सरकारी बाबूओं की बिल्डिंगें, लाखों का मलबा-करोड़ों की जमीन जर्जर व खस्ताहालत,

सरकारी बाबूओं की बिल्डिंगें, लाखों का मलबा-करोड़ों की जमीन जर्जर व खस्ताहालत, कुभकर्णी नींद में सोया प्रशासन

बाबैन, 23 मार्च (सुरेश अरोड़ा ) : ब्लाक व उप तहसील का दर्जा प्राप्त बाबैन ने पिछले कई सालों में प्रत्येक क्षेत्र में काफी तरक्की की है। बाबैन में उप तहसील व ब्लॉक कार्यालय के अलावा सरकारी अस्पताल, मार्किट कमेटी व बीईओ कार्यालय तथा जनस्वास्थ्य वि ााग के कई जलघर स्थापित हैं। प्रदेश सरकारों ने अपने-अपने तरीके से बाबैन में अनेक विकास कार्य करवाएं जिससें कस्बा बाबैन हर दृष्टि से एक समृद्ध शहर बन गया है। बाबैन लाडवा-शाहाबाद रोड के स्टेट हाईवे न0. 7 पर स्थित हैं और करीब 50 से अधिक गांवों का मु य शहर है। दुर्भाग्य की बात यह है कि इतना कुछ होने के बाद भी यहां के सरकारी कार्यालयों व उनके ऑफिसरों के लिए बनाए गए रिहायशी क्वार्टर अनदेखी का शिकार होने से धूल फांक रहे हैं। ये सभी क्वार्टर्स अपने-अपने कार्यालयों के नजदीक ही बने हैं परन्तु आधुनिकता की चकाचौंध से करोड़ों की भूमि पर बने लाखों की लागत के ये सरकारी आवास अधिकारियों द्वारा उपयोग न करने से खंडहरों में तबदील होते जा रहे है। इस और किसी भी उच्चाधिकारी द्वारा कोई ध्यान न देने से न केवल करोड़ों की सरकारी प्रापर्टी बेकार हो गई है बल्कि सरकार को भी हाउस रैंट के नाम पर प्रतिमाह लाखों का चुन्ना लग रहा है।

बाबैन के साथ लगते गांव रामशरण माजरा की पंचायत की करोडों की जमीन पर पीएचसी के भवन का निर्माण हुआ था। इसमें अस्पताल की बिल्डिंग के अलावा स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए सरकारी आवास भी बनाए गए थे। इन आवासों में स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ के न रहने के कारण ये जर्जर व खस्ताहालत में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। हालत यह है कि ये आवास जहरीलें जीव जन्तुओं के रहने का अड्डा बन गए है और अब इन आवासों में रहना तो दूर जाना भी मुश्किल हो गया है।

बाबैन अनाज मंडी में करीब 100 से अधिक आढ़ती हैं और बाबैन अनाज मंडी पूरा साल व्यस्त रहती है। मंडी में धान, गेंहू, सरसों, सुरजमुखी के अलावा प्याज, आलू, की बिक्री होती है। मार्किट कमेटी के अधिकाङ्क्षरयों के लिए यहां पर आवास भी बनाए गए थे जिनमें किसी के भी न रहने के कारण ये आवास खंडर होते जा रहे है। ये आवास न केवल शराबियों का अड्डा बन गए है बल्कि कई दुकानदार इनकों नीजि कार्यों के लिए भी उपयोग कर रहे। पिछले 10-15 सालों इस सरकारी आवासों मे मार्कीट कमेटी का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी नहीं रहा है। मजे की बात है कि यह आवास लाडवा-शाहाबाद रोड पर बाजार के साथ बने हुए हैं और इनके आस-पास जोहड़ का गंदा पानी हर समय भरा रहता है और अन्दर से मकानों का बूरा हाल है।

बाबैन में पिपली रोड पर गन्दे पानी के इक्टठा होने के लिए दो पंचायती जोहड थे जिन्हें तत्कालीन सरपंच पुष्पा देवी ने उप-तहसील कार्यालय के लिए सरकार का नि:शुल्क दे दिया था और एक तरफ उप-तहसील कार्यालय ठीक-ठाक है परन्तु दूसरी ओर सरकारी आवास व पटवारखाना तथा एक निम्र कर्मचारी का आवास बना गया है जो भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। सरकारी आवास में अभी नायब तहसीलदार रूपिन्द्र सिंह ने साफ-सफाई करवाई है और पटवारखाना में पटवारियों का बिठाया गया है लेकिन छोटा आवास शुरू से ही बंद पडा हैं। इन क्वार्टरों के आस-पास इतनी गंदगी फैली हुई है कि मलेरिया, डेंगू के मच्छर-मक्खियां व आवास सुअर व गौंवश तथा भारी मात्रा में गोबर, कुडा-कर्कट फैला हुआ है।

बाबैन में सुनारियों रोड व लाडवा रोड व मार्किट कमेटी कार्यालय के पास जन स्वास्थ्य विभाग के भी जलघर एवं आवास बने हुए हैं और इन जलघरों व आवासों का भी बूरा हाल है और ये भी अपने नवीनीकरण का बाट जोह रहे हैं इनके आस-पास भी गंदगी का आलम है।

बाबैन एवं इलाका की जनता की सरकार व जिला प्रशासन से मांग है कि करोड़ों की जमीन व लाखों की लागत से बने इन सरकारी क्वाटरों की सुध ली जाऐ और संबंधित अधिकारियों को हिदायत दी जाए कि वे इनमें रहें और इनके रख-रखाव की ओर ध्यान दें। शहर के ये सभी अधिकारी एवं कर्मचारी सुबह-शाम अपने-अपने घर से ही अप-डाऊन करते हैं जिससे ये सरकारी क्वार्टर बदहाली के कगार पर पहुंच गए हैं। क्षेत्रवासी रामपाल सैनी, प्रवीन कुमार, पूर्णचन्द, रोहित राठी, धर्मबीर, श्याम सिंह, तरसेम राय, सुरमुख सिंह, रविन्द्र कुमार, श्याम लाल, राजेश कुमार आदि का कहना है कि सरकार व प्रशासन को इस ओर ध्यान देकर इन सरकारी आवासों का कायाकल्प करवाना चाहिए या इनके स्थान पर दूसरे विभाग के कार्यालय स्थापित कर करोडों की जमीन व बिल्डिंगों की सुध लेनी चाहिए।

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