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राजस्थान सरकार में चल रहा है गोलमाल आरोपों से घिरे अफसरों को आईएएस बनवाने का प्रयास,  मोदी सरकार से होगी शिकायत।

 

राजस्थान सरकार में चल रहा है गोलमाल आरोपों से घिरे अफसरों को आईएएस बनवाने का प्रयास,  मोदी सरकार से होगी शिकायत।

जयपुर (अटल हिन्द ब्यूरो )

यूं तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की छवि गांधीवादी और ईमानदार राजनेता की मानी जाती है। अपनी इसी छवि की दुहाई देकर गहलोत आए दिन नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं। केन्द्र सरकार के चुनावी बांड को लेकर गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के विरुद्ध अभियान छेड़ रखा है। लेकिन अब राज्य की अन्य सेवाओं के अधिकारियों के आईएएस में चयन को लेकर गहलोत की छवि पर चौतरफा हमला हो रहा है। यहां तक राज्य प्रशासनिक सेवा के ईमानदार और मेहनती अधिकारियों ने भी नाराजगी जताई है। अनेक आरएएस का कहना है कि अन्य सेवा से आईएएस बनाने के लिए ऐसे अधिकारियों का चयन किया गया है, जिन पर अपने ही विभाग में आरोप लगे हैें। एक ओर नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार दागी आईएएस आईपीएस, राजस्व सेवा खास कर आयकर  के अधिकारियों को जबरन सेवा निवृत्ति दे रही है तो दूसरी ओर गहलोत सरकार आईएएस के लिए ऐसे अधिकारियों का चयन किया है, जिनके विरुद्ध एसीबी में जांच विचाराधीन है। कई अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच भी चल रही है। आमतौर पर राज्य सेवा के अधिकारियों को आईएएस बनाने से पहले सभी कसौटियों पर परखा जाता है, लेकिन इसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राजनीतिक मजबूरी ही कहा जाएगा कि आईएएस बनने वालों में राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री  ममता भूपेश के पति डॉ. घनश्याम का नाम भी शामिल है। डॉ. घनश्याम चिकित्सा एवं स्वास्थ सेवा से है। हालांकि विभाग में दो अधिकारी डॉ. घनश्याम से वरिष्ठ हैं तथा उनका सर्विस रिकॉर्ड भी बराबर है, लेकिन वरिष्ठता की अनदेखी कर डॉ. घनश्याम का नाम विभागीय स्क्रिनिंग कमेटी ने तय कर दिया। आईएएस का पद प्रशासनिक सेवा में बहुत महत्वपूर्ण होता है। लेकिन अन्य सेवा से ऐसे अधिकारियों के नाम चयन किया गया है, जिन्हें कभी कभी भी प्रशासनिक सेवा का अनुभव नहीं रहा। जबकि राज्य सेवा प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की उपेक्षा की जा रही है। चूंकि अन्य सेवा के कोई नियम नहीं है, इसलिए 17 वर्ष की सेवा के बाद आईएएस में पदौन्नति के योग्य मान लिया जाता है, जबकि आरएएस के 28 वर्ष की सेवा के बाद आईएएस में पदौन्नति के लिए पात्र होता है। आरएएस के पास राजस्व से लेकर प्रशासनिक सेवा तक का अनुभव होता है, जबकि अन्य सेवा में नागरिक सुरक्षा से जुड़े अधिकारी भी आईएएस बन रहे हैं।
आरएएस एसोसिएशसन का भी विरोध:
आरएएस एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष शाहीन अली ने भी अन्य सेवा की अधिकारियों की चयन प्रक्रिया पर ऐतराज जताया है। अली ने कहा कि अन्य सेवा से अधिकारियों का चयन विशेष परिस्थितियों में ही करने का प्रावधान है। पूर्व में कोई विशेष परिस्थितियों रही होगी, लेकिन मौजूदा समय में विशेष परिस्थितियां नहीं है। जब राज्य प्रशासनिक सेवा के योग्य और अनुभवी अधिकारी मौजूद हैं तो अन्य सेवा से आईएएस के लिए अधिकारियों को क्यों लिया जा रहा है? अन्य सेवा के अधिकारी आईएएस बनने की पात्रता भी नहीं रखते हैं। शाहीन अली ने गत वर्ष की बकाया भर्ती को भी इस वर्ष समायोजित करने पर एतराज जताया है। यदि गत वर्ष किन्हीं कारणों से अन्य सेवा से अधिकारियों को नहीं लिया गया तो इस बार गत के बकाया को नहीं लिया जाना चाहिए। राज्य सरकार इस बार अन्य सेवा से आईएएस के लिए पदों पर भर्ती करने जा रही है। जबकि सरकार को निर्धारित कोटे के अनुरूप मात्र दो पदों के लिए ही नाम प्रस्तावित करने चाहिए थे।
