‘हरियाणा को करना पड़ सकता है मध्यावति चुनाव का सामना ,संकल्प पत्र’ और ‘जन सेवा पत्र’ में तालमेल असम्भव 

(Is it possible to combine ‘Sankalp Patra’ and ‘Jan Seva Patra’ in Hariyana)‘संकल्प पत्र’ और ‘जन सेवा पत्र’ में तालमेल  संभव है क्या हरियाणा में

Haryana may have to face the midterm elections, it is impossible to match the resolution letter and ‘Jan Seva Patra’

चंडीगढ़ (अटल हिन्द ब्यूरो )सूत्रों के अनुसार भाजपा और जजपा के बीच एक मिनीमम कॉमन एजेंडा पर ये गठबंधन हुआ है, जिसमें जजपा ने भाजपा से मांग रखी है कि सरकार उनके जन सेवा पत्र में जनता से किए गए वादों को पूरा करने में प्रतिबद्धता दिखाएगी। भाजपा ने भी जजपा को इसके लिए आश्वस्त किया है। अब देखना यह है कि भाजपा सरकार बनाने के बाद जजपा के कितने वादों को धरातल पर उतारती है।लेकिन इसे सियासत ही कहेंगे क्योंकि चुनावी मैदान में  हालत यह थे  कि भाजपा नेताओं के निशाने पर जजपा थी और जजपा के निशाने पर भाजपा। मगर हरियाणा की सियासत में ऐसा भी मोड़ आएगा कि भाजपा और जजपा को जनादेश के बाद एक होना पड़ेगा, यह शायद ही किसी ने सोचा होगा। इस चुनावी समर में दोनों दलों ने अपने समर्थन में जनादेश के लिए ‘संकल्प पत्र’ और ‘जन सेवा पत्र’ का बड़ा सहारा लिया इन पत्रों में शामिल लोकलुभावने वादे लेकर दोनों दल जनता के बीच पहुंचे थे। लेकिन इन दोनों पार्टियों के घोषणा पत्रों में कई वादे एक दूसरे से अलग  थे, अब उन्हीं वादों पर दोनों दलों को तालमेल बिठाकर सहमति जताते हुए आगे बढ़ना होगा। हरियाणा में जब चुनावी शंख बजा  तो उस वक्त भाजपा और जजपा दोनों ही अलग राहों पर चलते हुए चुनावी जंग में कूदे थे।

 

अब जब जनादेश सामने आया, तो हालात कुछ ऐसे बन गए कि चुनाव में एक-दूसरे के धुर विरोधी रही भाजपा व जजपा को सत्ता पर काबिज होने के लिए सियासी मजबूरियां इन्हे नजदीक खींच लाई। सत्ता हासिल करने को दोनों ने हाथ मिलाया और अब जजपा और भाजपा दोनों ही गठबंधन की सरकार का हिस्सा हैं। लेकिन इसमें पेच अब यह फंस गया है कि गठबंधन की इस सरकार में भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ लागू  होगा या जजपा का ‘जन सेवा पत्र’। या फिर कहीं ऐसा तो नहीं होगा की हरियाणा की जनता को मध्यावती चुनाव का सामना न करना पड़ जाये।क्योंकि जजपा चाहती है कि सरकार बनने के बाद बुजुर्गों को 5100 रुपये पेंशन, प्राइवेट रोजगार में हरियाणा के युवाओं का 75 प्रतिशत आरक्षण और किसानों के कर्ज माफी की घोषणा लागू की जाए। हमने किसी शर्त पर नहीं, बल्कि मिनीमम कॉमन एजेंडा पर समर्थन दिया है और इसमें हमारा लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ प्रदेश के लोगों की सेवा करना है।लेकिन किसी भी दल की सरकार के लिए जजपा के ये मुद्दे पुरे कर पाना इतना आसान नहीं है। जजपा ने अपना जान सेवा पत्र चुनावी रण जितने के लिए जनता के सामने प्रस्तुत किया था इसके बाद भी जजपा हरियाणा की 90 सीटों में से 10 पर ही विजय पा सकी यानी एक तरह से  हरियाणा की जनता ने जजपा के जन सेवा पत्र को  इसलिए नकार दिया की जजपा के घोषणा पत्र से जहाँ राज्य सरकार के खजाने पर बोझ बढ़ेगा वहीँ 75 प्रतिशत आरक्षण  से आपसी भाईचारे पर भी आंच आएगी। आने वाला समय ही बताएगा की  गठबंधन की इस सरकार में भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ लागू  होगा या जजपा का ‘जन सेवा पत्र’।

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