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हरियाणा के आजाद विधायक खटटर को दिखाने लगे आँख -कांग्रेस को लगता है कि हरियाणा में भी महाराष्ट्र जैसे?

खट्टर को तेवर दिखाने लगे आजाद विधायक-कांग्रेस को लगता है कि हरियाणा में भी महाराष्ट्र जैसे?

दिल्ली  (राजकुमार अग्रवाल)

: माहाराष्ट्र में जो हुआ पूरा देश देख रहा है। किसी की सरकार नहीं बनी और राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। महाराष्ट्र के साथ ही हरियाणा के विधानसभा चुनाव हुए थे और हरियाणा में भाजपा ने बिना कोई मौका चुके जजपा और निर्दलीय विधायकों का साथ लेकर सरकार बना लिया और दीवाली के दिन सीएम और डिप्टी सीएम ने शपथ भी ले ली लेकिन मंत्रिमंडल का विस्तार अब भी अटका हुआ है। अब सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि निर्दलीय विधायक सरकार को नखरे दिखाने लगे हैं। आज शाम सीएम मनोहर लाल निर्दलीय विधायकों से मिले थे।
सूत्रों की मानेंतो  निर्दलीय विधायकों को जब पता चला कि  निर्दलीय विधायक रणजीत सिंह चौटाला को मंत्री बनाया जा सकता है। इसके बाद पांच निर्दलीय विधायक भी सक्रिय हो गए और मंत्री पद के लिए दबाव की राजनीति शुरू की। इन निर्दलीय विधायकों का नेतृत्व महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू कर रहे हैं। इन विधायकों में नयनपाल रावत, बलराज कुंडू, रणधीर गोलन, धर्मपाल गोंदर और सोमवीर सांगवान शामिल हैं। इन विधायकों ने नई दिल्‍ली स्थित हरियाणा भवन में बैठक की और आगे की रणनीति तैयार कीी।
इन विधायकों ने पहले कहा था कि हमने बिना शर्त सरकार को समर्थन दिया था लेकिन आज इन सबके तेवर बदल गए। अब ये विधायक सरकार पर दबाव बनाने लगे हैं। माना जा रहा है कि सिर्फ रणजीत सिंह को मंत्री बनाया गया तो ये विधायक सरकार के ख़िलाफ़ बिगुल बजा देंगे।

अगर ये विधायक नाराज होते हैं तो भाजपा को जजपा के पीछे-पीछे चलना पड़ेगा और जो दुष्यंत चौटाला कहेंगे वही करना पड़ेगा क्यू कि अगर ये निर्दलीय नाराज होते हैं और दुष्यंत खट्टर का साथ किसी कारण छोड़ते हैं तो भाजपा के पास बहुमत नहीं होगा। अब भाजपा बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और कांग्रेस भाजपा के हर कदम पर नजर रख रही है। कुछ कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है और अब वहां कुछ समय बाद फिर विधानसभा चुनाव होंगे और उसी के साथ हरियाणा में भी फिर विधानसभा चुनाव होंगे क्यू कि हरियाणा का बेमेल गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चल पायेगा। कुछ नेता जम्मू-कश्मीर के बेमेल गठबंधन का उदाहरण दे रहे हैं जिनका कहना है कि भाजपा ने महबूबा से मिलकर सरकार बनाई थी लेकिन ज्यादा समय तक नहीं चल सकी।

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