हरियाणा के सभी गाँव में अब नहीं है पंचायत ,मनोहर सरकार के  12 फरवरी के आदेश पर कोर्ट ने लगाई मोहर 

हरियाणा के सभी गाँव में अब नहीं है पंचायत ,मनोहर सरकार के  12 फरवरी के आदेश पर कोर्ट ने लगाई मोहर

हरियाणा के सरपंचों की हाईकोर्ट में याचिका खारिज
Chandigarh(atal hind)

All villages of Haryana no longer have panchayat, court orders stamp of Manohar government on February 12

Petition dismissed in the High Court of Haryana sarpanches

हरयाणा में  मौजुदा पंचायतों का कार्यकाल 23 फरवरी को समाप्त हो रहा है। और मनोहर लाल  सरकार ने 12 फरवरी को आदेश जारी कर सरपंचों को पदमुक्त करने का फैसला लिया था। जिसे सरपंचों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है।हाई कोर्ट के जस्टिस अनिल खेत्रपाल ने दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि पंचायत का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें आगे लगातार काम करते देने का उनका कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ऐसे में इस याचिका का कोई आधार नहीं है।

सरपंचों की ओर से दाखिल याचिका पर हाई कोर्ट में  सुनवाई हुई थी। याचिका दाखिल करते हुए सरपंच सोमेश व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि प्रावधान के अनुसार पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद ही सरपंच अपना पद छोड़ते हैं। याची ने कहा कि प्रदेश में अभी तक वार्ड बंदी का काम पूरा नहीं हुआ है और सरकार होने पर छोड़ने के लिए कह रही है।सरपंचों से पंचायत के लोगों को कई काम होते हैं और यदि सरपंच पद छोड़ देंगे तो लोगों को छोटे छोटे काम के लिए बीडीओ के पास जाना होगा। एक बीडीओ के अधीन सैकड़ों गांव होते हैं ऐसे में उनके लिए संभव नहीं होगा कि वे सभी काम कर सकें। अभी चुनाव कब होगा यह भी निश्चित नहीं है तो कैसे गांव के विकास को अनिश्चितकाल के लिए विराम कैसे दिया जा सकता है।साथ ही याची ने कहा कि जैसे विधानसभा और संसद भंग होने के बाद भी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद पर रहते हैं वैसे ही सरपंचों को भी अधिकार दिया जाना चाहिए। गांव के विकास में ही देश का विकास होता है और यदि गांव का विकास रुक जाएगा तो देश का विकास भी थम जाएगा। हाईकोर्ट से याची ने आदेश पर रोक लगाने की मांग की हाई कोर्ट याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा।

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