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स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने पर तत्काल जमानत

स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने पर तत्काल जमानत-
अखिल गोगोई
गुवाहाटी: नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन संबंधी मामलों में एक साल से अधिक से हिरासत में लिए गए कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अखिल गोगोई ने जेल से मंगलवार को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया कि हिरासत में उन्हें मानसिक एवं शारीरिक यातनाएं दी गईं और एनआईए अधिकारियों ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने पर तत्काल जमानत देने का प्रस्ताव दिया.

गोगोई की नवगठित पार्टी रायजोर दल द्वारा जारी पत्र में आरोप लगाया गया है कि किसान नेता को अदालत की अनुमति के बिना 18 दिसंबर, 2019 को दिल्ली ले जाया गया था.
उन्होंने लिखा, ‘मुझे एनआईए मुख्यालय में लॉकअप संख्या एक में रखा गया था और केवल एक गंदा कंबल दिया गया था. मैं तीन-चार डिग्री सेल्सियस तापमान में जमीन पर सोया.’
गोगोई ने आरोप लगाया कि एनआईए अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान उन्हें आरएसएस में शामिल होने पर तत्काल जमानत दिए जाने का प्रस्ताव दिया था.
उन्होंने कहा, ‘मैं जब इस अपमानजनक प्रस्ताव के खिलाफ दलील दे रहा था, तो उन्होंने भाजपा में शामिल होने का एक और प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि मैं किसी रिक्त सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकता हूं और मंत्री बन सकता हूं.’
आरटीआई कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें केएमएसएस छोड़कर असम के लोगों का धर्मांतरण करके उन्हें ईसाई बनाए जाने के खिलाफ काम करने पर एक एनजीओ शुरू करने के लिए 20 करोड़ रुपये दिए जाने का प्रस्ताव दिया गया था.
गोगोई ने कहा, ‘मैंने जब उनका कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया, तो उन्होंने मुख्यमंत्री या असम के किसी प्रभावशाली मंत्री से मुलाकात कराने का प्रस्ताव रखा. मैंने उसे भी ठुकरा दिया.’
उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने एनआईए का कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया, तो उन्हें ‘अवज्ञा करने वाला नागरिक’ करार दिया गया और उनके खिलाफ गंभीर मामले दर्ज किए गए.
गोगोई ने कहा, ‘मुझे प्रस्ताव स्वीकार नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई. मुझे मौत की भी धमकी दी गई. मुझे 10 साल कारावास की सजा की धमकी दी गई. इतनी शारीरिक एवं मानसिक यातना झेलने के बाद 20 दिसंबर की रात मेरी तबियत खराब हो गई.’
इस बारे में सवाल किए जाने पर भाजपा प्रवक्ता रूपम गोस्वामी ने कहा, ‘ये सभी निराधार आरोप हैं और घटिया राजनीति के अलावा कुछ नहीं हैं. असम में चुनाव शुरू होने से मात्र चार दिन पहले पत्र जारी किया गया और ऐसा केवल मत हासिल करने के लिए किया गया है.’
उन्होंने कहा, ‘असम के लोगों को समझ आ गया है कि अखिल गोगोई क्या हैं. असम के लोग बहुत परिपक्व हैं. उन्हें कोई मत नहीं देगा और वह अपनी जमानत भी गंवा देंगे.’
गोगोई शिवसागर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र के लिए 27 मार्च को पहले चरण में मतदान होगा.
बता दें कि सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान 12 दिसंबर, 2019 को अखिल गोगोई को जोरहाट से गिरफ्तार किया गया था. इसके अगले दिन उनके तीन साथियों को हिरासत में लिया गया था.
13 दिसंबर को असम पुलिस ने उन पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज किया और 14 दिसंबर को मामला एनआईए के पास पहुंचा था. तब एजेंसी ने आरोप लगाया था कि ‘गोगोई और अन्यों ने प्रकट रूप से सरकार के खिलाफ नफरत और असहमति भड़काई है.’
उन पर भारतीय दंड संहिता और अवैध (गतिविधियां) रोकथाम कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.
एनआईए ने एफआईआर में उन्हें ‘आतंकी गतिविधियों’ में लिप्त बताते हुए आरोप लगाया गया था कि ‘गोगोई और अन्यों ने संसद में पेश हुए नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) के एक पैराग्राफ का इस्तेमाल विभिन्न समूहों को धर्म, जन्मस्थान, भाषा, निवास आदि के आधार पर भड़काने के लिए किया है, जो राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता को लेकर खतरा पैदा करता है.’
गोगोई को मार्च में जमानत मिली थी, लेकिन उन्हें रिहा नहीं किया गया. बाद में गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा इस पर स्टे लगा दिया गया था.
हालांकि गोगोई के तीन सहयोगियों- बिट्टू सोनोवाल, धैय्जा कोंवर और मानश कोंवर को अब एनआईए के मामले में जमानत मिलने के बाद रिहा कर दिया गया है.
असम पुलिस ने गोगोई के खिलाफ 12 मामले दायर किए हैं, जिसमें से उन्हें अब तक तीन में जमानत मिली है. गोगोई के खिलाफ माओवादियों से कथित संबंध रखने के आरोप में भी केस दर्ज किए गए हैं.
उनके वकील के अनुसार अखिल गोगोई के खिलाफ आईपीसी की धारा 144, 143, 148, 153, 153 (ए), 153 (बी) के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम (पीडीपीपीए) की धारा 3 और 4 के तहत आरोप लगाए गए हैं.
(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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