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सुभाष बराला ओर कैप्टन अभिमन्यु राज्यसभा सांसद भेजेगी तो कृष्ण बेदी को ओएसडी बनाकर कैबिनेट का देगी दर्जा ?

सुभाष बराला ओर कैप्टन अभिमन्यु राज्यसभा सांसद भेजेगी तो कृष्ण बेदी को ओएसडी बनाकर कैबिनेट का देगी दर्जा ?
रामबिलास शर्मा को राज्यपाल तो कविता जैन को महिला आयोग की अध्यक्षा ओर धनखड़ को प्रदेशाध्यक्ष ?

फरीदाबाद (अटल हिन्द/योगेश गर्ग )
विधानसभा चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेताओं की हार के बाद भाजपा को अपनी कमियों पर झांकना होगा और उन्हें दुरस्त करके आगे बढ़ने का प्रयास करना होगा की मंत्रियों की हार का क्या कारण रहा है। बात करें टोहाना विधानसभा की तो यह विधानसभा हमेशा सरकार में हाथ रखने वाली रही है। सरदार हरपाल के बाद निशान सिंह, सरदार परमवीर सिंह ओर सुभाष बराला तक सत्ता की चौधर में रहे हैं। अब नई नवेली सरकार में भी अपनी जगह टोहाना ने बना ली है। विधायक बनकर गये देवेन्द्र बबली ने बेशक जजपा से चुनाव लड़कर जीते हो पर उनकी पार्टी की चाबी से ही विधानसभा का ताला खुला है। ऐसे में उनका योगदान भी सरकार में बन गया है। अब टोहाना में प्रशासन के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है की वो किनकी सुने एक तरफ भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष है तो दुसरी तरफ विधायक ओर तीसरी तरफ जजपा का प्रदेशाध्यक्ष हो गया है। भाजपा की बेशक सरकार बन गई हो पर चाबी जजपा ने दी है। उनका भी उपमुख्यमंत्री है। ऐसी ही रार नारनौंद विधानसभा पर हो गई है। वहां से चुनाव जीते रामकुमार गौतम है जो राजनीति के दिग्गज है। उनसे हारे कैप्टन अभिमन्यु भी पार्टी के दिग्गज हैं। वहां के प्रशासन के लिए मुश्किल रहेगा की किनके आदेश की पालना हो। इसके इलावा बात करें बादली ओर महेंद्रगढ़ विधानसभा की वहां के दिग्गज भी हारे हैं वहां जजपा के उम्मीदवार नहीं जीते हैं बल्कि कांग्रेस के जीते हैं तो उनकी पावर बरकरार रह सकती है। अब भाजपा ने अपने दिग्गजों की साख बचाने के लिए खेल तैयार कर रही है ताकि वो फिर चुनाव में अपनी इज्जत बचा सके वो जजपा को पटखनी दे सके वो खेल है टोहाना से सुभाष बराला ओर नारनौंद विधानसभा से कैप्टन अभिमन्यु को राज्यसभा सांसद बना सकती है। ताकि वो जनता के बीच में रहकर अपना कद बड़ा करने के साथ में पार्टी का साख बढ़ा सकें। इसके इलावा सूत्र बताते हैं की रामबिलास शर्मा को किसी प्रदेश का राज्यपाल बनाया जा सकता है तो ओमप्रकाश धनखड़ ओर कविता जैन में से एक को प्रदेशाध्यक्ष बनाया जा सकता है और जो बच गया उसे राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लिया जा सकता है। यदि कविता जैन को प्रदेशाध्यक्ष नहीं बनाया गया तो उसे राष्ट्रीय कार्यकारिणी में ले जाने की बजाए महिला आयोग की अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इसके बाद शाहबाद की बात करें तो वहां से जजपा का विधायक रामकर्ण काला बना है तो जाहिर सी बात है वो भाजपा को कमजोर करके जजपा को मजबूत करने की कोशिश करेगा तो इसका इलाज भी भाजपा ने ढुंड लिया है सूत्रों के मुताबिक कृष्ण बेदी को सीएम का ओएसडी बनाकर उसे कैबिनेट मंत्री जैसा दर्जा देकर भाजपा को मजबूत करने का काम करेगें। ऐसे में जजपा कमजोर किया जा सकता है। में से एक को भाजपा की चौधर मिल सकती है। ऐसा होता है तो भाजपा फिर अपना हारी हुई विधानसभा में बढ़ा पाएगी। टोहाना में इसलिए ज्यादा जरूरी भाजपा देख रही है क्योंकि इसकी आस पास की विधानसभा जजपा जीत गई है जिसमे नरवाना, उकलाना ओर उचाना है। ओर रतिया के साथ फतेहाबाद में भी टक्कर का चुनाव था ऐसे में फिर भाजपा कमजोर ना हो इसके लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया है। अब देखना दिलचस्प रहेगा की भाजपा का मास्टर प्लान जजपा पर भारी पड़ेगा या नहीं यह तो आने वाला समय बताएगा।

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