राज्यसभा चुनाव से हरियाणा भाजपाइयों में असंतोष

राज्यसभा चुनाव से हरियाणा भाजपाइयों में असंतोष
-atalhind-
राज्यसभा चुनाव आज संपन्न हुए। जिन तीन उम्मीदवारों ने नामांकन भरा था, वे तीनों ही निर्विरोध चुने गए जैसा कि पहले भी विदित था परंतु जहां कांग्रेस में खुशी का माहौल है, वहीं भाजपा नेताओं में दबा-छुपा आक्रोश भी दिखाई दे रहा है या यूं कह सकते हैं कि असंतोष तो पूरा है।
भाजपा के एक सदस्य तो रामचंद्र जांगड़ा हैं, जो पहले ही पिछड़ा वर्ग के चेयरमैन हैं और राज्यसभा पद पर भाजपा के अनेक दिग्गज आंखें गढ़ाए बैठे थे। बुधवार को कुछ पुराने भाजपाइयों से बात हुई तो भाजपा नेताओं ने कोई भी बात कहनी हो तो वे यह कह ही देते हैं कि हम तो मन की बात कह रहे हैं, हमारा नाम कहीं नहीं आना चाहिए तो उनका कहना था कि जिस स्तर के नेता जांगड़ा जी हैं, उस स्तर के तो हर जिले में 10-10 मिल जाएंगे। पता नहीं, कौन से पैमाने से इनका नाम तय किया गया है।
दूसरी ओर दूसरे उम्मीदवार दुष्यंत कुमार गौतम उनके बारे में भी कहने को तो सब भाजपाई उन्हें बधाई देंगे, क्योंकि उनकी नजदीकी प्रधानमंत्री से बताई जाती है परंतु वास्तव में लगभग सबके दिल दुखी हैं। उनका कहना है कि हरियाणा में दो करोड़ की आबादी में 30-40 करोड़ हमारे सदस्य भी हैं, उनमें से क्या कोई भी हरियाणवी इस योग्य नहीं था जो राज्यसभा में हमारा प्रतिनिधित्व कर सके। भाजपा का होता, संघ का होता, पिछड़ा होता, जाट होता, पंजाबी होता, ब्राह्मण होतार, गुर्जर होता मतलब कोई भी होता, होता तो हरियाणवी। एक तरह से तो हरियाणवी भाजपा कार्यकर्ताओं के ऊपर जुल्म हुआ है।
एक ओर कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि अभी सैक्टर 4 में हरियाणा के प्रभारी अनिल जैन आए थे तो उन्होंने कहा था कि भाजपा तीन सीटों के लिए तैयारी कर रही है। इसके अतिरिक्त भी अनेक भाजपाई दिग्गजों का यह भी कहना था कि हरियाणा में भाजपा तीन सीटों की तैयारी कर रही है लेकिन भाजपा ने तीसरा तो नाम ही घोषित नहीं किया और बड़े भरोसे से कांग्रेस के दिपेंद्र हुड्डा विजयी हो गए। अब विचारों का क्या है, किसी के दिमाग में कुछ भी आ जाए तो किसी ने यह भी कहा कि यह भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। दुष्यंत चौटाला को कमजोर करना है, इसलिए दिपेंद्र को जीतना ही चाहिए था। अब सच्चाई क्या है यह तो भाजपा के दिग्गज जानें या भाजपा के कार्यकर्ता जानें लेकिन हमने जो महसूस किया वह यह है कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ताओं में इस चुनाव से कोई उत्साह या खुशी का माहौल दिखाई नहीं दे रहा।

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