स्व. ओम प्रभा जैन ने करवाए थे अनेक विकास कार्य, आज भी कैथल की जनता करती है याद,12 बार हुए चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने 6 बार दर्ज की है कैथल से जीत

कैथल, 22 सितम्बर (कृष्ण प्रजापति): हरियाणा की राजनीति में कैथल विधानसभा सीट अपना खास महत्व रखती है। जहां देश के धुरंधर नेताओं ने यहां चुनाव प्रचार किया है और अपने प्रत्याशियों को जीतवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया था लेकिन उसके बावजूद भी वे अपने अपने प्रत्याशियों को जीता नहीं पाए थे और आजाद प्रत्याशी रोशन लाल तिवाड़ी ने जीत दर्ज करके एक इतिहास रचने का कार्य कैथल विधानसभा से किया था। बात अगर कैथल के अब तक हुए चुनावों की करें तो यहां से कुल 12 बार चुनाव हुए हैं, जिनमें से कांग्रेस पार्टी ने छह बार जीत हासिल की है, जबकि आजाद उम्मीदवार ने दो बार, इनेलो, समता, जनता पार्टी व लोकदल के प्रत्याशियों ने एक-एक बार जीत दर्ज की है।

 

 

वर्ष 1991 में हुए चुनाव में कांग्रेस से उम्मीदवार बने सुरेंद्र मदान ने सबसे कम वोटों के अंतर मात्र 407 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी और वर्ष 2014 के हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी से रणदीप सुरजेवाला सबसे अधिक विजय अंतराल 23675 वोटों से विजेता बने थे। इस विधानसभा क्षेत्र में अब तक कुल आठ चेहरे ही विधायक बनकर विधानसभा में पहुंचे हैं, जिसमें स्वर्गीय ओम प्रभा जैन व रणदीप सुरजेवाला ने लगातार कांग्रेस से दो बार विजय हासिल की, वहीं चरणदास शोरेवाला और सुरेंद्र मदान ने दो-दो बार विजय प्राप्त करने का गौरव हासिल किया है। ओम प्रभा जैन हरियाणा विधानसभा के अलावा संयुक्त पंजाब के समय में भी कैथल की विधायिका रही हैं। ओम प्रभा जैन ऐसी महिला शख्सियत थीं जिनको भारत के एक राज्य हरियाणा से प्रथम वित्त मंत्री होने का गौरव प्राप्त है। उनके द्वारा कैथल से विधायक बनने के बाद इतने विकास कार्य किए गए कि आज भी कैथल की जनता उन्हें आदर पूर्वक याद करती है। उनके समय में हुए विकास कार्यो पर अगर नजर डालें तो उन्होंने कैथल में ड्रेनों का निर्माण कार्य करवाया क्योंकि हर साल बाढ़ में डूब जाने से कैथल बाढ़ ग्रस्त एरिया घोषित हो चुका था जिसके बाद ओमप्रभा जैन ने कैथल में विभिन्न ड्रेनों का निर्माण करवाया। तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित भगवत दयाल के कार्यकाल में और उनके बाद बने अनेक मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में अनेक कार्य करवाये, जिनमें कैथल में आईटीआई का निर्माण, पीडब्ल्यूडी विभाग कॉलोनी, लड़कियों के लिए महिला कॉलेज, जजों के लिए रिहायशी कॉलोनी, कैथल में लड़कियों के लिए अलग स्कूल की व्यवस्था, कैथल क्लब का निर्माण, जवाहर पार्क का निर्माण कार्य भी उनके कार्यकाल में हुआ था और हजारों युवाओं को नौकरियां देने का काम उनके द्वारा किया गया था। ओम प्रभा जैन ने कैथल के साथ साथ गुहला और कलायत जोकि उस समय कैथल का ही हिस्सा थे, उनमें भी विकास कार्य करवाए थे। वर्ष 1957 और 1962 में संयुक्त पंजाब के समय में भी ओम प्रभा जैन कैथल की विधायिका रहीं थी और उसके बाद हरियाणा गठन के बाद 1967 और 1968 में भी वे कैथल की विधायिका रही थी। उनका जन्म 6 फरवरी 1931 को बरेली में हुआ था और उनका देहांत 7 अगस्त 1970 को एक सड़क दुर्घटना में कैथल में हुआ था लेकिन उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में हुआ था। ओम प्रभा जैन की मृत्यु के बाद उनकी स्मृति में 1978 में कैथल के मोहन बहादुर खुरानियाँ परिवार ने पार्क रोड़ स्थित मॉडल स्कूल का नाम ओम प्रभा जैन सीनियर मॉडल स्कूल रखा। शुरुआती दौर में कैथल में जब ओम प्रभा जैन रिश्तेदारी में पहुंची थी तो खुरानिया परिवार ने उनका बहुत साथ दिया था और उनके विधायक बनाने में इस परिवार का काफी योगदान रहा। संयुक्त पंजाब के समय में प्रताप सिंह कैरों तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान ओम प्रभा जैन को डिप्टी सीएम बनने का भी गौरव वर्ष 1962 में मिला था और उसके बाद कामरेड रामकिशन की सरकार में वे स्वास्थ्य मंत्री भी रहीं थी। आज ओम प्रकाश जैन का परिवार दिल्ली में रहता है, जिसमें उनके तीन बेटे थे लेकिन एक की मृत्यु होने के बाद अब एक बेटा डॉक्टर और छोटा बिजनेस मैन है। दो बेटियां हैं, वे भी बड़े-बड़े पदों पर कार्यरत हैं। हरियाणा सरकार में ओम प्रभा जैन कैबिनेट मंत्री रहीं थी।
कैथल विधानसभा से ये रहे अब तक विधायक !
1967 से लेकर 2014 तक 12 बार हुए चुनावों में कैथल विधानसभा से आठ चेहरे ही विधानसभा तक पहुंचे हैं। वर्ष 1967 में ओम प्रभा जैन कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ीं व विजय रहीं और अविनाश कुमार को 1918 वोटों से हराया था, उस समय चुनाव मैदान में केवल 3 प्रत्याशी थे। वर्ष 1968 में हुए चुनाव में ओम प्रभा जैन दोबारा से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ी और जनसंघ के ज्ञान चंद्र को 2323 वोटों से हरा कर विधानसभा में पहुंची थीं और उस समय कुल  4 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। वर्ष 1972 में हुए चुनाव में चरणदास शोरेवाला आजाद उम्मीदवार के तौर पर किस्मत आजमाने चुनाव मैदान में उतरे और कांग्रेस की ओम प्रभा जैन को 3422 वोटों से हराया था। उस समय चुनाव मैदान में प्रत्याशियों की संख्या 10 हो गई थी। वर्ष 1977 में जनता पार्टी की टिकट पर रघुनाथ ने चुनाव लड़ा और आजाद उम्मीदवार ओम प्रभा जैन को 3945 वोटों के अंतर से हराया था, उस समय चुनाव मैदान में 6 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे। वर्ष 1982 में आजाद उम्मीदवार रोशन लाल तिवारी ने चुनाव लड़ा और कांग्रेस के देवेंद्र शर्मा को 3929 वोटों से हराकर विधानसभा में पहुंचे थे। साल 1987 में सुरेंद्र कुमार मदान ने लोकदल पार्टी से चुनाव लड़ा और आजाद उम्मीदवार चरणदास शोरेवाला को 6689 वोटों से हराया था। साल 1991 में सुरेंद्र कुमार मदान दोबारा चुनाव मैदान में आए लेकिन इस बार वे कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़े जिसमें हरियाणा विकास पार्टी के चरण दास शोरेवाला को 470 से हराया था, यह इस विधानसभा सीट की सबसे कम मार्जिन की जीत थी। वर्ष 1996 में हुए चुनाव में चरणदास शोरेवाला ने समता पार्टी से चुनाव लड़ा और हरियाणा विकास पार्टी के रोशन लाल तिवारी को 4239 वोटों से हराकर विधानसभा में पहुंचे थे। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में इनेलो व भाजपा के संयुक्त उम्मीदवार लीलाराम ने चुनाव लड़ा और आजाद उम्मीदवार धर्मपाल दीदारा को 17957 वोटों के अंतर से मात देते हुए विधानसभा में दस्तक दी थी।

