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हरियाणा प्रदेश के सियासी नजारे में बड़ा बदलाव ,मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दिखाई दरियादिली 

हरियाणा के नए मंत्री अपने-अपने स्वार्थों में डूबे तो  सरकार की लुटिया डूबने की भी आशंका रहेगी।

हरियाणा प्रदेश के सियासी नजारे में बड़ा बदलाव ,मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दिखाई दरियादिली

=राजकुमार अग्रवाल =
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई में भाजपा की लगातार दूसरी बार सरकार बनने के साथ ही प्रदेश के सियासी नजारे में बड़ा बदलाव आया है।
पिछली बार की सरकार के अधिकांश मंत्रियों के चुनाव हार जाने के बाद नए मंत्रिमंडल में नए चेहरों की भागीदारी और जेजेपी और निर्दलीय विधायकों के सहयोग से बनी नई सरकार की तस्वीर बता रही है कि सत्ता पक्ष के सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव आया है।
पिछली सरकार में बड़े चौधरी रहे रामबिलास शर्मा, कैप्टन अभिमन्यु, ओमप्रकाश धनखड़, करण देव कंबोज और कृष्ण बेदी की हार व राव नरबीर तथा विपुल गोयल की टिकट करने के चलते इस बार मंत्रिमंडल का नजारा पूरी तरह से बदला हुआ है।
मंत्रिमंडल के चेहरों की कतार बता रही है कि सरकार में शामिल सभी शख्सियतों के सियासी रसूख में बड़ा बदलाव आया है।

मनोहर हो गए दरियादिल

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस बार बड़े विभागों को अपने पास नहीं रखकर साथी मंत्रियों में बांटने का साकारात्मक फैसला लिया है। सीएम ऑफिस का अभिन्न अंग बन चुके गृह विभाग को भी छोड़कर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दरियादिली दिखाई है।
लगता है कि नई पारी में मुख्यमंत्री मनोहर लाल विभागों की मारामारी छोड़कर कप्तान के रूप में ताबड़तोड़ भूमिका निभाएंगे‌ मुख्यमंत्री मनोहर लाल पिछली बार की गलतियों से सबक लेते हुए इस बार नए तेवरों के साथ सरकार चलाते हुए दिखेंगे। भाजपा को बहुमत नहीं मिलने के चलते वह निराश जरूर हैं लेकिन अपनी नई पारी में वे पहले से बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं।

दुष्यंत ने क्या मुश्किलों का अंत

दुष्यंत चौटाला ने सरकार में हिस्सेदारी लेकर अपनी कई मुश्किलों का अंत कर दिया है। जेजेपी बनाने के 10 महीने के अंदर ही सरकार का भागीदार बनकर दुष्यंत ने जहां जेजेपी को सियासी रूप से मजबूत किया है वहीं दूसरी तरफ पार्टी वर्करों को भी 14 साल के सत्ता के वनवास में वापसी कराकर खुशी का माहौल बनाया है।
दुष्यंत चौटाला अगले 5 साल अब अपने विभागों में बढ़िया परफॉर्मेंस देते हुए जनता के चहेते नेता बनने की मुहिम में जुटेंगे। उपमुख्यमंत्री के रूप में दुष्यंत चौटाला पूरे प्रदेश की जनता का दिल जीतने का काम करेंगे।
दुष्यंत चौटाला सरकार में शामिल नहीं होते तो उनका अंजाम भी कुलदीप बिश्नोई के साथ 2009 में हुए घटनाक्रम की तरह होने की पूरी संभावना नजर आ रही थी।

