सड़क पर इनसो , नाकाम दिग्विजय को बदलनी होगी कार्यप्रणाली

सड़क पर इनसो , नाकाम दिग्विजय को बदलनी होगी कार्यप्रणाली
दिग्विजय की अगुवाई में सड़क पर आ गई इनसो
अजय चौटाला के सपनों को साकार करने के लिए दिग्विजय को बदलनी होगी कार्यप्रणाली
-राजकुमार अग्रवाल –
चंडीगढ़।

Inso on the road, failed Digvijay will have to change the methodology
Inso came on the road led by Digvijay
Digvijay will have to change the methodology to make Ajay Chautala’s dreams come true
-Rajkumar Aggarwal –

यह फोटो 4 दिन पहले दिल्ली के छतरपुर में अजय चौटाला परिवार के फार्म हाउस की है। सड़क पर बैठे और खड़े दर्जनों युवा जेजेपी की छात्र इकाई इनसो के पदाधिकारी हैं।


अजय चौटाला ने 2003 में इनेलो को सियासी मजबूती देने के मकसद से इनसो का गठन किया था।
अजय चौटाला की अगुवाई में इनसो हरियाणा की सबसे मजबूत छात्र संगठन के रूप में उभर कर सामने आई। नई दिल्ली में कोई भी छात्र संगठन इतना बड़ा सम्मेलन नहीं कर पाया जितना इनसो ने करके दिखाया था।
इनसो से जुड़े हुए युवा लगातार इनेलो की मजबूती के लिए दिन रात काम करते रहे और इसी फौज के बलबूते पर इनेलो के साथ सबसे अधिक युवा खड़े रहे।अजय चौटाला की दूरदर्शी सोच के बलबूते पर ही इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय और चंडीगढ़ विश्वविद्यालय जैसे बड़े पावर हाउस स्टुडेंट यूनियन इलेक्शन में अपनी पैठ और दबदबा दिखाने का काम किया।
जेबीटी भर्ती मामले में जेल जाने से पहले ही अजय चौटाला ने अपने इस सबसे खास छात्र संगठन को छोटे बेटे दिग्विजय चौटाला के हवाले कर दिया।
दिग्विजय चौटाला ने शुरू के सालों में इनसो को मजबूत करने के लिए लगातार मेहनत की, जिसके फलस्वरूप 2013 में इन्होंने रोहतक के सम्मेलन में नेत्रदान का गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड भी स्थापित करने का इतिहास रचा।इसके बावजूद इनसो सड़क पर आ गई।
इनसो से जुड़े हजारों युवाओं के कारण ही अजय चौटाला का परिवार ओम प्रकाश चौटाला और अभय चौटाला के सियासी अस्तिव की लड़ाई में खुद को बचाने में सफल रहा। अगर इन 100 की कमान अजय चौटाला और विभिन्न प्रकार के हाथ में नहीं होती तो अजय चौटाला का परिवार राजनीति से बेदखल कर दिया जाता।
इनसो से जुड़े हजारों युवाओं ने जेजेपी के गठन के बाद दिन-रात पसीना बहाते हुए उसकी मजबूती के लिए काम किया। दुष्यंत चौटाला को लोकप्रियता के आसमान पर बिठाने का काम भी इनसो से जुड़े रहे युवाओं ने ही किया और 11 महीने के छोटे से समय में जेजेपी को सत्ता की हिस्सेदार बनाने में निर्णायक भूमिका अदा की।
लेकिन यह हकीकत है कि दिग्विजय चौटाला ने इनसो का मुखिया बनने के बाद शुरू में जो ललक और मेहनत दिखाई थी वह बाद के सालों में गायब हो गई जिसके चलते प्रदेश का सबसे मजबूत छात्र संगठन आज अपने इतिहास की छाया बन कर रह गई है।
दिग्विजय चौटाला की कार्यप्रणाली ने इनसे को और मजबूत बनाने की बजाय उसे कमजोर करने का काम किया। दिग्विजय चौटाला से हरियाणा के युवाओं को बहुत बड़ी उम्मीदें थी लेकिन दिग्विजय चौटाला के “यूज एंड फॉरगेट” की सोच ने इनसो से जुड़े युवाओं को निराश और हताश करने का काम किया जिसके चलते धीरे-धीरे इनसो की सदस्यता में कमी आती चली गई और अब हालात यह है कि कभी लाखों की संख्या का दावा करने वाला यह छात्र संगठन कुछ हजार के आंकड़े के लिए भी तरस गया है।
