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वोट के लिए पसीना बाह रहे है नेता जी…. जनता नेता जी से पूछ रही है सीधे सवाल.

वोट के लिए पसीना बाह रहे है नेता जी……………….
जनता नेता जी से पूछ रही है सीधे सवाल…………

हरियाणा में चुनावी रण को जीतने के लिए राजनीतिक दलों के प्रत्याशी चुनावी मैदान मे उतर गए है ओर इस रण को जीतने के लिए कोई भी कोर कसर नही छोडना चाहते जिसके कारण उनको ना भूख लग रही ओर ना ही प्यास, ना धूप की चिंता। दिन भर चुनावी जनसभाओं में अपनी दिनचर्या बिता रहे है नेता जी। जिसको लेकर कई नेताओं का वजन भी कम हो गया है कोई कार्यकर्ता इधर ले जा रहा है कोई बाजू पकड़ कर उधर ले जा रहा है नेता जी कुछ भी बोलने में ही अपनी भलाई समझ रहे है।
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एक तो चुनावी सीजन दूसरा धान का सीजन—-
नेता जी के एक परेशानी हो तो ज्याज है एक तो चुनावी सीजन दूसरा धान की कटाई का सीजन जिसकी वजह से गांव में कम भीड़ नेता जी के भाषण को सुनने के लिए पहुंच रही है ओर जिसके कारण उनको अपनी जनसभा सुबह ही करनी पड़ रही ताकि वह अपनी अपील को ज्यादा से ज्यादा लोगो मे पहुँचा सके।
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कही स्वागत तो कही खरी खरी सुनाती है जनता…..
गांव की जनसभाओं में जनता कम हो तो नेता जी उदास भी हो जाते है ओर अपने भाषण को कम शब्दो में कह देने में ही अपनी भलाई सोचते है यदि जनता ज्यादा हो तो वायदों की झडी लगा देते है । जो नेता सत्ता में है वो अपने पांच साल का रिपोर्ट कार्ड जनता को सुना रहा है और विकास कार्यो के नाम पर वोट रूपी अश्रीवाद प्राप्त करना चाहते है लेकिन जो सत्ता में नही है वो सरकार की कमियों को जनता तक पहुँचा रहे है। लेकिन जनता है सब जानती है और भरी सभा मे में नेता जी से सवाल पूछ रही है कि अपने गांव के लिए क्या क्या किया, कितने युवाओं को रोजगार दिया, कितनने बजुर्गों की बुढ़ापा पेंसन बनवाई , ओर सवाल पूछना हो तो महिलाये भला कैसे पीछे रह सकती है वो भी नेता जी को पूछ रही है आखिर हम कब तक गंदा पानी पीते रहेगी , हमारी सुरक्षावायदों का क्या हुआ ना जाने कितने सवाल जो जनता नेता जी पूछ रही है और सवालों के जवाब देने में विवश नेता जी अगल बगल झांकते नजर आ रहे है। आखिर सवाल पूछे भी क्यों ना गांव में पहली बार आये है और वोट लेकर फिर नही आना इन्होंने जब कोई चुप करवाता है तो जवाब भी साथ साथ मिल ही जाता है।।
जो भी वोट रूपी अश्रीवाद जनता ऐसे ही नही देती आखिर पांच साल मे एक बार तो मौका मिलता है नेता जी को गांव में आने का भला अब भी सवाल जवाब ना पूछे तो कब पूछ ओर जनता अबकी बार वोट पूरी ठोक बजाकर ही देना चाहती है।

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