वाहवाही लूटने के लिए झूठ बोल रहे हैं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल !

तो क्या वाहवाही लूटने के लिए झूठ बोल रहे हैं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल !

 

मुख्यमंत्री के आदेशों को धता बता रहे हैं कैथल जिला प्रशासनिक अधिकारी !

 

कैथल, 16 जनवरी (कृष्ण प्रजापति): अक्सर देखने में आता है कि सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री कई ऐसी घोषणा और फैसले लेते हैं जिनको अधिकारी तवज्जो नहीं देते अथवा उन मामलों में अपनी कलम चलाना जरूरी नहीं समझते तो सवाल उठते हैं कि नेता केवल जनता के बीच वाहवाही लूटने के उद्देश्य से ही ऐसी बयानबाजी कर देते हैं जिनका जमीनी स्तर पर कोई वजूद ही नहीं है। अब एक मामले को लेकर सवाल उठ रहा है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री क्या जनता को बरगलाने के लिए झूठे फैसले लेते हैं अथवा झूठी घोषणाएं कर रहे हैं या फिर कैथल जिला के प्रशासनिक अधिकारी मुख्यमंत्री के आदेशों को कैबिनेट में हुए फैसले को धत्ता बता रहे हैं क्योंकि हाल ही में गत दिसंबर माह में हरियाणा कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री मनोहरलाल और शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर की मौजूदगी में फैसला हुआ था कि हरियाणा के प्राइमरी स्कूलों में सक्षम युवा बेरोजगार पढ़ाएंगे लेकिन जब इस बारे में कैथल जिला उपायुक्त सुजान सिंह से चर्चा की गई तो उन्होंने ऐसे किसी भी प्रकार के आदेशों के बारे में साफ इंकार करते हुए कहा कि उनके पास इस प्रकार के आदेशों की कोई कॉपी भी नहीं है और ना उन्हें इस मामले की जानकारी है। मामले को लेकर जब हमने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशों की कॉपी सोशल मीडिया पर भी और समाचार पत्रों की सुर्खियों में छप चुकी है तो उपायुक्त का जवाब था कि हमारे पास इस बारे में किसी भी प्रकार का कोई पत्र व्यवहार भी नहीं हुआ है। उपायुक्त का तर्क ऐसा था कि सुनने वाला हर कोई हैरान हो जाए, उनका तर्क था कि मुख्यमंत्री की हरेक घोषणा लागू हो यह संभव नहीं है। डीसी यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि किसी जिले में कोई योजना लागू होती है, इसका मतलब यह नहीं कि वह योजना हर जिले में लागू हो। उन्होंने कैथल के जिला शिक्षा अधिकारी व मौलिक शिक्षा अधिकारी से भी संपर्क साधकर इस मामले में जानकारी ली लेकिन उन्होंने भी मुख्यमंत्री द्वारा इस प्रकार के किसी भी फैसले की जिला स्तर पर कोई पत्र या आदेश की कॉपी ना आने की बात कही। अब मुख्यमंत्री की कथनी पर सवाल उठता है कि क्या मुख्यमंत्री केवल जनता के बीच वाहवाही लूटने के लिए इस प्रकार की बयानबाजी करते हैं। यह बेरोजगार युवाओं से सरासर मजाक है। यदि मुख्यमंत्री द्वारा बैठक में लिए गए इस फैसले पर सख्त हैं तो कैथल के अधिकारियों को भी इस मामले में सख्त निर्देश देकर प्राइमरी स्कूलों में सक्षम युवाओं को भेजना सुनिश्चित करें ताकि परीक्षाओं के समय में किसी भी स्कूल में बच्चों की पढ़ाई स्टाफ के अभाव में बाधित न हो।

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