शीतलासप्तमी आज, श्रद्धालुओं द्वारा की जाएगी पूजा अर्चना: विशाल

शीतलासप्तमी आज, श्रद्धालुओं द्वारा की जाएगी पूजा अर्चना: विशाल

अटल हिंद / तरसेम सिंह

रविवार 15 मार्च को शीतलासप्तमी की पूजा अर्चना की जाएगी। इससंबंध में जानकारी देते पंडित विशाल शांडिल्यने बताया कि  शीतला सप्तमी के दिन बासी भोजन ग्रहण किया जाता है। इस त्यौहार को बसोड़ा पूजन के नाम से भी जाना जाता है। देश के कुछ हिस्सों बसोड़ा शीतला सप्तमी को तो वहीं कुछ हिस्सों में शीतला अष्टमी को पूजा जाता है। उन्होंने बताया कि शीतला सप्तमी 15 मार्च को पड़ रही है।

शीतला सप्तमी 2020 शुभ मुहूर्त सुबह 6:31 मिनट से शाम 6:30 मिनट तक है।

सप्तमी तिथि सुबह 4:25 मिनट से अगले दिन सुबह 03:19 मिनट तक रहेगी।

 

*शीतला सप्तमी का महत्व*

पंडित शांडिल्य ने बताया कि होली के 7 दिन बात शीतला सप्तमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सुबह अंधेरे में सूर्योदय से पहले में बने मीठे चावल, हल्दी, चने की दाल, दही लेकर होलिका दहन वाली जगह जाकर पूजा करती हैं। इसे बसोड़ा या बसोरा भी कहते हैं। शीतला माता को रोगों को दूर करने वाली देवी माना जाता है। जो भी मां शीतला सप्तमी का व्रत करके उनकी पूजा करती हैं उनकी संतान सभी प्रकार के रोगों से दूर रहती हैं। इस दिन बासी भोजन की ही ग्रहण किया जाता है। देश के कई हिस्सों में शीतला सप्तमी मनाई जाती है जबकि कुछ लोग शीतला सप्तमी के दिन मां शीतला की पूजा करके बसोड़ा पूजते हैं तो वहीं कुछ लोग शीतला अष्टमी के दिन बसोड़ा पूजते हैं। माना जाता है कि शीतला सप्तमी के दिन ही बासी भोजन ग्रहण किया जाता है। उसके बाद से बासी भोजन नहीं खाया जाता है क्योंकि शीतला सप्तमी के बाद से ही मौसम गर्म होने लगता है। माता शीतला की पूजा विशेष रूप से बसंत और ग्रीष्म ऋतु में ही की जाती है।

 

*शीतला सप्तमी की पूजा विधि*

1. शीतला सप्तमी से एक दिन पहले ही यानी षष्ठी तिथि को मीठे चावल बना ले और उसके बाद पूजा की सभी समाग्री तैयार कर ले। जिसमें मीठे चावलों के साथ हल्दी और चने की दाल अवश्य होनी चाहिए।

2.इस दिन सुबह ठंडे पानी (ताज़ा ) से स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र धारण करके अंधेरे में(सुबह 5 बजे सूर्योदय से पहले) जहां पर होली जलाई गई हो उस स्थान पर जाना चाहिए।

3. वहीं पर आटा गूंथकर दो आटे का दीपक बनाए और उसमें घी की बाती डूबोकर लगाएं। यह दीपक बिना जलाएं (ठंडी ज्योत) उस होली वाले स्थान पर रख दे और मीठे चावल, चने की दाल, दही और हल्दी भी चढ़ाएं और उसके बाद जल चारों ओर घुमाए, चढ़ाएं। मंदिर जाकर माता शीतला की पूजा करे। सबसे पहले माता शीतला को हल्दी और रोली का तिलक लगाए। माता शीतला का तिलक करने के बाद काजल, मैहंदी, लच्छा और वस्त्र अर्पित करे। तीन कंडवारे का समान अर्पित करे।

4. माता शीतला की कथा अवश्य पढ़े या सुने। कथा पढऩे के बाद माता शीतला को भी मीठे चावलों का भोग लगाएं। माता शीतला की आटे का दीपक जलाकर आरती उतारे। आरती उतारने के बाद माता शीतला को जल अर्पित करे और उसकी कुछ बूंदे अपने ऊपर भी डालें। अपने घर आकर द्वार (दरवाजे ) के बाहर दोनों तरफ़ लोटे का बचा जल छिडक़े फिर हल्दी से दोनों ओर स्वस्तिक बनाने के बाद घर में प्रवेश करे। बासी भोजन प्रसाद रुप घर के सभी सदस्यों को खिलाए।

पंडित विशाल शांडिल्य।

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