हरियाणा मंत्रिमंडल के गठन के साथ ही उभरा जातीय विरोध

हरियाणा मंत्रिमंडल के गठन के साथ ही उभरा जातीय विरोध

वैश्य समाज और बीसी-ए का विरोध आया सामने, रणजीत को मंत्री बना कर भाजपा ने निर्दलीयों के दबाव की निकाली हवा, असंतुट विधायकों पर तीसरे मोर्चा की नजर

ईश्वर धामु

भिवानी। हरियाणा की भाजपा-जेजेपी सरकार ने 6 कैबिनेट और 4 राज्य मंत्री बना कर मंत्रिमंडल का गठन तो कर लिया पर न तो भाजपा और न ही जेजेपी के सभी विधायक खुश हैं। मुख्यमंत्री तथा उप-मुख्यमंत्री के शपथ लेने के 18 दिन के रिकार्ड समय के बाद किए गए मंत्रिमंडल में जाट समुदाय को बड़ा प्रतिनिधित्व दिया गया। मंत्रिमंडल के दस सदस्यों में से चार जाट सदस्य हैं। जबकि अभी तक भाजपा पर गैर-जाट प्रभावी पार्टी का टेग लगा हुआ था। परन्तु वोटों की राजनीति के चलते भाजपा भी अब जाट प्रभावी होने लगी है। कहा जा रहा है कि जेजेपी की सहभागिता का प्रभाव कम करने को जाट वर्ग से मंत्री अधिक बनाए गए हैं। ऐसा लगता है कि भाजपा ने अभी से अगले विधानसभा की तैयारी शुरू कर दी है। मनोहर मंत्रिमंडल में चार जाट मंत्रियों के अलावा दलित वर्ग से दो, बीसी-बी और ब्राह्मण वर्ग से एक-एक, पंजाबी दो और गुज्जर समुदाय से एक मंत्री बने हें। लेकिन मंत्रिमंडल में बीसी-ए को और वैश्य समाज को स्थान नहीं मिल पाया है। इस पर वैश्य समाज ने तो अपना विरोध भी दर्ज करवा दिया है। अग्रवाल वैश्य समाज स्टूडेंट ऑर्गनायज़ेशन के प्रदेश संयुक्त मंत्री पंकज कसेरा ने कहा की प्रदेश में वैश्य समाज के आठ विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे है, परंतु आठों में से एक भी वैश्य समाज के विधायक को मंत्रिमंडल में जगह न देना अग्रवाल समाज का अपमान है। दूसरी ओर बीसी-ए में भी रोष उभरा कर सामने आ रहा है। चर्चाकारों का कहना है कि रणजीत सिंह को मंत्री बना कर भाजपा ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि पार्टी या सरकार निर्दलीय विधायकों के दबाव में आने वाली नहीं है। क्योकि सरकार पर दबाव बनानेक ेलिए बीते कल पांच निर्दलीय विधायकों ने दिल्ली के हरियाणा भवन में बैठक कर भाजपा पर दबाव बनाने का प्रयास किया था। इन पांच निर्दलीयों का नेतृत्व बलराज कुंडू कर रहे हैं। जबकि प्रारम्भ से ही बलराज कुंडू और रणजीत सिंह को मंत्री बनाने की चर्चा थी। लेकिन रणजीत सिंह मंत्रिमंडल में स्थान पाने में सफल हो गए। बताया गया है कि निर्दलीयों ने यह बैठक मंत्री पद पाने के लिए की थी। लेकिन भाजपा ने निर्दलीयों की रणनीति की हवा निकाल दी। बताया गया है कि अब निर्दलीय नई रूपरेखा बनायेंगे। अब इनका निशाना राजनैतिक लाभ के पदों पर होगा। क्योकि यह पहले से ही प्रचारित है कि भाजपा उन विधायकों को लाभ का पद देकर संतुष्ट करेगी, जिनको मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलेगा। ऐसे विधायकों की भाजपा में भी कमी नहीं है। अब मंत्रिमंडल के गठन के बाद कथित रूप से नाराज भाजपा व जेजेपी के विधायकों पर प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चा के गठन में प्रयासरत जनता दल यूनाइटिड के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अमित लाम्बा ने नजरें लगाई है। सूत्र बताते हैं कि अब लाम्बा असंतुष्ट विधायकों से सम्पर्क कर अपने मोर्चा में शामिल करने का प्रयास करेंगेे। अभी तक वें विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहने वाले प्रत्याशियों से सम्पर्क साधने में लगे हुए है। अब चर्चाकार भी इन सम्भावनाओं को प्रबल मान रहे हैं।

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