को किस प्रकार पटाते हैं। यही वजह होती है जब कई लाख करोड़ रुपया जमा हो जाता है, तब यस बैंक जैसे संस्थान अपनी मनमर्जी से लोन देते हैं। यस बैंक में लोगों का दो लाख हजार करोड़ रुपए जमा है, लेकिन बैंक ने एक लाख हजार करोड़ रुपया लोन के तौर पर ऐसे संस्थानों को दे दिया, जिनसे अब वसूली होना मुश्किल हैं। राणा कपूर ने 6 हजार करोड़ रुपए तो अपनी पत्नी को ही दे दिए। सवाल उठता है कि प्राइवेट बैंकों की मनमानी को रोकने की नीति क्यों नहीं बनाई जाती? पिछले 6 वर्ष से देश में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार चल रही है, इसलिए यस बैंक के घोटाले को पिछली सरकारों का नहीं माना जा सकता।

 

 

देश में पहले ही आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है, ऐसे में यस बैंक के दिवालिया होने से मोदी सरकार की प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जमाकर्ताओं को घबराने की जरुरत नहीं है, लेकिन साथ ही पचास हजार से ज्यादा की निकासी पर रोक लगा दी है। ग्राहक का पचास हजार रुपए से ज्यादा जमा है, वह घबराएगा ही। यस बैंक के हर ग्राहक को अपने पैसे डूबने का डर सता रहा है। देशभर में यस बैंक के 29 लाख ग्राहक है। किसी भी प्राइवेट बैंक को जब लाइसेंस दिया जाता है, तब आरबीआई गारंटी भी देता है। आरबीआई के लाइसेंस के बाद ग्राहक भी संबंधित बैंक पर भरोसा करते हैं। अब यदि ग्राहकों का पैसा डूब जाए तो फिर आरबीआई के लाइसेंस का क्या मतलब है? क्या आरबीआई और सरकार में बैठे लोग सिर्फ लूटने का लाइसेंस देते हैं? यदि यस बैंक जैसे वित्तीय संस्थानों पर नियंत्रण नहीं रखा जा सकता तो फिर लाइसेंस क्यों दिया जाता है? सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिसमें ग्राहकों का पैसा हर हाल में सुरक्षित रहे।

 

 

आम लोगों से पैसा एकत्रित कर अपनी मनमर्जी से लोन बांटने का अधिकार प्राइवेट बैंक के पास नहीं होना चाहिए। यदि कोई बैंक मालिक अपनी मर्जी से लोन बांटता है तो उसे अपनी राशि में से लोन देना चाहिए। गलत लोगों को लोन देने के बाद यदि कोई बैंक डूबता है तो फिर जमाकर्ता का क्या दोष है? क्या कोई बैंक मालिक जमाकर्ता की सलाह पर अनिल अंबानी जैसे दिवालिया व्यक्ति को लोन देता है? यदि जमाकर्ता को यह पता हो कि उनकी राशि में से ही अनिल अंबानी को उधार दिया जा रहा है तो कभी भी यस बैंक में पैसा जमा नहीं करवाएगा। चूंकि यस बैंक में राणाकपूर का अपना कोई निवेश नहीं था, इसलिए अनिल अंबानी, जेट एयरवेज जैसे दिवालिया संस्थानों को करोड़ों रुपए का लोन दे दिया। यस बैंक के प्रकरण में सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती है। सरकार यह कह सकती है कि राणा कपूर को विदेश भागने का अवसर नहीं दिया, लेकिन क्या इससे निवेशकों का पैसा वापस मिल जाएगा? यदि यस बैंक के सभी जमाकर्ताओं का पैसा सुरक्षित रहता है तो फिर सरकार की साख में भी वृद्धि होगी, क्योंकि एक ओर जमाकर्ता का पैसा सुरक्षित है तो दूसरी ओर राणा कपूर सलाखों के पीछे खड़ा है।

 


प्रियंका गांधी ने बेची दो करोड़ रुपए की पेंटिंग:
यश बैंक के मालिक राणा कपूर की गिरफ्तारी के बाद पता चला है कि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी ने दो करोड़ रुपए की पेंटिंग राणा कपूर बेची है। पूर्व में जब प्रियंका गांधी ने शिमला में बंगला खरीदा था, तब आयकर विभाग को जो जानकारी दी उससे पता चला कि प्रियंका गांधी को दो करोड़ रुपए की आय यस बैंक के मालिक राणा कपूर से हुई है। असल में राणा कपूर ने पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की पेंटिंग प्रियंका गांधी से खरीदी थी। 8 मार्च को ही केन्द्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा है कि यस बैंक की आर्थिक स्थिति को बिगाडऩे में कांग्रेस का ही हाथ रहा है। यूपीए की सरकार के समय जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री और पी चिदम्बरम वित्त मंत्री थी, तब ही यस बैंक ने ऐसी संस्थाओं और व्यक्तियों को लोन दिया जिनकी वजह से बैंक को आर्थिक संकट में आना पड़ा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति के लिए यूपीए सरकार जिम्मेदार है।

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