विज की हुई मुराद पूरी

6 बार विधायक बनकर खुद को भाजपा के सबसे वजनदार नेता मानने वाले अनिल विज की मुराद गृहमंत्री बनने के साथ पूरी हो गई है। अनिल विज को आधा दर्जन महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा मिला है। विज को हैवीवेट बनाकर भाजपा ने इनको दुष्यंत के बराबर वजन देने का प्रयास किया है। दमदार मंत्री बनने के बाद अब यह देखने वाली सबसे बड़ी बात होगी कि वे पिछली बार की तरह लड़ने- भिड़ने वाले मंत्री ही रहेंगे या इस बार जिम्मेदार मंत्री साबित होंगे। विज की उप मुख्यमंत्री बनने की चाहत तो पूरी नहीं हुई लेकिन वह गृह मंत्री बन कर भी पूरी तरह से संतुष्ट हैं।

कंवरपाल की बदली चाल

कंवरपाल गुर्जर मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सबसे चहेते मंत्री हैं। मुख्यमंत्री का पूरा भरोसा होने के कारण ही उन्हें शिक्षा विभाग के अलावा संसदीय कार्य मंत्री और वन विभाग दिया गया है। मंत्री बनने के साथ ही कंवरपाल की चाल बदल गई है और अब वे खुद को दमखम वाला मंत्री साबित करना चाहते हैं।

रणजीत सिंह का सूखा खत्म

जन नायक चौधरी देवी लाल के बेटे रणजीत सिंह का सत्ता का सूखा 30 साल बाद खत्म हो गया है। निर्दलीय विधायक के बनने के बाद खट्टर सरकार में मंत्री बनने से रणजीत सिंह की वर्षों पुरानी हसरत पूरी हुई है अब मैं खुद को पहले की तरह सबसे बढ़िया मंत्री के तौर पर खुद को साबित की कोशिश करेंगे। रणजीत सिंह सिरसा जिले में खाली हुए इनैलो के मैदान पर प्रभाव जमाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। इस बार वे विधायक और मंत्री नहीं बनते तो उनका सियासी करियर खत्म हो जाता।

दलाल के गाल हो गए “लाल”

मर्सी चांस में विधायक बनने के साथ ही कृषि मंत्री और पशुपालन मंत्री के रूप में बड़े विभाग हासिल करने वाले जेपी दलाल के गाल सत्ता में बड़े हिस्सेदारी से “लाल” हो गए हैं। मुख्यमंत्री के खास कृपापात्र होने का उन्हें भरपूर फायदा मिला है और इसीलिए उन्हें बड़े विभाग में दिए गए हैं। अगर दलाल इस बार विधायक नहीं बनते तो उनकी सियासत का बिस्तर गोल हो जाता।

दादा की कमी पूरी करेंगे समधी

भाजपा की सरकारों में हमेशा भागीदार रहे रामबिलास शर्मा पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हैं। उन्होंने अपनी कमी को पूरा करने के लिए समधी मूलचंद शर्मा को मंत्री बनवा दिया है। मूलचंद शर्मा सरकार में ब्राह्मण वर्ग के इकलौते प्रतिनिधि हैं। उनके पास ब्राह्मणों का बड़ा नेता बनने का विकल्प खुला हुआ है।

राजा साहब का चला जलवा
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपने दो नजदीकी विधायकों डॉक्टर बनवारीलाल और ओम प्रकाश यादव को मंत्री बनवा दिया है। राजा साहब के दबाव में बनवारी और ओमप्रकाश मंत्री तो जरूर बन गए हैं। बड़े विभाग नहीं मिलने से दोनों नेताओं के समर्थक निराश जरूर हैं लेकिन दोनों नेताओं का कद मंत्री बनने से बड़ा हो गया है। राव साहब का “शिकार” बनने का दर्द नांगल चौधरी के विधायक अभय सिंह यादव को पूरी जिंदगी सालता रहेगा।

कमलेश पर कृपा हुई विशेष

कलायत से विधायक कमलेश डंडा की इंट्री मंत्रिमंडल में सबसे आश्चर्यजनक रही। चौथी जाट मंत्री के रूप में उनका नाम आना सबको हैरान कर रहा है। पहली ही बार विधायक और मंत्री बनने के बाद महिला व बाल विकास विभाग का जिम्मा मिलने के साथ उनका सियासी रसूख भी बढ़ गया है।