 

वर्ष 2005 में हुए चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर शमशेर सिंह सुरजेवाला ने चुनाव लड़ा और इनेलो के कैलाश भगत को 5112 वोटों से हराया। उसके बाद हुए चुनाव वर्ष 2009 में कांग्रेस पार्टी से रणदीप सुरजेवाला ने चुनाव लड़ा और इनेलो के कैलाश भगत को 22502 वोटों से हराकर विधानसभा पहुंचे और कैबिनेट मंत्री बने। उस समय अपने कार्यकाल के दौरान रणदीप सुरजेवाला ने कैथल में करोड़ो अरबों रुपए के अनेक विकास कार्य करवाए थे। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में कैथल की सीट पर पुनः कांग्रेस पार्टी से रणदीप सुरजेवाला मैदान में आए और इनेलो ने भी तीसरी बार कैलाश भगत को चुनाव मैदान में उतारा, इस बार 23675 वोटों के अंतर से रणदीप सुरजेवाला कैलाश भगत को हराकर विधानसभा में पहुंचे। इनेलो प्रत्याशी कैलाश भगत इस सीट से 3 बार चुनाव हार चुके हैं, वे आजकल भाजपा में हैं और टिकट की रेस में है।
 संयुक्त पंजाब के समय कैथल सीट से ये व्यक्ति रहे विधायक !
संयुक्त पंजाब हरियाणा के समय में हुए विधानसभा चुनाव में वर्ष 1952 में कैथल विधानसभा सीट से दौलतराम कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़े और जनसंघ के नरसिंह दास को 4027 वोटों के अंतर से हराया। दौलत राम को कुल 9315 वोट मिले थे। वर्ष 1957 में हुए चुनावों में कैथल से ओम प्रभा जैन कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़कर विधायक बनीं और जनसंघ के हरिंदर सिंह को हराया था, उन्हें कुल 16673 वोट मिले थे और 513 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। वर्ष 1962 में हुए चुनावों में कैथल से दोबारा फिर कांग्रेस की टिकट पर ओम प्रभा जैन ने चुनाव लड़ा और जनसंघ के बारू राम को 6588 वोटों के अंतर से हराया था। उस समय ओम प्रभा जैन को कुल 15595 वोट मिले थे।

 

 

 

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