राजस्थान की 70 सालों की राजनीति  में  मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच  तकरार ,राष्ट्रपति से लगाएंगे गुहार

राजस्थान की 70 सालों की राजनीति  में  मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच  तकरार ,राष्ट्रपति से लगाएंगे गुहार

विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का गहलोत सरकार का प्रस्ताव राज्यपाल ने तीसरी बार ठुकराया।
सीएम अशोक गहलोत अब राष्ट्रपति से गुहार लगाएंगे। ऐसा 70 सालों में नहीं हुआ।
===अटल हिन्द ब्यूरो =========
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने एक बार फिर राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की। गहलोत को यह मुलाकात इसलिए करनी पड़ी, क्योंकि राज्यपाल ने सरकार के विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को तीसरी बार ठुकरा दिया। राज्यपाल ने तीसरी बार लौटाए गए प्रस्ताव के साथ अपने पत्र में जानना चाहा है कि जब राजस्थान में कोरोना पॉजिटिव केस के आंकड़े 39 हजार पार कर गए हैं, अब विधानसभा का विशेषसत्र क्यों बुलाया जा रहा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि पूर्व में जिन मुद्दों को राजभवन में उठाया उनके जवाब सरकार की ओर से नहीं दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि दूसरी बार के पत्र में राज्यपाल ने यह भी जानना चाहता था कि क्या सरकार विधासभा में शक्ति परीक्षण भी करेगी। असल में तीनों ही प्रस्तावों में सरकार ने यह नहीं लिखा कि विशेष सत्र में शक्ति परीक्षण भी करवाया जाएगा। यह बात अलग है कि मुख्यमंत्री गहलोत मीडिया से बार बार शक्ति परीक्षण की बात कह रहे हैं। जानकार सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने जो बगावत को दौर चल रहा है, उसमें सरकार चाहती है कि विधानसभा में किसी प्रस्ताव पर मतविभाजन करवाकर सचिन पायलट सहित 19 विधायकों को दल बदल कानून के दायरे में लाकर अयोग्य घोषित करवा दिया जाए। यही वजह है कि सरकार और राज्यपाल के बीच पिछले 10 दिनों से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।
अब राष्ट्रपति से लगाएंगे गुहार:
प्राप्त जानकारी के अनुसार सीएम अशोक गहलोत अब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से गुहार लगाएंगे। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल पर जितना दबाव डाला जा सकता था उतना सरकार की ओर से डाला गया है। पांच घंटे तक राजभवन के अंदर धरना प्रदर्शन भी किया गया। खुद सीएम गहलोत ने राज्यपाल कलराज मिश्र पर तीखे हमले किए वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासिचव अविनाश पांडे ने तो राज्यपाल को मानसिक बीमार तक कह दिया। लेकिन राज्यपाल मिश्र पर धरने प्रदर्शन को लेकर जुबानी हमले तक का कोई असर नहीं हुआ है। राज्यपाल ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनके सवालों के जवाब संतोषजनक तरीके से नहीं दिए जाएंगे, तब तक सत्र बुलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। तीसरी बार प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद अब सरकार और राजभवन के बीच टकराव और बढ़ गया है। जानकार सूत्रों के अनुसार प्रदेश में घट रही घटनाओं की जानकारी राज्यपाल मिश्र लगातार केन्द्र सरकार को भेज रहे हैं।

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