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रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्नब गोस्वामी को परिणाम भुगतने ही होंगे।

उद्धव ठाकरे को चुनौती देंगे तो रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्नब गोस्वामी को परिणाम भुगतने ही होंगे।
टीआरपी पर झूठा बयान देने पर अब अर्नब मुम्बई पुलिस के आयुक्त परमबीर सिंह पर मानहानि का मुकदमा करेंगे।
आखिर यह टीआरपी का खेल है क्या?
======राजकुमार अग्रवाल =======
रिपब्लिक टीवी के एडिटर एवं चीफ अर्नब गोस्वामी ने कहा है कि टीआरपी बढ़ाने को लेकर मुम्बई पुलिस के आयुक्त परमबीर सिंह ने गलत बयानी की है, इसलिए अब आयुक्त के खिलाफ अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा। अर्नब ने कहा कि टीआरपी प्रकरण में 6 अक्टूबर को जो एफआईआर लिखी गई उसमें रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं है।
एफआईआर में चार स्थानों पर इंडिया टुडे का नाम है। इस पूरे मामले में सच्चाई क्या है इसका पता अदालत के फैसले से ही चलेगा। अर्नब का कहना है कि वे एक फ़ौजी के बेटे हैं, इसलिए ऐसी कार्यवाहियों से डरेंगे नहीं। अर्नब अब कितनी भी दिलेरी दिखाएं, लेकिन उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे को जो चुनौती दी है, उसके परिणाम तो भुगतने ही होंगे। उद्धव सिर्फ महाराष्ट्र के सीएम ही नहीं है, बल्कि उस शिवसेना के प्रमुख है, जिसके एक शिव सैनिक के खिलाफ बोलने की हिम्मत किसी की नहीं है।

 

अर्नब ने तो पालघर में साधुओं की हत्या की घटना से लेकर फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह की मौत तक के प्रकरण में सीधे शिव सेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे को चुनौती दी है। देश के अधिकांश न्यूज चैनलों के मुख्य स्टूडियो दिल्ली के निकट नोएडा में है, जबकि अर्नब के रिपब्लिक टीवी मुख्य स्टूडियो मुम्बई में है। अर्नब स्वयं भी मुम्बई में ही रहते हैं। यानि समुन्द्र में रह कर मगरमच्छ से बैर किया जा रहा है।

अर्नब को यह भी समझना चाहिए कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार को कांग्रेस और एनसीपी का समर्थन है। कांग्रेस तो पहले ही रिपब्लिक टीवी की जानी दुश्मन हैं। अब यदि उद्धव ठाकरे रिपब्लिक टीवी पर हमला करते हैं तो कांग्रेस के लिए यह खुश खबरी है।
कांग्रेस तो एक तीर से कई निशाने लगा रही है। लेकिन जिस टीआरपी के तुच्छ आरोप में रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी को घेरने की कोशिश की है, वह किसी के भी गले नहीं उतर रही है। मुम्बई पुलिस आयुक्त परमबीर का आरोप है कि तीन चैनलों ने अपनी लोकप्रियता दिखाने के लिए टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) बढ़ाने में लोगों को लालच दिया है।
500 रुपए प्रतिमाह देकर घरों में रिपब्लिक टीवी चलवाया। जिस चैनल की टीआरपी सबसे ज्यादा होती है उसे विज्ञापन भी अधिक मिलते हैं। सवाल उठता है कि चैनलों की टीआरपी से मुम्बई पुलिस का क्या सरोकार है? यह तो न्यूज चैनलों की आपसी प्रतिस्पर्द्धा है।
चैनल ही अपने अपने दावे करते हैं। टीआरपी में सरकार का भी कोई दखल नहीं है। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह मामला 30 हजार करोड़ के विज्ञापन कारोबार से जुड़ा है। लेकिन सब जानते हैं कि किस चैनल को कितने दर्शक देखते हैं। जो कंपनी विज्ञापन देती है वह विज्ञापन की कीमत भी वसूलती है। जिन न्यूज चैनलों के दर्शक कम होते हैं, उन्हें बाजार से विज्ञापन नहीं मिलते हैं। यानि इस पूरे प्रकरण में सरकार का कोई रोल नहीं है।
अर्नब को सबक सिखाने के लिए उद्धव ठाकरे ने रिपब्लिक टीवी पर बहुत तुच्छ हमला किया है। इससे तो रिपब्लिक को और फायदा होगा। सब जानते हैं कि पहले अर्नब का अंग्रेजी चैनल था, लेकिन कोई एक वर्ष पहले अर्नब ने हिन्दी में भी आर भारत चैनल की शुरुआत की। देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने की नीति को लेकर जब खबरें प्रसारित हुई तो अर्नब का हिन्दी चैनल भी पूरे देश में प्रथम हो गया।
अर्नब की शैली ने 20 वर्षों से पहले स्थान पर रहने वाले आजतक चैनल को भी पीछे छोड़ दिया। उद्धव ठाकरे के हमले के बाद न्यूज चैनल वाले भी रिपब्लिक टीवी के पीछे पड़ गए हैं। ऐसे न्यूज चैनलों की पीड़ा समझ में आती है क्योंकि ये चैनल बहुत पिछड़ गए हैं। न्यूज चैनल हो या अखबार, पत्रकारिता करने वालों को अब यह समझना होगा कि देश में राष्ट्र भक्ति को बल मिल रहा है।
जो तथा कथित बुद्धिजीवी भारत की सनातन संस्कृति को कोसते हैं, उन्हें अब नकारा जा रहा है। यदि न्यूज चैनल और अखबार सनातन संस्कृति का मजाक उड़ाएंगे तो उन्हें कभी भी सफलता नहीं मिलेगी। तथा कथित बुद्धिजीवी अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक  टीवी को कितना भी बुरा कहें, लेकिन सनातन संस्कृति को मानने वाले भारतवासी अर्नब के साथ ही खड़े हैं। जिस चैनल को खबरों की आज घर घर में चर्चा है उसे 500 रुपए देकर अपनी टीआरपी बढ़ाने की कोई जरुरत नहीं है।

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