Atal hind
चण्डीगढ़  टॉप न्यूज़ राजनीति हरियाणा

सत्ता की “दलाली” से कहीं ऊपर है समाज की “हलाली” बबीता फोगाट और सोनाली फोगाट नहीं कर सकती संगीता दहिया की बराबरी

सत्ता की “दलाली” से कहीं ऊपर है समाज की “हलाली”
बबीता फोगाट और सोनाली फोगाट नहीं कर सकती संगीता दहिया की बराबरी
=राजकुमार अग्रवाल =
चंडीगढ़। सोशल मीडिया पर इन दिनों 3 युवा चेहरे खास चर्चा में चल रहे हैं। अभिनेत्री और टिकटोक फेम सोनाली फोगाट, कुश्ती चैंपियन बबीता फोगाट और सोशल एक्टिविस्ट संगीता दहिया।
2019 के विधानसभा चुनाव में “75 पार” के टारगेट को हासिल करने के लिए भाजपा ने जिन सेलिब्रिटी चेहरों को टिकट दिया था उनमें सोनाली फोगाट और बबीता फोगाट भी शामिल थी।
सोनाली फोगाट को जहां खास “मेहरबानी” के चलते आदमपुर से भाजपा का टिकट मिला, वहीं पर बबीता फोगाट को जेजेपी से पलटी मारने के इनाम में दादरी विधानसभा से भाजपा ने टिकट दिया।
भरपूर लोकप्रियता, पूरी पब्लिसिटी और भाजपा के प्रति जबरदस्त माहौल के बावजूद सोनाली फोगाट और बबीता फोगाट दोनों ही चुनाव हार गई।

चुनाव हारने के बाद सोनाली फोगाट नेगेटिव कारणों के कारण लगातार चर्चा में हैं।
चुनाव के दौरान बड़े विवादास्पद बयान ने उन्हें चुनाव हरवा दिया। उसके बाद मंडी सेक्रेटरी को सरेआम पिटाई करने के कारण वे बड़ी चर्चा में आई और अभी 3 दिन पहले किसानों को “उखाड़ने” वाली पोस्ट के जरिए इनका नाम फिर सभी की जुबान पर आया।
भाजपा में पूरी “सेवा” करने के बावजूद सोनाली फोगाट को सत्ता में हिस्सेदारी नहीं मिली है।
बबीता फोगाट इस मामले में भाग्यशाली रही। जींद उपचुनाव में जेजेपी प्रत्याशी दिग्विजय चौटाला के पक्ष में प्रचार करने के दौरान लगा सियासी चस्का बबीता फोगाट को बड़े सियासी सपनों के आसमान पर ले गया। लोकसभा चुनाव में हरियाणा में भाजपा की सभी 10 सीटों पर जीतने बबीता फोगाट को ललचा दिया और इसीलिए उन्होंने बड़ी नौकरी छोड़कर जेजेपी को लात मारते हुए भाजपा ज्वाइन करने में देरी नहीं की।
भाजपा ने उन्हें टिकट देकर वादा भी निभाया लेकिन खराब सियासी किस्मत के चलते बबीता फोगाट सियासी अखाड़े में पहले ही दांव पर चित हो गई।
बबीता फोगाट ने इसके बाद दूसरे दांव-पेंच अपनाते हुए हरियाणा में निगम के महिला विकास निगम चेयरपर्सन बनने में सफलता हासिल कर ली।

दोनों ही नेत्रियां भाजपा आलाकमान को खुश करने के लिए पूरी तत्परता के साथ बयानबाजी करती रहती हैं। किसान आंदोलन को लेकर दोनों ही नेत्री भाजपा आलाकमान को खुश करने वाले बयान देते आई हैं और किसानों के विरोध में खटकने वाली बातें कहती आई है।
दोनों ही नेत्री आलाकमान की पूरी हाजिरी मारकर खुद के सियासी वजूद को बड़ा करने की फिराक में हैं।
इन दोनों ही नेत्रों के मुकाबले में सोशल एक्टिविस्ट संगीता दहिया का नाम भी चर्चा में उछला है। बबीता फोगाट ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए संगीता दहिया पर कटाक्ष करते हुए अपनी उपलब्धियों और संगीता दहिया की शिक्षा पर कमेंट किया है।
संगीता दहिया किसी परिचय की मोहताज नहीं है। 2016 के आरक्षण आंदोलन से लेकर किसान आंदोलन तक संगीता दहिया लगातार समाज और किसानों के हक में फ्रंट मोर्चे पर खड़ी रही है। आरक्षण आंदोलन में सैकड़ों युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों में वापस कराने में खाप नेताओं के साथ संगीता दहिया कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही।

