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लानत है भारत के धनकुबेरों और धन कुबेर धार्मिक स्थलों पर जिन्होंने  फूटी कोड़ी देना जरूरी नहीं समझा

लानत है भारत के धनकुबेरों और धन कुबेर धार्मिक स्थलों पर जिन्होंने  फूटी कोड़ी देना जरूरी नहीं समझा
दिल्ली (अटल हिन्द ब्यूरो )इटली में कोरोना से लड़ाई के लिए खरबपतियों ने दिए 28 मिलियन डॉलर विश्व के दूसरे देशों में जहां धन कुबेर कोरोना महामारी से मुकाबला करने के लिए अपनी सरकारों को खुली मदद दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ भारत के धनकुबेर अपने पैसों पर कुंडली मारे बैठे हुए हैं।भारत में एक भी खरबपति ने कोरोना से लड़ाई के लिए एक फूटी कौड़ी भी अभी तक नहीं दी है।महामारी की बड़ी मार झेल रहे इटली में 18 खरबपति लोगों ने देश को इस भयानक आपदा से लड़ने के लिए 2.8 अरब डॉलर यानी लगभग 200 करोड़ रुपए मदद के लिए दिए हैं जबकि हमारे देश में अंबानी, अदानी, टाटा, बिरला,मित्तल, अजीम प्रेमजी जैसे सैकड़ों खरबपतियों ने एक पैसा भी इस महामारी से मुकाबले के लिए देना जरूरी नहीं समझा।भारत के खरबपति शाम को सोशल मीडिया पर वाहवाही लूटने के लिए खिड़की से ताली बजाते हुए फोटो खिंचवाने का काम जरूर करेंगे लेकिन देश को इस जरूरत की घड़ी में एक चवन्नी भी निकालनी जरूरी नहीं समझ रहे हैं।देश के दम पर अरबपति- खरबपति बनने वाले हजारों धनकुबेरों में विपदा में देशहित की सोच लेकर नहीं आई।लानत है ऐसे धनकुबेरों पर लेकिन यहाँ यह लिखना भी असंगत नहीं होगा की जब भारतीय धन कुबेरों ने विश्व स्तरीय महामारी में साथ नहीं दिया तो भारत सरकार को चाहिए की वह भारत के धन कुबेर धार्मिक स्थलों की सम्पति को राष्ट्रिय सम्पति घोषित कर इस माहमारी से निपटने के लिए इस्तेमाल करे। देश की जनता कोरोना वायरस से भारत सरकार के साथ कंधे से कन्धा मिला कर लड़ रही है लेकिन देश के खरबोंपति धार्मिक स्थल अपने अपने खजाने को ताले भीतर बंद कर तमाशा देख रहे है क्यों आखिर इस खजाने पर किसका हक़ है और ये कब काम आएगा क्यों नहीं भारत सरकार कड़े कदम उठा रही क्या सिर्फ आम जनता ही हर जगह पिसती रहेगी। या फिर ये सभी धन कुबेर व्यापारी और धार्मिक स्थल राजनैतिक दलों को चंदा देते है इसलिए भारत सरकार इन पर हाथ डालने से कतरा रही है। ऐसे में  खरबों रूपये के बेकार पड़े खजाने का क्या काम जब वो देश ही नहीं विश्व भर में फैली भयंकर माहामारी काम नहीं आएगा।

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