सुरजेवाला के सामने प्रत्याशी घोषित करने में भाजपा को करनी होगी माथापच्ची

सुरजेवाला के सामने प्रत्याशी घोषित करने में भाजपा को करनी होगी माथापच्ची
2014 के चुनाव में सुरजेवाला की जीत का अंतर था 23675 वोट, अब भाजपा नेताओं का दावा होगी जमानत जब्त
कैथल, 25 सितंबर (कृष्ण प्रजापति): विधानसभा चुनावों के बिगुल बजने के साथ ही भाजपा के लिए नेताओं द्वारा रैलियां करने व कार्यकर्ता सम्मेलन करने का दौर भी शुरू हो गया है। सुरजेवाला जैसे दिग्गज नेता के सामने भाजपा को कैथल से उम्मीदवार की घोषणा करने के लिए काफी माथापच्ची करनी होगी।

जहां सुरजेवाला की 2014 के विधानसभा चुनाव में जीत का अंतर 23675 था तो वहीं अब की बार मिशन 75 पार का नारा देकर जनता के बीच जा रहे भाजपा नेताओं ने सुरजेवाला की जमानत जब्त कराने का दावा ठोका है लेकिन ऐसा कोई भी प्रत्याशी भाजपा के पास अब तक नहीं है जो सुरजेवाला को चित कर सके क्योंकि भाजपा में टिकट को लेकर एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है और यदि किसी एक कार्यकर्ता को टिकट मिलता है तो अन्य टिकटार्थी किसी दूसरे दल या प्रत्याशी का समर्थन कर सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सुरजेवाला जैसे राष्ट्रीय नेता को हराने के लिए भाजपा, इनेलो और जेजेपी तीनों को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी लेकिन सर्वहित पार्टी के नेता व भावी प्रत्याशी जसवीर तंवर सुरजेवाला को हर मंच से चुनौती जरूर देते हैं। जसबीर तंवर ने कहा कि कैथल हल्का ही नहीं बल्कि जिले में न तो भाजपा ने विकास किया और न सुरजेवाला ने कोई फली फोड़ी।

जसवीर तंवर ने बताया कि सुरजेवाला और भाजपा के खिलाफ मुद्दे बहुत हैं, हम जनता के बीच उन्हीं को लेकर जा रहे हैं व अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। अगर कैथल विधानसभा पर भाजपा टिकटार्थियों की बात करें तो भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर, पूर्व विधायक लीलाराम, राजपाल तँवर, पाला राम सैनी, सुरेश गर्ग नौच, कैलाश भगत आदि टिकट की दौड़ में है लेकिन माना जा रहा है कि सुरजेवाला इन सब पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।

उधर 5 साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने 25 बार कैथल जिले का दौरा किया है, जिसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि खुद मुख्यमंत्री यहां से चुनाव लड़ सकते हैं। अगर मुख्यमंत्री कैथल विधानसभा से चुनाव लड़ते हैं तो लगभग चारों सीटों के समीकरण बदल जाएंगे। वर्तमान स्थिति देखी जाए तो कैथल, कलायत व पूंडरी सीट भी भाजपा के गलत टिकट वितरण की खबरों को लेकर मुश्किल में पार होती नजर आ रही है। उधर पिछले 5 सालों से कैथल से नदारद रहे रणदीप सिंह सुरजेवाला पिछले 1 महीने से कार्यकर्ताओं के घर-घर जाकर रूठे हुए अपनो को मना रहे हैं और अनेक सम्मेलन आयोजित करके कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोल रहे हैं। गत दिनों एक सम्मेलन के दौरान उन्होंने कांग्रेसी नेताओं पर भी निशाना साधते हुए  सौ सुनार की पर एक लौहार की चोट मारने की बात कहकर अपने विरोधियों को जगाने का काम किया है। उम्मीद है कि अबकी बार रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी किसी ऐसे प्रत्याशी की तलाश में है जो उन्हें हरा सके हालांकि भाजपा नेताओं का दावा जमानत जब्त करने का है लेकिन अगर वे सुरजेवाला को कड़ी हार देते हैं तो भी सुरजेवाला के राजनीतिक कैरियर पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा।

जींद उपचुनाव में सुरजेवाला की हुई करारी हार का असर ऐसा हुआ कि उनका कैथल में भी जनाधार खिसकता नजर आया क्योंकि उस दौरान उन्होंने इस प्रकार के बयान दिए कि अगर जींद चुनाव जीते तो कैथल से इस्तीफा दे देंगे आदि जोकि जनता को  पसंद नही आए और अब कैथल की जनता ने भी पिछले 5 वर्षों के दौरान कैथल विधानसभा में विकास के नाम पर एक भी ईंट न लगने का गम है। सुरजेवाला द्वारा कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व के दरबार में हाजिरी लगाने के कारण हल्के की अनदेखी होने के चलते हल्के की जनता मायूस होती नजर आ रही है। फिलहाल भाजपा के सभी टिकटार्थी दिल्ली व चंडीगढ़ दरबार में हाजिरीयां लगाने में व्यस्त हैं।

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