श्रमिकों के दर्द से कम नहीं है केरल में गर्भवती हथिनी की हत्या की घटना।

श्रमिकों के दर्द से कम नहीं है केरल में गर्भवती हथिनी की हत्या की घटना।

======राजकुमार अग्रवाल ========

The incident of killing of pregnant elephant in Kerala is not less than the pain of workers.

कोरोना काल में जब प्रवासी श्रमिक पैदल सड़कों पर चले तो कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने तत्काल केन्द्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। अपने ट्वीटर पर श्रमिकों से संवाद करते हुए वीडियो भी पोस्ट किए। यानि राहुल गांधी अच्छे विपक्ष की भूमिका निभाई। स्वयं राहुल गांधी ने कहा कि हम विपक्ष में तो सरकार की खामियां उजागर करेंगे ही। लेकिन राहुल गांधी केरल में मल्लापुरम में एक गर्भवती हथिनी की हत्या पर अभी तक चुप है। गत 27 मई को हुई इस घटना पर राहुल गांधी ने न तो केरल की वामपंथी विजयन सरकार को कटघरे में खड़ा किया है और न ही ट्वीट कर घटना पर दु:ख जताया है। यह माना कि श्रमिक अपनी पीड़ा राहुल को सुना सकते हैं। लेकिन बेजुबान हथिनी का दर्द तो राहुल को स्वयं समझना होगा। राहुल गांधी केरल के वायनाड से ही सांसद हैं ऐसे में हथिनी की हत्या पर बोलने की दोहरी जिम्मेदारी बनती है। हथिनी की हत्या की घटना को श्रमिकों के दर्द से कम नहीं माना जा सकता है। यदि राहुल गांधी बयान देंगे तो केरल की वामपंथी सरकार पर असर पड़ेगा। मौजूदा समय में केन्द्र की राजनीति में कांग्रेस और वामपंथियों का गठजोड़ है। राहुल गांधी वायनाड और केरल के लोगों के हितों के प्रति जागरुक भी हैं। अब जब मल्लापुरम में हथिनी की हत्या का मुद्दा देशभर में चर्चा का विषय बना गया है, तब राहुल गांधी को विपक्ष के नेता की भूमिका निभानी चाहिए। राहुल गांधी को भी पता है कि उनके केरल में असामाजिक तत्वों ने एक गर्भवती हथिनी के मुंह में अनानास बम रख दिया। बम के फटने से हथिनी का मुंह लहूलुहान हो गया। बाद में हथिनी तड़प तड़प कर मर गई। अंदाजा लगाया जा सकता है कि हथिनी और उसके पेट में पल रहे गर्भ को कितनी पीड़ा हुई होगी। भारत की सनातन संस्कृति में तो हाथी को देवता माना जाता है। केरल में ऐसी घटनाएं आम हैं। सड़कों पर जहर फैक कर सैकड़ों बेजुबान जानवरों की हत्या कर दी जाती है। केरल के अनेक लोग कितने मांसाहारी है इसे पूरा देश जानता है। जब गौमाता को सड़क पर मारकर मांस खाया जा सकता है तो फिर जंगल में रहने वाली हथिनी की क्या बिसात है। दु:खद बात तो यह है कि इस प्रकरण केरल सरकार दबाने में लगी हुई है। ऐसे में यदि राहुल गांधी कोई बयान देंगे तो केरल की वामपंथी सरकार को कार्यवाही करनी ही पड़ेगी। हालांकि केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन इस मामले में केरल की सरकार की कार्यवाही ज्यादा मायने रखती है। यह बात अलग है कि केरल की सरकार राजनीतिक कारणों से दोषियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं करें।

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