अनुप को मिला वफादारी का “सूप”

जेजेपी कोटे से इकलौती मंत्री बने अनूप धानक को अपनी वफादारी का बढ़िया “सूप” मिला है। पार्टी मुखिया दुष्यंत चौटाला ने उनके समर्पण का इनाम देते हुए उन्हें मंत्री बना दिया। पार्टी के समर्पित नेता को मंत्री बनाने से बीजेपी के वर्करों में भी खुशी का माहौल है मंत्रिमंडल के तीन अन्य दावेदारों रामकुमार गौतम, ईश्वर सिंह और देवेंद्र बबली को भी दुष्यंत जल्दी ही अडर्जेस्ट करने जा रहे हैं।

संदीप ने हासिल कर लिया “गोल”

पुलिस विभाग में बड़ी नौकरी छोड़कर राजनीति में प्रवेश करने वाले हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह ने विधायक बनने के बाद साथ साथ पहली ही बार में मंत्री बनकर “बड़ा गोल” हासिल कर लिया है। युवा होने के अलावा सिख समुदाय का एकमात्र प्रतिनिधि होना उनके लिए विशेष तौर पर फायदेमंद है‌। अब उन्हें इस गोल्डन चांस को भुनाते हुए खुद को दमदार खिलाड़ी की तरह दमदार नेता भी बनाना होगा।

बात यह है कि खट्टर सरकार में इस बार पूरी पप्लेइंग इलेवन चेंज हो गई है। पुराने खिलाड़ियों के टीम से आउट होने के चलते टीम में 9 नए खिलाड़ी साबित हो गए हैं।
विभागों के आवंटन में कुछ असंतुलन नजर आता है लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के अनुभव और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की प्रतिभा मिलकर सरकार को बेहतर तरीके से चलाने में मददगार साबित होंगे
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को पिछली गलतियों से सबक लेते हुए खुद को बेहतर कप्तान के रूप में साबित करना होगा।
– दुष्यंत चौटाला को सरकार के संकटमोचक के रूप में काम करते हुए उप कप्तानी की जिम्मेदारी निभानी होगी।
– अनिल विज पर ओपनिंग बैट्समैन होने के चलते लंबी पारी खेलने की जिम्मेदारी है। उन्हें पिछली बार के टकराव और भिड़ाव के तरीके को छोड़कर गंभीरता से अपनी पारी खेलनी होगी।
-5 साल तक विधानसभा को सफलता से चलाने वाले कंवरपाल गुर्जर को मंत्री के रूप में पहली पारी पूरी तरह सोच समझकर खेलनी होगी।
-मूलचंद शर्मा को बड़े ब्राह्मण नेता बनने के मौके को लपकते हुए जोरदार चौके- छक्के लगाने होंगे।
-30 साल बाद सत्ता की टीम में वापसी करने वाले रणजीत सिंह को अपने अनुभव का फायदा धोनी की तरह टीम को देना होगा।
-जेपी दलाल को पांड्या की भूमिका मे़ खरा उतरते हुए जोरदार काम करते हुए ऑलराउंडर खिलाड़ी साबित करना होगा।
-डॉक्टर बनवारीलाल और ओम प्रकाश यादव को स्पिन विभाग का जिम्मा उठाते हुए सरकार को मजबूती देनी होगी।
-आनुप धानक और संदीप सिंह को टीम की जरूरतों के अनुसार खेलते हुए असरदार खिलाड़ी साबित करना होगा।
अगर मंत्रिमंडल में शामिल सभी लोगों ने मिल जुलकर अपने विभागों के जिम्मेदारी इमानदारी से निभाई तो सरकार जनता की कसौटी पर खरा उतरने में सफल रहेगी और अगर मंत्री अपने-अपने स्वार्थों में डूब गए तो सरकार की लुटिया डूबने की भी आशंका रहेगी।

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