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देखिये कब-कब देश में रातों-रात बदल गयी सत्ता,रातोरात बाजी पलटने में उस्ताद हैं मोदी-शाह, 5 बार चौंक चुका है देश!

रातोरात बाजी पलटने में उस्ताद हैं मोदी-शाह, 5 बार चौंक चुका है देश! देखिये कब-कब देश में रातों-रात बदल गयी सत्ता

नयी दिल्ली 24 नवंबर 2019।

महाराष्ट्र की राजनीति में वैसे तो विधानसभा चुनाव के बाद से ही हर रोज नया ट्विस्ट देखने को मिल रहा था. लेकिन 23 नवंबर की सुबह ऐसी खबर आई जिसने सबको हैरान कर दिया. NCP के अजित पवार की मदद से बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस एक बार फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन चुके थे. पूरी सियासी तस्वीर एक रात में पलट गई. लेकिन इतिहास कहता है कि बीजेपी और मोदी सरकार के लिए यह कोई नई बात नहीं है. पिछले 5 वर्षों के तमाम बड़े फैसलों और राजनीतिक उलटफेर को देखें तो साफ हो जाता है कि आधी रात को बाजी पलटने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह माहिर हैं.

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महाराष्ट्र में एक ही रात में बदल गयी सरकार
महाराष्ट्र में जिस अंदाज में सरकार रातों रात बनी, उसे देख पूरा देश हैरान रहा। 22 नवंबर की रात 9 बजे तक उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाता रहा। एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस मिलकर 23 नवंबर को राज्यपाल के सामने दावा पेश करने की बात कहती रही, लेकिन उसी रात महाराष्ट्र में बेहद चमत्कारिक अंदाज में रातोंरात राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला लिया गया और सुबह देवेंद्र फड़णवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। महाराष्ट्र की राजनीति में वैसे तो विधानसभा चुनाव के बाद से ही हर रोज नया ट्विस्ट देखने को मिल रहा था. लेकिन 23 नवंबर की सुबह ऐसी खबर आई जिसने सबको हैरान कर दिया. NCP के अजित पवार की मदद से बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस एक बार फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन चुके थे. पूरी सियासी तस्वीर एक रात में पलट गई. लेकिन इतिहास कहता है कि बीजेपी और मोदी सरकार के लिए यह कोई नई बात नहीं है. पिछले 5 वर्षों के तमाम बड़े फैसलों और राजनीतिक उलटफेर को देखें तो साफ हो जाता है कि आधी रात को बाजी पलटने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह माहिर हैं.

 

मणिपुर में एक रात में बन गई BJP सरकार
मणिपुर में भी साल 2017 में विधानसभा चुनाव हुए. 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में कांग्रेस के 28 विधायक जीते. बीजेपी के 21 विधायक जीतकर पहुंचे. आंकड़े देखकर यही लग रहा था कि सूबे में कांग्रेस की सरकार बनेगी. लेकिन अचानक एक रात में तस्वीर बदल गई और पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में पहली बार बीजेपी की सरकार बन गई. नागा पीपुल्स फ्रंट ने 4, नेशनल पीपुल्स पार्टी ने 4, लोक जनशक्ति पार्टी ने 1, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने 1 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी. यहां भी बीजेपी ने दूसरी पार्टियों से गठबंधन करके सरकार बनाई और पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी एन बीरेन सिंह को यहां का मुख्यमंत्री बनाया गया.

 

एक दिन के यूपी सीएम-जगदंबिका पाल
1998 में भी उत्तर प्रदेश की सियासत में ऐसा ही एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला था, जब सिर्फ एक दिन के लिए जगदंबिका पाल को सीएम बनाया गया था. लेकिन अगले ही दिन उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. 21-22 फरवरी, 1998 की रात उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रोमेश भंडारी ने राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की, लेकिन केंद्र ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. बीजेपी के मुख्‍यमंत्री कल्‍याण सिंह ने बाहरी विधायकों को साथ लेकर सरकार बनाई जिसका विपक्ष ने विरोध किया. गवर्नर भंडारी ने भी इस सरकार पर ऐतराज जताया और सरकार को बर्खास्‍त करने का निर्णय किया. इसके बाद उन्‍होंने जगदंबिका पाल को सीएम पद की शपथ दिला दी. पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी इस फैसले के खिलाफ धरने पर बैठ गए और कल्याण सिंह के समर्थक मामले को लेकर हाई कोर्ट चले गए. हाई कोर्ट ने गवर्नर के फैसले पर रोक लगा दी और फिर कल्याण सिंह दोबारा सीएम बन गए.

 

बिहार में भी रातोंरात बदल गयी थी सरकार
महाराष्ट्र की तर्ज पर ही कभी बिहार में भी रातों-रात सियासी तस्वीर पलट गई थी। तब राजद के नाज-नखरे की कहानी का अंत हो गया था और करीब 20 महीने पुरानी महागठबंधन सरकार की अचानक विदाई हो गई थी। नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग की नई सरकार की पटकथा लिख दी गई थी। ढाई साल पहले 26 जुलाई 2017 की शाम छह बजे तक किसी को अहसास नहीं था कि अगले पल में क्या होने वाला है? तब भी सियासी भविष्यवाणी भी फेल हो गई थी। उस वक्त पूरे घटनाक्रम की रफ्तार इतनी तेज थी कि कयासों की व्याख्या भी क्षण-क्षण बदल रही थी। शाम में धुआं उठा और रात 10 बजे तक महागठबंधन का आशियाना खाक हो गया था। राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई थी। जो फर्स पर थे वह अर्श पर आ गए और जो अर्श पर थे वह फर्स पर आ गिरे। राजद-कांग्रेस के हाथ से सत्ता छिन गई थी और जदयू ने भाजपा के साथ नई सरकार का गठन कर लिया था। सरकार में लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम बनाए गए थे। रेलवे टेंडर घोटाले में उनके खिलाफ जब भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए तो राजद के सहयोगी जदयू ने सार्वजनिक रूप से सफाई देने के लिए दबाव बनाया।

 

गोवा में आधी रात को BJP ने पलटी बाजी
गोवा में भी बीजेपी की सरकार बनने से पहले आधी रात के बाद ‘पॉलिटिकल ड्रामा’ चला था. गोवा में साल 2017 में विधानसभा चुनाव हुए. 40 सदस्यीय विधानसभा में 17 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी. सबको उम्मीद थी की कांग्रेस की यहां सरकार बनने वाली है. लेकिन अचानक बीजेपी के दिग्गज नेता नितिन गडकरी सक्रिय हुए, और रातोरात तस्वीर बदल गई. सरकार बनाया 13 सीट जीतने वाली BJP ने. कांग्रेस के बहुमत साबित करने से पहले ही बीजेपी जादुई आंकड़े को जुटाकर सरकार बनाने में सफल रही. बीजेपी ने निर्दलीय विधायकों का समर्थन लेकर गोवा में सरकार बनाई और मनोहर पर्रिकर को यहां के मुख्यमंत्री बनाए गए थे. मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद प्रमोद सावंत गोवा के सीएम बने हैं.

 

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