हरियाणा के नेता रस मलाई खाते हैं और पत्रकार सरकार की मीठी गोली चूसते हैं

हरियाणा सरकार का मीडिया से ऐसा व्यवहार क्यों ?
-राजकुमार अग्रवाल-
चंडीगढ़ , हरियाणा केेे पत्रकार पत्रकार ना होकर नेताओं और अफसरों की चापलूसी में लगेे हैं हुए हैं या फिर हरियाणा सरकार और अक्सर पत्रकारों को बेवकूफ बना रहे हैं जब समाचार प्रकाशित करवाने हो तो पत्रकार याद आ जाते हैं और मीडिया घराना याद आ जाता है लेकिन जब सुविधाएं देनेे की बात आती है तो पत्रकारोंं को दरकिनार कर दिया जाता हैै उनकी आवाज को दबा दिया जाता है जैसेे हरियाणा सरकार पत्रकारों पर कोई एहसान कर रही हो ! वैसेेे तो प्रेेेेस को चौथा स्तंभ माना गया है लेकिन नेताओं और सरकार की अफसरशाही के  के चलते जो सुविधाएं पत्रकारोंं को मिलनी चाहिए नहीं मिल रही आखिर क्यों ? क्या सुविधाएं सिर्फ नेताओं के लिए है जिन्हें जनता जन सेवक के रूप में चुनती है लेकिन हरियाणा की मौजूदा खट्टर सरकार कहने को तो मीडिया फ्रेंडली है और उसी ने पत्रकारों के लिए पेंशन की व्यवस्था की, हर जिले में मीडिया सेंटर बनाकर पत्रकारों को सुविधाएं प्रदान की और उनके लिए कुछ और नई दूसरी व्यवस्थाएं भी की परंतु पत्रकारों से यह सरकार इस मामले में कुछ ऐसी नीतियां भी प्रतिपालिंत करती प्रतीत हो कर रही है जिसे उस तरीके से देखा जा सकता है कि मीडिया सरकार के अंदरूनी मामलों से दूर रहे और यह सब तब हो रहा है जब लोक संपर्क विभाग खुद मुख्यमंत्री के पास है और विभाग के अतिरिक्त सचिव राजेश खुल्लर हैं जो इस समय लोक संपर्क विभाग के एसीएस भी हैंl

सबसे पहले एक परंपरा तोड़ने के मसले पर चर्चा करते हैं l राज्य मैं सदा से एक व्यवस्था रही है कि जब विधानसभा का सत्र होता है ,एक या दो बार मुख्यमंत्री या बजट सत्र में वित्त मंत्री की ओर से डिनर की व्यवस्था होती है l इस खास डिनर मैं किसी एक जगह सभी विधायकों अफसरों और मीडिया को आमंत्रित किया जाता है l यह आयोजन अमूमन मुख्यमंत्री आवास या हरियाणा निवास में आयोजित होते रहे हैं lयह गेट टुगेदर मीडिया के लिए इसलिए बहुत महत्वपूर्ण होती है कि इस समय पत्रकारों विशेषकर नए लोगों की राजनीतिज्ञों और अफसरों से अच्छी अट्रैक्शन हो जाती है अफसरों से राजनीतिज्ञों से बातचीत करने ,चर्चा करने का मौका मिलता है l कई लोग वहां भोजन करने के मकसद से नहीं बल्कि अफसरों पॉलिटिकल लोगों से मिलने का एक अच्छा माध्यम मानकर जाते हैं l देखा जाए तो यह आयोजन इन्हीं कारणों से मीडिया के लिए बहुत खास होता है l

हम जानते हैं कि इस परंपरा को हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री पंडित भगवत दयाल से लेकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अब मनोहर लाल खट्टर बहुत अदब और शिद्दत के साथ निभाते रहे हैं lमौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस व्यवस्था या परंपरा को अपने पिछले कार्यकाल तक निभाया परंतु इस बार सरकार बनते ही विधानसभा के पहले सत्र से पहले अचानक एक संदेश आया कि मुख्यमंत्री पंचकूला में मीडिया के लिए डिनर का आयोजन कर रहे हैं l यह आयोजन पंचकूला के जिमखाना क्लब में किया गया था lयह नई बात थी l

बहुत लोगों को लगा कि शायद नई सरकार पत्रकारों पर कुछ खास तौर पर बात मेहरबान है lपरंतु लगता है कि यह आयोजन अलग से अकेले मीडिया के लिए इसलिए किया गया कि सत्र के समय उन्हें मुख्यमंत्री के उस डिनर में मैं बुलाना पड़े जिसमें सब एमएलए और अफसर पहुंचते हैं l यह योजना किस की थी यह पड़ताल का विषय है l

आज से फिर सत्र शुरू हो रहा है lयह बजट सत्र है lबजट सत्र में उपरोक्त डिनर वित्त मंत्री की ओर से दिया जाता है lवित्त मंत्री खुद मुख्यमंत्री हैं l अब देखना है कि सरकार पत्रकारों के साथ डिनर करेगी या उन्हें पहले की तरह अलग से बुलाया जाएगा l

संबंधों की बात करें तो एक मसला और है l विधानसभा की ओर से एक सर्कुलर जारी हुआ है जिसमें कहा गया है कि इस सत्र में कोई भी पत्रकार कैमरा और मोबाइल फोन लेकर अंदर नहीं जाएगा किसी कारण से ले गए तो इसे एक कर्मचारी विशेष को सौंपना होगा l

ऐसा पत्र उस समय भी जारी हुआ था जब सुमित कुमार विधानसभा के सचिव होते थे lउस समय ऐसा करने के कारण और थे परंतु इस बार शायद यह दलील दी गई है कि पिछले दिनों किसी पत्रकार ने या किसी व्यक्ति विशेष में जेजेपी के विधायक राम कुमार गौतम की वीडियो रिकॉर्ड कर उसे वायरल कर दिया था l अब जानिए कि यह गलती किसकी थी l

जिम्मेदार दो ही लोग हैं विधायक या संबंधित वह व्यक्ति जिसने वीडियो बनाई और वायरल की ,और बंदिश लगाई जा रही है सभी मीडिया कर्मियों पर l अभी यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो वायरल करने वाला व्यक्ति कोई पत्रकार ही था कोई या कोई और ऐसे में कैमरे मोबाइल फोन में ले जाने वाला फैसला कितना तर्कसंगत है एक विकल्प यह भी हो सकता था कि इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष जरूरी निर्देश जारी करते कोई गाइडलाइन देकर कहते कि पत्रकार इन चीजों पर ध्यान दें lऐसा करें ,ऐसा ना करें lफिर भी कोई गलत करें तो कहा जा सकता है कि सवारी अपने सामान की खुद जिम्मेदार होगी l ऐसे फरमान जारी करने से पहले राजनीतिक लोग यह क्यों भूल जाते हैं कि यही पत्रकार इन्हीं कैमरों और मोबाइल फोन से उनके संदेश सूचना और दूसरी कारगुजारी जनता तक पहुंचाने का काम करते हैं l आज देखना है कि नए सिरे से जारी किए गए इस सर्कुलर का हश्र क्या होने वाला हैl

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