इन अधिकारियों के भेजे हैं नाम:
अन्य सेवा से चार को आईएएस बनाने के लिए राज्य सरकार ने करीब 20 अधिकारियों के नाम केन्द्र सरकार को भेजे हैं। इन नामों पर 31 दिसम्बर को केन्द्र सरकार के कार्मिक विभाग और यूपीएससी के सदस्यों के मध्य विचार विमर्श होगा। जानकारों की माने तो नाराज आरएएस अधिकारियों ने राजस्थान से जुड़े लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेन्द्र यादव आदि से सम्पर्क साधा है। ये अधिकारी राज्य सरकार की दोषपूर्ण चयन प्रक्रिया के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय को भी अवगत करवाएंगे।
अरविंद कुमार जैन:
जैन पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर हैं, विभाग के अधिकारियों ने जैन सहित चार इंजीनियरों के नाम स्क्रिनिंग कमेटी को भिजवाए गए थे। लेकिन विभागीय कमेटी ने जैन के नाम का ही चयन किया जबकि जैन के कथित कमिशन मांगने के मामले में सीबीआई ने राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। इस जानकारी को आज तक भी नहीं भिजवाया गया है।
सुभाष आर्य:
राजस्थान सिविल इंजीनियरिंग सेवा के सुभाष आर्य के साथ साथ विभाग के संगीत कुमार का नाम भी स्क्रिनिंग कमेटी को भिजवाया गया था। संगीत कुमार की छह वर्ष की एसीआर आउट स्टेंडिंग है। जबकि आर्य की चार वर्ष की एसीआर आउट स्टेंडिंग है। वरिष्ठ होने के बाद भी आर्य का चयन हुआ है।
विजेन्द्र सिंह:
विजेन्द्र सिंह को नागरिक गृह रक्षा विभाग का अधिकारी माना गया है। जानकार सूत्रों के अनुसार सिंह की सेना में पांच वर्ष की सेवा ही रही है, लेकिन उन्हें मात्र साक्षातकार के आधार पर कमानडेंट बना दिया गया। यानि अधिकारी बनने के लिए विजेन्द्र सिंह ने कोई लिखित परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की। विजेन्द्र सिंह को पूर्व मंत्री का दामाद भी बताया जा रहा है। आईएएस की चयन प्रक्रिया में शामिल करने को लेकर हस्यासपद बताया जा रहा है।
डॉ. महेन्द्र खडग़ावत:
राजस्थान अभिलेखागार सेवा के खडग़ावत के विरुद्ध एसीबी में मुकदमा दर्ज बताया जा रहा है। इस संबंध में तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव निहालचंद गोयल ने भी खडग़ावत के विरुद्ध दस्तावेज उपलब्ध करवाने के लिए पत्र लिखा था। चयन के समय राजस्थान लोकसेवा आयोग में प्रस्तुत प्रमाण पत्रों की जांच की मांग भी कई बार की गई है।
मुकेश माहेश्वरी:
पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास के अधीक्षण अभियन्ता के रूप में कार्यरत माहेश्वरी पर भी नियम विरुद्ध पदोन्नति पाने के आरोप हैं। इस संबंध में हाईकोर्ट ने भी दखल दिया है।
शरद मेहरा:
राजस्थान लेखा सेवा के अधिकारी शरद मेहरा पूर्व में तत्कालीन राष्ट्रपति  प्रतिभा देवी पाटिल के विशेषाधिकारी भी रहे हैं। लेखा सेवा के पांच अधिकारियों के नाम स्क्रिनिंग कमेटी को भिजवाए गए थे, कमेटी ने वरिष्ठ एवं समान एसीआर वाले अधिकारियों की उपेक्षा कर मेहरा का नाम आईएएस के लिए प्रस्ताव किया है।
हेम पुष्पा शर्मा:
राजस्थान लेखा सेवा से पांच अधिकारियों के नाम स्क्रिनिंग कमेटी को प्रेषित किए गए थे, लेकिन वरिष्ठता और आउटस्टेंङ्क्षडग एसीआर वाले अधिकारियों की उपेक्षा कर श्रीमती शर्मा का चयन किया गया। बताया जा रहा है कि श्रीमती शर्मा के भाई इन दिनों मुख्यमंत्री के सलाहकार के पद पर नियुक्त है।
हरदेश कुमार जुनेजा:
राजस्थान लेखा सेवा के अधिकारी जुनेजा के मामले में भी यही कहा जा रहा है कि वरिष्ठता के उपेक्षा की गई है। आउटस्टेंडिंग एसीआर वाले अधिकारियों के नामों को दरकिनार किया गया है।
केसर सिंह:
राजस्थान कृषि सेवा के अधिकारी केसर सिंह अपने ही विभाग के यशपाल महावत व गोपाल लाल से जूनियर हैं। लेकिन इसके बाद भी स्क्रिनिंग कमेटी ने चयन किया। इसी प्रकार कृषि विभाग के ही अधिकारी राशीद खान की चयन प्रक्रिया को विवादित बताया जा रहा है।

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