इसके अलावा दूसरे सामाजिक मुद्दों को लेकर संगीता दहिया लगातार समाज के बड़े मंचों पर अपनी हिस्सेदारी दिखाती आई है।
जहां बबीता फोगाट ने सिर्फ सियासी फायदे के लिए नौकरी छोड़ी, वहीं संगीता दहिया ने सिर्फ सामाजिक मुद्दों तक ही अपनी सक्रियता को सीमित रखा।
बबीता फोगाट ने नौकरी छोड़कर कोई त्याग नहीं किया बल्कि सत्ता में हिस्सेदारी के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ी, वहीं दूसरी तरफ संगीता दहिया ने समाज हित में बड़ी बड़ी शख्सियतों से टकराने में कभी संकोच नहीं किया।
बबीता फोगाट ने अपनी पोस्ट के जरिए खुद को बड़ा और संगीता दहिया को छोटा दिखाने की छोटी कोशिश की है।

 

Society’s “brokerage” is higher than the “brokerage” of power
Babita Phogat and Sonali Phogat cannot match Sangeeta Dahiya


भाजपा के प्रति समर्पण को दिखाने के लिए बबीता फोगाट बार-बार चाटुकारिता भरे बयान देती आई है वहीं दूसरी तरफ संगीता दहिया हर बार डंके की चोट पर समाज और किसानों के समर्थन में खड़ी नजर आई है।
बात यह है कि सोनाली फोगाट और बबीता फोगाट सिर्फ अपने व्यक्तिगत हितों के लिए अपनी पर्सनैलिटी का इस्तेमाल करती आई है वहीं दूसरी तरफ के सामान्य घर से निकली हुई संगीता दहिया ने लगातार समाजिक मोर्चों पर अपनी आवाज बुलंद करते हुए अपनी अलग से पहचान बनाई है।
सोनाली फोगाट और बबीता फोगाट बेशक प्रचार और लोकप्रियता के मामले में बड़ी शख्सियत हो सकती हैं लेकिन हरियाणा के ग्रामीण समाज और किसानों के बीच संगीता दहिया का मुकाबला दोनों मिलकर भी नहीं कर सकती हैं।
सोनाली फोगाट और बबीता फोगाट अपने आप को किसान परिवारों से होने का दावा करती है लेकिन यह हकीकत है कि किसानों की बेहतरी के लिए दोनों ने कभी कुछ भी नहीं किया और ना ही जिस समाज से वे निकली है उसके लिए कभी उन्होंने सकारात्मक भूमिका निभाई है।
इनके विपरीत संगीता दहिया हर मामले में उनसे 21 है और बिना किसी लाग लपेट के सिर्फ समाज और किसानों के हित के लिए सबसे आगे आवाज उठाने का मिसाल कायम की है।
बबिता फोगाट को अगर समाज में इज्जत हासिल करनी है तो उन्हें संगीता दहिया जैसे जमीन से जुड़े चेहरों को छोटा दिखाने की बजाय अच्छे कार्य करते हुए खुद का बड़ा रसुख हासिल करने की दिशा में काम करना चाहिए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति ATAL HIND उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार #ATALHIND के नहीं हैं, तथा atal hind उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

अटल हिन्द से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।

Related posts

नये भारत के लिये नया इंसान कौन बनायेगा?

admin

नए श्रम क़ानूनों के लागू होने से देश के आर्थिक विकास को लग सकते हैं पंख

admin

लोकल को ग्लोबल बनाने हेतु प्रयासरत केंद्र सरकार

admin

Leave a Comment

URL