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यानि पुलिस का डंडा सिर्फ कमजोर व्यक्ति के लिए है  

यानि पुलिस का डंडा सिर्फ कमजोर व्यक्ति के लिए है

मौत से भी नहीं डरते अजमेर के कांग्रेसी।

प्रभारी महासचिव अजय माकन के आगमन पर सैकड़ों कार्यकर्ता जुटे।

कोरोना संक्रमण की वजह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वयं को एक माह के लिए क्वारंटीन किया, लेकिन

कमजोर और गरीब से कोरोना काल में जुर्माना वसूलने वाला प्रशासन आंखों पर पट्टी बांधकर बैठा रहा।

पुलिस तो मंत्रियों की मिजाजपुर्सी में लगी रही।

अजमेर ===अटल हिन्द ब्यूरो =========

कोरोना संक्रमण की वजह से अजमेर में 9 सितम्बर को भी मरीजों के मरने का सिलसिला जारी रहा। 8

सितम्बर को एक ही दिन में अजमेर में 11 पॉजिटिव मरीजों की मौत हो गई। रोजाना दो सौ से भी ज्यादा लोग

कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। जिले के हर गली मोहल्ले में कोरोना फैल रहा है। यही स्थिति प्रदेशभर की है।

कोरोना की भयावह स्थिति को देखते हुए ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वयं को एक माह के लिए क्वारंटीन

कर लिया है। सीएम को लगता है कि किसी के सम्पर्क में आने से वे स्वयं संक्रमित हो जाएंगे, लेकिन ऐसा लगता

है कि अजमेर के कांग्रेसियों को मौत का भी डर नहीं है। 9 सितम्बर को जब कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी महासचिव

अजय माकन आए तो स्वागत करने में अजमेर के कांग्रेसियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। सीएम गहलोत और पूर्व

डिप्टी सीएम सचिन पायलट के समर्थकों ने ने ताकत दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। माकन जयपुर से सड़क

मार्ग से अजमेर तक आए। पूरे रास्ते कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। अजमेर जिले की सीमा से ही

कांग्रेसियों ने माकन को पलकों पर बैठा लिया। गंभीर बात तो यह रही कि कार्यकर्ताओं की भीड़ का हिस्सा

चिकित्सामंत्री रघु शर्मा, शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, खान मंत्री प्रमोद जैन आदि बड़े नेता भी बने। रघु

शर्मा चिकित्सा मंत्री की हैसियत से रोजाना टीवी चैनलों पर सोशल डिस्टेसिंग के प्रवचन देते हैं, लेकिन 9

सितम्बर को रघु शर्मा ने स्वयं कोविड-19 के नियमों की धज्जियां उड़ाई। सवाल उठता है कि जब चिकित्सा मंत्री

स्वयं नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं तो फिर आम लेागों से क्या उम्मीद की जा सकती है?

मौत से नहीं डरने वाले कांग्रेसियों ने मुंह पर मास्क तो लगाया ही नहीं, बल्कि एक दूसरे से सटकर खड़े रहे।

कार्यकर्ताओं ने जब अपने अपने नेता के समर्थन में नारे लगाए, तब उनके मुंह से थूक भी उछल रहा था। सैकड़ों

कार्यकर्ताओं के एककित्रत होने के बाद की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल उठता है कि अजय

माकन के दौरे के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ता संक्रमित होंगे, तब कौन जिम्मेदार होगा? खुद अजय माकन ने

जयपुर, अजमेर के बीच मालाएं और साफे पहने हैं। खतरा तो अब अजय माकन को भी हो गया है। अजमेर के

कई कांग्रेसी नेता इन दिनों जयपुर के अस्पतालों में भर्ती है या फिर भर्ती रहे हैं। पूर्व मेयर कमल बाकोलिया ने

भी 9 सितम्बर को अजय माकन से मुलाकात की, जबकि बाकोलिया ने भी हाल ही में जयपुर के एक निजी

अस्पताल में अपना इलाज करवाया है।

आम लोगों पर जुर्माना क्यों?:

प्रतिदिन सरकारी प्रेस नोट में जिला कलेक्टर के हवाले से बताया जाता है कि अजमेर में सोशल डिस्टेसिंग की

पालना नहीं करने वालों से कितनी राशि वसूली गई। कलेक्टर के इस बयान के पीछे आम लोगों को सोशल

डिस्टेसिंग के प्रति जागरुक करना होता है। लेकिन 9 सितम्बर को अजय माकन के स्वागत के अवसर पर

प्रशासन के अधिकारियों ने आंखों पर पट्टी बांध ली। कांग्रेस के किसी भी कार्यकर्ता से जुर्माना नहीं वसूला गया।

जो पुलिस मुंह पर मास्क नहीं लगाने वालों से जुर्माना वसूलती है उसी पुलिस के बड़े बड़े अधिकारी सरकार के

मंत्रियों की मिजाजपुर्सी में लगे रहे। देखा जाए तो पुलिस के अधिकारी कोरोना फैलाने वालों की मिजाजपुर्सी में

लगे रहे। यानि पुलिस का डंडा सिर्फ कमजोर व्यक्ति के लिए है। असल में सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं और

सरकार के मंत्रियों की सिफारिश से ही अधिकारियों की पोस्टिंग होती है, इसलिए ऐसे अधिकारी आंखों पर पट्टी

बांधे रहते हैं। 9 सितम्बर के स्वागत सत्कार के बाद अब अजमेर के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के

चिकित्सको को अधिक मरीजों का इलाज करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

संवाद वाले हॉल में नियमों की पालना:

अजय माकन ने अजमेर के होटल मेड़वा एस्टेट में नेताओं की राय जानी। होटल के वातानुकूलित हॉल में दो गज

की दूरी के हिसाब से कुर्सियां लगाई गई। यानि संवाद के समय सोशल डिस्टेसिंग के नियमों की पालना की गई।

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