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मोदी सरकार कोरोना को बहाना बनाकर अब तक इसने किसान विरोधी 3 अध्यादेश और नया बिजली बिल पेश किया है: राजेंद्र आर्य

मोदी सरकार कोरोना को बहाना बनाकर अब तक इसने किसान विरोधी 3 अध्यादेश और नया बिजली बिल

पेश किया है: राजेंद्र आर्य

 

कैथल (अटल हिन्द ब्यूरो )

 एआईकेएससीसी वर्किंग ग्रुप ने 9 अगस्त को 3 अध्यादेशों, नए बिजली बिल और डीजल-पेट्रोल के दाम में वृद्धि

के खिलाफ किसानों का देशव्यापी अनिश्चित संघर्ष शुरु किया था। मोदी सरकार की ओर से हरियाणा की खट्टर

सरकार द्वारा किये गये दमन पर देशव्यापी सलाह-मशविरा करने के बाद एआईकेएससीसी ने सरकार को

चेतावनी दी है कि या तो वह इन सभी किसान विरोधी कदमों को वापस ले या किसानों के गुस्से का सामना

करे। हरियाणा की भाजपा सरकार ने पीपली, कुरुक्षेत्र व 7 केन्द्रों पर किसान नेताओं को चेतावनी देते हुए

हाउस अरेस्ट कर लिया था, पर इस बर्बर दमन के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूटकर सामने आ गया।

 

एआईकेएससीसी का नेतृत्व 14 सितम्बर को इस विरोध कार्यक्रम को जारी रखते हुए दिल्ली में संसद के सामने

विरोध आयोजित करेगा, जबकि करोड़ों की संख्या में किसान जिलों व तहसील मुख्यालयों को घेरेंगे। देश के

किसान विदेशी शोषकों की सेवा के लिए किसानों के साथ धोखाधड़ी करने, आत्मनिर्भरता का नारा देकर

विदेशी कम्पनियों व भारतीय कारपोरेट को किसानों को लूटने के निमन्त्रण देने के आरएसएस के नजरियों के

विरुद्ध हैं।

ये तीनो अध्यादेश संसद के इस सत्र में कानून में बदले जाएंगे। आवश्यक वस्तुओं का अध्यादेश, अनाज, दलहन,

तिलहन, आलू, प्याज को व्यापार प्रतिबंधों व कीमत नियंत्रण से मुक्त करता है। दूसरा मंडी समितियों का

अध्यादेश कम्पनियों, ठेकेदारों व सूदखोरों द्वारा किसानों से सीधी खरीद करने की असीमित अनुमति देता है।

तीसरा किसानों को कारपोरेट के साथ अनुबंधों में बांध कर उन्हें मंहगी लागत खरीदने और कम्पनी के नाम

अपनी सारी फसल को बंधक रखने के लिए बाध्य करता है, जिसमें उनके साथ धोखाधड़ी व हेराफेरी के

खिलाफ सारी सरकारी सुरक्षा समाप्त हो जाएगी। ये कारपोरेट किसानों से सस्ते दाम पर फसल खरीदेंगे और

उसे मंहगे रेट पर उपभोक्ता को बेचेंगे। ये अध्यादेश संकटग्रस्त बड़े कारपोरेट को मदद देने के लिए बुलाए गये

हैं, ताकि ये उस एकमात्र क्षेत्र को निचोड़ सकें, जो मोदी सरकार के अनुसार सन् 2020-21 की पहली तिमाही में

3.4 फीसदी की वृद्धि की है।

मोदी सरकार का बिजली कानून, सभी लोगों के लिए बिजली दर 10 रुपये यूनिट से ज्यादा कर देगा,

उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी के लिए प्रीपेड मीटर लगा देगा और गरीबी रेखा के नीचे, घरेलू व किसान

उपभोक्ताओं की छूट समाप्त कर देगा।

मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के 6 वर्षों में डीजल व पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 28 व 24 रुपये लीटर से

बढ़ाई है। आज उपभोक्ता 1 लीटर पर 52 रुपये का टैक्स देते हैं, जबकि कच्चे तेल के दाम 106 रुपये से घट कर

40 रुपये पर आ गये।

इस बीच एआईकेएससीसी ने सभी सांसदों व पार्टियों को लिखकर निवेदन किया है कि वे इन किसान विरोधी

कदमों को वापस कराएं।

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