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सरकार व प्रशासन चाहे जो मर्जी हथकंडे अपना ले किसान रैली होकर रहेगी : कसाना

सरकार व प्रशासन चाहे जो मर्जी हथकंडे अपना ले किसान रैली होकर रहेगी : कसाना
सरकार किसानों की धर पकड़ के लिए दे रही घरों में दस्तक लेकिन हम गोली और लाठी से घबराने वाले नहीं : चढूनी
कैथल, 10 सितम्बर (कृष्ण प्रजापति): भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, युवा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम कसाना, कैथल जिलाध्यक्ष  होशियार गिल प्यौदा, युवा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र माघो, प्रदेश प्रचार मंत्री जगबीर प्यौदा सहित अनेक भाजपा भारतीय नेताओं ने कहा कि सत्ता के दबाव के चलते किसानों को रैली तक पहुंचने से रोकने के लिए जिला प्रशासन हर तौर तरीके अपना रहा है। किसान रैली को रोकने के लिए पूरी ताकत झोंकने के लिए बेशक सरकार मुस्तैद हो, लेकिन देश का किसान, लगभग 17 संगठन एक बैनर तले पिपली पहुंचेंगे। विक्रम कसाना ने कहा कि कैथल व कुरुक्षेत्र जिले के प्रशासनिक अधिकारियों पर सरकार का पूरा दबाव है। आज सभी अधिकारी सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन लाख कोशिश करले अन्नदाता अब जागरूक हो चुका है और रैली में पहुंचकर अपने मुद्दों की बात जरूर करेगा।
उन्होंने बताया कि जिले के अनेक किसानों नेताओं की धर पकड़ के लिए प्रशासन ने इंतजाम किए हैं लेकिन हम गोली और लाठी से घबराने वाले नहीं बल्कि किसानो के हितों के लिए हर गोली व लाठी सीने पर खाने के लिए भी तैयार हैं। उधर सूत्रों के हवाले से खबर है कि जिला प्रशासन कई किसान नेताओं को हिरासत में लेने के लिए उनके घरों व दफ्तरों पर छापेमारी भी कर रहा है। विक्रम कसाना ने बातचीत के दौरान कहा कि कुछ दिन पहले दुष्यंत चौटाला शाहाबाद में रैली करके गए थे, स्थानीय प्रशासन उनको क्यों नहीं रोक पाया था, उन्होंने मीडिया के माध्यम से सवाल करते हुए कहा कि क्या करोना के चलते केवल किसानों पर ही रोक है, सत्ताधारी नेताओं के लिए कोई नियम, कानून कायदे नहीं  हैं। भाकियू नेताओं ने कहा कि सरकार पूर्णतया तानाशाह रवैया अपना रही है। जिस प्रकार अंग्रेजों के जमाने में आंदोलनकारियों के ऊपर जुल्म ढाए जाते थे आज की सरकार (काले अंग्रेजों की सरकार) भी अन्नदाताओं पर जुल्म ढा रही है। प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम चढूनी, युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना, राकेश कुमार बैंस के घर देखिए जिस पर पोस्टर चिपका गए हैं और सीआईडी, सीआईए स्टाफ उन्हे पकड़ने के लिए पीछे लगा हुआ है जो बिना किसी परमिशन के घर में घुसता है और आंदोलनकारियों के परिवारों को तंग करता है। राकेश कुमार बैंस व उनके साथियों का जुर्म बस इतना है कि कि उन्होंने तीन अध्यादेशों के खिलाफ किसानों की आवाज बुलंद की है और सरकार के ऊपर इन्हे वापिस लेने का दबाव बनाया, लेकिन सभी किसान अब जागरूक हो चुके हैं, एक हो चुके हैं, सरकार से लड़ने के लिए तैयार हैं, अब सरकार के सामने कोई किसी भी प्रकार की अपील नहीं बल्कि आरपार की लडाई का ऐलान होगा।

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