इनसो की शाखाएं हरियाणा के अधिकांश विश्वविद्यालयों और कालेजों में मौजूद होने का दावा किया जाता है लेकिन हकीकत यह है कि दो तिहाई शैक्षणिक संस्थाओं में अब इनसो के नाममात्र ही सदस्य बचे हैं। पदाधिकारियों के अलावा आम मेंबरों की बड़ी फौज नदारद हो गई है।
आम युवाओं में अब इनसो के प्रति कोई क्रेज नहीं है जिसके चलते इनसो स्टूडेंट पॉलिटिक्स में डिसाइडिंग फैक्टर नहीं रह गई है और वह एबीवीपी और कांग्रेश की छात्र इकाई की तरह औपचारिकताओं के दायरे में सिमट कर रह गई है।
दिग्विजय चौटाला इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष लगातार बने हुए हैं और ऐसे में इस संगठन को शिखर पर ले जाने की पूरी जिम्मेदारी भी उनकी है।
लेकिन उन्होंने इनसो पर ध्यान देने की बजाय जेजेपी के कामों में ज्यादा इंटरेस्ट ले रखा है जिसके चलते इनसो सबसे मजबूत छात्र संगठन की बजाय का एक कमजोर छात्र इकाई रह गई है।
अजय चौटाला के समय इनसो का पदाधिकारी बनने के लिए युवाओं में होड़ लगी रहती थी लेकिन अब इनसो को आधे कॉलेजों में पदाधिकारी तलाशने पर भी नहीं मिल रहे हैं।
इस नेगेटिव बदलाव के कारण इनसो के भविष्य पर भी सवालिया निशान लग गए हैैं। इनसो से जुड़े हुए छात्रों की अनदेखी करने के चलते दिग्विजय चौटाला का क्रेज छात्रों में कम हो गया है जिसके कारण इनसो तरक्की की बजाए ढलान पर आ गई है।
इन हालात को बदलने के लिए ही दिग्विजय चौटाला ने कोरोना के बाद अजय चौटाला के जेल जाने से पहले इनसो के पदाधिकारियों को उनसे मिलवाने के लिए बुलाया गया था।
2003 में अजय चौटाला ने जिन युवाओं को इनसो के साथ जोड़ा था अब उनके बच्चे इनसो में भागीदारी के लायक हो गए हैं। जेजेपी के साथ जुड़े अजय चौटाला के साथियों में अब परिवार की नई पीढ़ी राजनीति में सक्रिय हो गई है। उनके बच्चों को इनसो के साथ जोड़ने के लिए अजय चौटाला का सहारा लेना दिग्विजय चौटाला की मजबूरी हो गई है।
इसीलिए अजय चौटाला के साथ मुलाकात करके इनसो के पदाधिकारियों को मोटिवेट करने का प्रयास किया गया। अगर दिग्विजय चौटाला इनसो को फिर से फर्श से अर्श पर हरियाणा का सबसे मजबूत छात्र संगठन बनाना चाहते हैं तो उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा।
दिग्विजय चौटाला को इस बात को दिल में बिठा देना चाहिए कि बड़ी-बड़ी बातें करने और सिर्फ एक दो समोसा खिलाने से इनसो से जुड़े युवाओं के साथ दिल का रिश्ता नहीं बना पाएंगे बल्कि उनके सुख-दुख में भागीदारी करके ही वे हरियाणा के छात्रों के दिलों में जगह बना पाएंगे।
उन्हें इनसो का पार्ट टाइम अध्यक्ष की बजाय पूर्णकालिक मुखिया के तौर पर काम देखना होगा और पदाधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में रहना होगा। अगर उन्होंने यूज एंड फॉरगेट की अपनी कार्यप्रणाली को नहीं बदला तो इनसो कभी भी मजबूत छात्र संगठन के रूप में उभर नहीं पाएगी।
अब देखना यही है कि अपनी गलतियों से सबक लेकर दिग्विजय चौटाला इनसो की मजबूती के लिए क्या फैसला लेते हैं और अपनी कार्यप्रणाली में क्या सुधार करते हैं??
आज दिग्विजय चौटाला का जन्मदिन है । उम्मीद है कि वे अगले साल में अपनी गलतियों से सबक लेते हुए अपने पिता अजय चौटाला के इस ड्रीम छात्र संगठन को फिर से सबसे मजबूत छात्र संगठन के ग्रुप में बदलने का काम अंजाम देंगे

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