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शिल्पकार महेंद्र सिंह रत्नों  के पारखी और आकर्षक आभूषण बनाने में माहिर  

शिल्पकार महेंद्र सिंह रत्नों  के पारखी और आकर्षक आभूषण बनाने में माहिर
Jaipur(atal hind)

Craftsman Mahendra Singh specializes in making gems connoisseur and attractive jewelery

जयपुर दुनिया का प्रसिद्ध रत्न बाजार है। जयपुर के जौहरियों को मुगल दरबार में भी बहुत इज्जत बख्शी जाती थी। ये जौहरी राजाओं-बादशाहों तथा शाही महिलाओं के लिए रत्नाभूषण तैयार करते थे। ऐसे ही एक शिल्पकार महेंद्र सिंह भी रत्नों  के पारखी और आकर्षक आभूषण बनाने में माहिर हैं। उनके अनुसार जयपुर की ज्वैलरी समय के साथ आधुनिकता के रंग में रंगी जरूर लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी से चली आ रही परंपराओं को नहीं छोड़ने के कारण इसका शाही अंदाज कायम है। और सारी दुनिया इसी शाही अंदाज की दीवानी भी है। जयपुर का रजवाड़ा देश के सबसे समृद्ध रजवाड़ों में से एक था। यहां के शासक ज्वैलरी के शौकीन थे। आभूषण पहनना जयपुर की खास और समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। यह प्रतीक अब दुनियाभर में अपनी खास पहचान बना चुका है और विश्व के कोने-कोने में जयपुर की ज्वैलरी की धाक है। इस ज्वैलरी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी परंपरागत डिजाइन है।छठी कक्षा से रत्नों के काम में जुटे जयपुर के महेंद्र सिंह के पास एक समय में 25 लोग काम करते थे। करीब एक दशक पहले कुछ लोग उनके लाखों रुपए हड़प गए। बावजूद इसके महेंद्र स्टोन, पंच धातु, गोटा चांदी और पंच धातु की ज्वेलरी बनाने में अकेले ही लगे रहते हैं। उनके द्वारा बनाई गई 10 मिलीमीटर आकार की तिजौरी देख कर हर कोई हैरान हो जाता है। झुमकी में राधा रानी का स्वरूप हो या फिर अन्य आकृतियां बरबस ही महिलाओं को आकर्षित करती हैं। मथुरा के कृष्ण मंदिर की आकृति बना चुके महेंद्र अब अयोध्या के राम मंदिर की आकृति बनाने की तैयारी में हैं। हर तरह के रत्न को देखते ही पहचानने वाले महेंद्र के अनुसार लोग असली-नकली का फर्क नही समझते। उनका मानना है कि जयपुर के राजघराने से लेकर आम आदमी तक परंपराओं और स्थानीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। ज्वैलरी सिर्फ महिलाओं की खूबसूरती के लिए ही आवश्यक नहीं बल्कि राज्य की समृद्धि का भी ठोस आधार है। जयपुर की कुंदनकारी पूरी दुनिया में मशहूर है। आभूषणों पर मीनाकारी कला में स्वर्ण पर विशेष आकृतियां उकेर कर उन्हें खूबसूरत बनाया जाता है। मीना कुंदनकारी में सदियों से जयपुर की धाक रही है। महेंद्र के अनुसार स्वर्ण और हीरे की ज्वैलरी के विकल्प भी गढ़े जाते हैं, जिससे साधारण लोग ज्वैलरी पहनने का शौक पूरा कर सकें। बता दें कि शहर के रेलवे रोड पर स्थित देवकरण धर्मशाला में प्राचीन कारीगर एसोसिएशन द्वारा आयोजित साप्ताहिक आर्ट एंड क्राफ्ट प्रदर्शनी में विभिन्न राज्यों के विख्यात शिल्प कलाकारों की प्रस्तुति देखकर उनकी कला को जमकर सराहा जा रहा है।

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